सूरतगढ, (राजेन्द्र उपाध्याय ) नगरपालिका की शनिवार को हुई हंगामा खेज बैठक में 16 पार्षदों के बहिष्कार के बाद महिला पार्षदों ने मोर्चा सम्भालते हुए सभी प्रस्ताव पारित कर दिये। पार्षदों ने ओवरब्रिज की मांग को लेकर सदन में काफी देर तक धरना देते हुए हंगामा मचाया।
अध्यक्ष इकबाल मोहम्मद कुरैशी की अध्यक्षता में शुरू हुई बैठक में करीब 2 घंटे तक प्रस्तावों की बजाय अन्य मुद्दों पर चर्चा होती रही और जब प्रस्तावों पर चर्चा शुरू हुई तो 16 पार्षद विभिन्न आरोप लगाते हुए बैठक का बहिष्कार कर चले गए, लेकिन उपस्थित 9 महिलाएं इस बहिष्कार में शामिल नहीं हुई। हालांकि इन्हें बुलाने के काफी प्रयास हुए लेकिन वे नाकाम रहे। महिलाओं के साथ 6 पार्षद भी बहिष्कार में शामिल नहीं हुए। इसके बाद करीब 5 मिनट में ही बैठक में रखे 12 प्रस्तावों पर चर्चा कर 1॰ पारित कर दिए गए जबकि 2 अगली बैठक के लिए टाल दिए गए।
बैठक के प्रारम्भ में पार्षदों ने आरोप लगाया कि शहर की महत्वपूर्ण समस्या ओवरब्रिज के प्रति नगरपाकिा प्रशासन बिल्कुल गम्भीर नहीं है। लगातार मांग उठाए जाने के बावजूद भी पालिकाध्यक्ष इस मामले से बचने की कोशिश कर रहे हैं। आक्रोशित पार्षदों ने शोर शराबा करते हुए सदन में ही धरना शुरू कर दिया। धरने में पालिका उपाध्यक्ष विनोद पटनी भी शामिल हो गए। काफी देर की गहमा-गहमी के बाद पालिकाध्यक्ष कुरैशी ने आश्वस्त किया कि वे पार्षदों को साथ लेकर जयपुर में सरकार से मिलेंगे। इस पर पार्षदों ने धरना समाप्त किया। इसके बाद अधिशाषी अधिकारी ने बैठक की कार्यवाही शुरू करते हुए प्रस्ताव संख्या 1 गत बैठक की पुष्टी रखा तो पार्षद महावीर शर्मा ने गत 2 वर्षों की फिनाइल बाबत हिसाब जानना चाहा। इसके साथ ही पार्षद श्रवण स्वामी व मदन ओझा ने नई कार की लॉग बुक सदन में सार्वजनिक करने को कहा। ये दोनों नहीं बताने पर काफी देर हंगामा होता रहा। इसके बाद लॉग बुक मंगवाई तो वह 9 जून तक की इन्द्राज थी। इस पर पार्षदों ने पालिकाध्यक्ष को हिदायत दी कि भविष्य में ऐसा नहीं होना चाहिए वरना कार को रास्ते में ही रोक लिया जाएगा। यह मामला निपटा ही था कि पार्षद सुभाष सैनी ने अपने वार्ड की एक सडक बीच में रहने का मुद्दा उठाया। सैनी ने आरोप लगाया कि सडक का निर्माण 5 साल से अधर में पडा है इसके बावजूद भी नगरपालिका कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि जे.के. कन्स्ट्रक्शन कम्पनी की यह फाइल नगरपालिका में न होकर ठेकेदार के घर पडी है। इस पर पार्षदों ने यह फाइल सदन में पेश करने को कहा तो अध्यक्ष ने बताया कि अलमारी की चाबी एईएन के पास है और वे शहर से बाहर हैं। इस प्रकरण को लेकर काफी देर हंगामा होता रहा। पार्षदों ने पालिका प्रशासन पर उन्हें मूर्ख बनाने व लीपापोती करने का आरोप लगाते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया। उपस्थित 32 पार्षदों में 16 पार्षद ही सदन से बाहर गए। लेकिन उपस्थित नौ महिला पार्षद व छः अन्य बैठक में ही जमे रहे। इसके बाद अधिशाषी अधिकारी ने सभी प्रस्ताव पढे जिनमें 2 को छोड शेष पारित कर दिए गए। चर्चा में पार्षद जगदीश मेघवाल, सुशील अग्रवाल, मदन ओझा, अजय धींगडा, हरीश सेखसरिया, रोशनलाल शर्मा, परमजीत सिंह पम्मी, दुर्गा आसेरी, संतोष बगेरिया, मोहनसिंह, खुशाल सिंह राठौड, अहिंसा गोदारा आदि ने भाग लिया।
