नई दिल्ली, राजस्थान के कृषि मंत्राी हरजीराम बुरडक ने राजस्थान में सूखे की विषम स्थिति से निपटने के लिए केन्द्र सरकार से पांच हजार तीन सौ बीस करोड रूपये की सहायता प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा फसलों को हुए नुकसान का आकंलन करने के लिए गिरदावरी करवाई जा रही हैं जिसकी रिपोर्ट शीघ्र मिलने वाली हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार द्वारा केन्द्र को विस्तृत ज्ञापन दिया जायेगा।
नई दिल्ली के पूसा इंस्टीट्यूट में केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार की अध्यक्षता में आयोजित राज्यों के कृषि मंत्रियों के एक दिवसीय सम्मलेन में बुरडक ने राजस्थान में मानसून की विफलता के कारण उत्पन्न हुई सूखा एवं अकाल की विषम परिस्थितियों की विस्तार से जानकारी दी।
बुरडक ने बताया कि सूखे की स्थिति का सामना करने के लिए प्रारम्भिक अनुमान के अनुसार राजस्थान को फसल बीमा के मुआवजे की राज्य द्वारा देय ५० प्रतिशत हिस्सा राशि की क्षतिपूर्ति के रूप में ४५० करोड रूपये, चारा मिनिकिट्स के वितरण के लिए २० करोड, डीजल पर अनुदान राशि के रूप में ३० करोड, खरीफ के लिए आपदा प्रबंधन कोष से २०२० करोड और रबी में देय प्रौत्साहन राशि के रूप में २८०० करोड रूपये की आवश्यकता होगी।
उन्होंने बताया कि राजस्थान में खरीफ की फसलें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और इनमें ७५ प्रतिशत से भी अधिक खराबा हो गया हैं। प्रदेश में इस बार मानसून सात से दस दिन विलम्ब से पहुचा और २७ जुलाई के पश्चात् तो छुटपुट वर्षा को छोडकर वर्षा पूरी तरह से बन्द रही। इस प्रकार राज्य में सामान्य औसत वर्षा से लगभग ३४ प्रतिशत कम वर्षा हुई है और जो वर्षा हुई है वह भी उचित अन्तराल में न होकर एक साथ ही हुई है जिसकी वजह से खरीफ की फसले बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं।
बुरडक ने बताया कि प्रदेश के सूखा और अकाल प्रभावित क्षेत्रों में राज्य की फसल पद्वति को देखते हुए अब किसी प्रकार की वैकल्पिक फसल खरीफ में बोया जाना संभव नहीं हैं। वर्तमान परिस्थितियों में पशुओं के लिए अधिक से अधिक चारा उत्पन्न हो सके इसके प्रयास किये जा रहे हैं। साथ ही रबी फसलों के अग्रिम बुवाई के लिए सरसों, चना, चारा और अन्य समसामयिक फसलों की बुवाई करायी जाएगी। खडी फसल की सुरक्षा के लिए उठाये जाने वाले कदमों की जानकारी देते हुए बुरडक ने बताया कि राज्य सरकार इसके लिए हर सम्भव प्रयास कर रही है और इन्दिरा गांधी नहर परियोजना की नहरों में अतिरिक्त पानी छुडवाने के प्रयास किए जा रहे है।
उन्होंने बताया कि राज्य के ३४६ बांधों में से अधिकंश बाधों में पानी भराव क्षमता से काफी कम हैं। मानसून की प्रतिकुल स्थिति के कारण वर्तमान में भांखडा बांध में कुल भराव क्षमता का ४५.४० प्रतिशत , पोंग बांध में ३२.२५ प्रतिशत, गांधी सागर में १९.२० प्रतिशत और माही बजाज सागर बांध में कुल भराव क्षमता का ३६.९५ प्रतिशत पानी ही उपलब्ध हैं।
