बीकानेर, मेडिकल कॉलेज मैदान में आयोजित आयुर्वेद मेले (आयुष २००८) के दूसरे दिन काफी संख्या में महिलाओं ने सौन्दर्य प्रसाधन स्टॉल पर दक्ष चिकित्सकों से परामर्श लिया । आयुर्वेदिक, युनानी एवं हॉमियोपैथी स्टॉलों पर दोहपर बाद से रोगियों की करतारे देखी गई।
मेले म मदनमोहन मालवीय आयुर्वेद कॉलेज उदयपुर के प्रोफेसर डा.महेश दीक्षित ने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में हुए विकास एवं उपचार पर विस्तार से उपस्थित जनों की जिज्ञासाओं को शान्त किया। उन्हने आम जन कैसे स्वस्थ रहे,पर कहा कि स्वाभाविक प्रकि्रया में गतिरोध आने पर मनुष्य अस्वस्थ हो जाता है। जैसे हम दिल्ली के रास्ते पर जा रहे और कल्पना में अहमाबाद जाने की रहे है। यह कल्पना निश्चित रूप से मानसिक रोग का कारण बनेगी। स्वस्थ रहने के लिए उन्होंने प्रकृति के साथ चलने पर जोर दिया।
अतिरिक्त निदेशक आयुर्वेद डा.मदन मोहन शर्मा ने कहा कि परम्परागत तरीकों के अपनाने से मनुष्य स्वस्थ रह सकता है। आज के आधुनिक युग के खान-पान की वजह से अस्वस्था बढ रही है। हम अपना परम्परागत खान बदल रहे है। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से त्रिाफला सेवन से स्वस्थ रहा जा सकता है। जिसे आज की भाषा में ‘एन्टिआक्सी डेन्ट‘ कहा गया है।
जिला आयुर्वेद चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डा.नरेन्द्र शर्मा ने बताया कि मेले में सौर्न्दय प्रसाधन स्टाल पर महिलाओं एवं युवतियों की संख्या में काफी बढोतरी हुई हैं। सांय पांच बजे तक करीब 50 महिलाओं ने अपना उपचार कराया। आयुर्वेद, यूनानी एवं हॉमियोपैथी की स्टॉलों पर लगभग 260 रोगियों का पंजीयन हुआ। योग गुरू ब्रजेन्द्र त्रिपाठी के निर्देशन में सुबह साढे छह बजे से आठ बजे तक योग्याभ्यास हुआ। डा.त्रिापाठी ने बताया कि यदि योग का नियमित अभ्यास किया जाये तो रोग से बचाव हो सकता है। वैद्य गौरीशंकर शर्मा ने प्रशिक्षुओं को न्योली कि्रया को सहज कर सकने के उपाय बताए एवं इसके फोयदे में बताया कि यह कि्रया समस्त उदर रोगों का नाश करने वाली है।