10 प्रस्ताव मात्र 5 मिनट मं ही पारित
सूरतगढ। एक दर्जन प्र*स्तावों में 10 प्रस्ताव मात्र 5 मिनट मं ही पारित कर दिये गए। दो प्रस्तावों को अगली बैठक के लिए रखा गया है। अधिशाषी अधिकारी भंवरलाल सोनी के अनुसार रेलवे स्टेशन के बाहर प्याऊ हेतु जगह देने तथा 10 माह से अधिक सार्वजनिक नीलमी से विक्रय भूमि की तीन चौथाई राशि जमा करवाने के प्रस्ताव पारित नहीं हो पाए जबकि गत बैठक की पुष्ठी निर्माण कार्यों की स्वीकृति सफाई ठेका की प्राप्त दरों की पुष्ठी, मृत पशुओं की हड्डी व चमडा ठेका की प्राप्त आय, ठेका की पुष्ठी, मृत पशुओं के पालिका स्तर पर विक्रय किये गए चमडा के 2॰ नग की पुष्टी, यूआईडीएसएसएमटी योजना तथा आईएचएसडीपी योजना का अनुमोदन, सूरतगढ उत्सव मेले की कार्यवाही की पुष्टी तथा ठोस कचरा निष्पादन हेतु लैण्ड फील साइट विकसित करने के लिए सहमति की स्वीकृति जारी करने के प्रस्ताव पारित किये गए हैं।
पुरुष पार्षदों को दी मात
सूरतगढ। आम तौर पर नगरपालिका की बैठक में शांत रहने वाली महिला पार्षदों ने अपने विवेक से निर्णय लेकर पुरुष पार्षदों को मात दे दी है। महला पार्षदों ने न केवल प्रस्ताव पारित किए बल्कि यह भी अहसास करवा दिया कि वे किसी की कठपुतली नहीं है। शनिवार को हुई बैठक में कुछ पार्षदों ने बहिष्कार की घोषणा करते हुए सभी पार्षदों को बैठक से चलने का आह्वान कर दिया। हालांकि यह पार्षद उपस्थित 32 पार्षदों में आधे को ले जाने में कामयाब भी हो गए, लेकिन उपस्थित 9 महिला पार्षद बहिष्कार का ही बहिष्कार कर दिया। इन महिला पार्षदों को बुलाने के अनेक प्रयास हुए पर ये तो नहीं खडी हुई बल्कि बहिष्कार करने वाले दो पुरुष पार्षदों को वापस लौटने पर विवश कर दिया। पालिकाध्यक्ष ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वे महिला पार्षदों के इस निर्णय की कदर करते हैं। इन महिला पार्षदों ने व्यक्तिगत स्वार्थों को लेकर राजनीति करने वाले पार्षदों को मुंह की खाने पर विवश कर दिया।
32 पार्षदों में आधे सदस्यों ने किया बैठक का बहिष्कार
सूरतगढ। पालिका बैठक में तीन मनोनीत सहित उपस्थित 32 पार्षदों में आधे सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार किया। जबकि इतने ही पार्षदों ने बैठक की कार्यवाही जारी रखी। बहिष्कार करने वाले पार्षदों में महावीर शर्मा, सुभाष सैनी, मदन ओझा, सुशील अग्रवाल, राजेन्द्र ताखर, मंगलाराम घोयल, हरीश सेखसरिया, श्रवण स्वामी, परमजीत सिंह पम्मी, इन्द्र चन्द सरावगी, रोशनलाल वर्मा, परमेश्वरी गोदारा, खुशाल सिंह राठौड शामिल थे। जबकि बैठक में उपस्थित रहे पार्षदों में पालिकाध्यक्ष व उपाध्यक्ष सहित विद्यादेवी उपाध्याय, अहिंसा गोदारा, संतोष बगेरिया, उमा मोदी, दुर्गा आसेरी, कमलेश अरोडा, गीता देवी सरस्वा, अजय धींगडा, चेतन सोनगरा, टोनी भाट, जगदीश मेघवाल, चेतन सोनगरा शामिल थे। बताया गया है कि राजेन्द्र ताखर, रोशनलाल शर्मा, मंगलाराम घोयल ने बताया कि वे तो लघु शंका के लिए बाहर गए थे।