उन्होंने राज्य में सूखे से प्रभावित किसानों को खरीफ एवं रबी फसल की सिंचाई के लिए केन्द्र से डीजल पर दो हजार रूपये प्रति हैक्टर की दर से* अनुदान दिये जाने की मांग की। साथ ही केन्द्रीय आपदा कोष से खरीफ २००९ के लिए किसानों को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जानी वाली राशि को दुगना करने की मांग करते हुए असिंचित क्षेत्राों में ४ हजार रूपये प्रति हैक्टर और सिंचित क्षेत्रों में ८ हजार रूपये प्रति हैक्टर की दर से हर्जाना दिये जाने की जरूरत बताई। इसके अलावा राष्ट्रीय फसल बीमा योजना के अन्तर्गत किसानों को दी जानी वाली सम्भावित मुआवजा राशि ९०० करोड रूपये में से राज्य सरकार के हिस्से की आधी राशि ४५० करोड रूपया भी प्रदेश में भीषण सूखे की स्थिति को देखते हुए केन्द्र सरकार द्वारा वहन करने की मांग भी की।
बुरडक ने बताया कि राजस्थान सरकार भीषण सूखे की धौर विपत्ति के समय किसानों को विशेषकर कमजोर वर्ग के लोगों को हर प्रकार की सहायता देने के लिए प्रयासरत हैं। किसानों की स्थिति इन विषम परिस्थितियों का सामना करने की हालत में नहीं हैं। अतः केन्द्र सरकार को इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता के आधार पर प्रदेश को वित्तीय सहायता देनी चाहिए और विस्तृत ज्ञापन आने से पहले तुरन्त ही १६०० करोड रूपये की सहायता राशि जारी करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि अगस्त के अंतिम सप्ताह में समुचित वर्षा होने की दशा में संरक्षित जल का उपयोग कर राज्य की मुख्य दलहन फसल चना की बुवाई के लिए किसानों को प्रेरित किया जायेगा। अतिरिक्त आदान मांगों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि आगामी रबी के लिए राजस्थान को कुल १४.५० लाख मैट्रिक टन उर्वरकों की मांग रहेगी। उन्होंने बताया कि अग्रिम बुवाई की अवस्था में उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए माहवार योजना तैयार की है। केन्द्र सरकार से तदनुरूप व्यवस्था अपेक्षित हैं। प्रदेश म अनुमानित ७० लाख रबी क्षेत्राफल में बुवाई मानते हुए किसानों को ४ हजार रूपया प्रति हैक्टर की दर से २८०० करोड रूपये के निशुल्क बीज और उर्वरक वितरण की विशेष सहायता दिया जाना प्रस्तावित हैं।
बुरडक ने बताया कि मानसून के असफल हो जाने के कारण प्रदेश में खरीफ के अन्तर्गत कृषि गतिविधियों का समुचित तौर पर क्रियान्वयन नहीं हो पाया हैं। विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत अवशेष राशि का रबी में सदुपयोग करने के लिए मुख्य रूप से राज्य में चारा फसलों की अधिकाधिक बुवाई, जल संरक्षण गतिविधियों और माइक्रो इरीगेशन को बढावा, कृषि के साथ-साथ सहायक गतिविधियों को बढावा देने के लिए किसानों में चेतना अभियान चलाना और रबी में जहां सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं वहां सघन प्रयासों व आदान उपलब्ध करवाकर फसलों की उत्पादकता वृद्धि के प्रयास किये जायेगें। साथ ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अन्तर्गत उत्पादन को बढाने के लिए स्थानीय नवाचारों को प्रोत्साहन दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से कन्टीजेन्सी प्लान विकसित कर इसके प्रचार प्रसार में कृषि विज्ञान केन्द्रो और विश्वविद्यालय से मदद ली जा रही हैं।
बैठक में राजस्थान के प्रमुख कृषि सचिव श्री एस.अहमद, कृषि आयुक्त जेसी मोहन्ती और उद्यान सचिव श्री संजय दीक्षित ने भी भाग लिया।