राजस्थान का विख्यात राज्य स्तरीय चन्द्रभागा पशु मेला
21 Nov
2007 इस मेले में सभी प्रकार की दुकाने लगती हैं, जिनके अलग-अलग मार्केट होते है। पाटन मेले का कोट एवं कपडा मार्केट अपनी विशेष पहचान रखता है।
जयपुर। राजस्थान में पशुपालन विभाग के तत्वावधान में आयोजित किये जाने वाले राज्य स्तरीय मेलों में चन्द्रभागा मेले का महत्वपूर्ण स्थान है। प्रदेश के हाडौती अंचल के झालावाड जिले की ऐतिहासिक झालरापाटन नगरी के समीप बहने वाली पुण्य सलिला चन्द्रभागा नदी के पावन तट पर कार्तिक पूर्णिमा पर यह वार्षिक मेला आयोजित होता है।
विभागीय तौर पर भले ही इस मेले को पशु मेला कहा जाता है लेकिन वस्तुततः यह इस अंचल का एक प्रमुख धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं व्यापारिक मेला है, जिसमें राजस्थान सहित अन्य कई प्रांतों के पशुओं के व्यापारी एवं दुकानदार यहां आते है। कार्तिक मास में महिने भर तक ब्रह्म मुहूर्त में स्नान एवं व्रत रखने वाले हजारों श्रद्धालु पूर्णिमा को चन्द्रभागा नदी में स्नान को पुण्य फलदायी कार्य मानते हैं। कार्तिक स्नान को स्थानीय लोक भाषा ‘काती का न्हाण‘ या ‘काती न्हाबो‘ कहा जाता है। पुण्य स्नान के लिए बडी तादाद में श्रद्वालुओं की उपस्थिति के कारण चन्द्रभागा का मेला पुष्कर मेले की भांति धार्मिक स्वरूप भी लिये हुए होता है।
सुप्रसिद्ध चन्द्रभागा मेले में उत्तम मालवी नस्ल के बैल, गाय, भैस, घोडे, ऊंट आदि मवेशी प्रचुर मात्रा में क्रय-विक्रय के लिए लाये जाते हैं। मेले में प्रवेश करने वाले पशुओं की प्रवेश से पूर्व लाल चिट्टी निःशुल्क काटी जाती है लेकिन बिके हुए पशुओं की सफेद चिट्टी कटवाना अनिवार्य होता है। तीन वर्ष से कम उम्र के बछडों को राज्य से बाहर ले जाने की स्वीकृति नहीं दी जाती है। मेले में प्रकाश, पेयजल, चिकित्सा, स्वच्छता एवं सुरक्षा की माकूल व्यवस्थाऐं की जाती है। पशुओं तथा ग्रामीणजनों की विविध प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन किया जाता है।
इस मेले में सभी प्रकार की दुकाने लगती हैं, जिनके अलग-अलग मार्केट होते है। पाटन मेले का कोट एवं कपडा मार्केट अपनी विशेष पहचान रखता है। शरद ऋतु आरंभ होने के साथ ही लगने वाले इस मेले में गर्म कपडों की सैकडों दुकानें सजती है, जिन्हें बेचने के लिए दूरदराज के दुकानदार यहां आते हैं। ग्राहक यदि चाहे तो बहुत सस्ते में भी पूरा गर्म सूट खरीद कर सूट पहनने की चाहत को पूरा कर सकता है। कपडा मार्केट में मिलने वाले रेडीमेड ऊनी एवं सूती कपडों की खरीद के प्रति मेले में आने वाले आगन्तुकों में बहुत आकर्षण दिखाई देता है। खास तौर से नवयुवक, नवयुवतियां, महिलाऐं और बच्चे यहां आकर वस्त्र परिधान के मामलों में अपना शौक पूरा कर सकते हैं। दुकानदार बताते हैं कि उनकी दुकानों पर न केवल निर्धन और मध्यम स्तर के लोग आते है बल्कि धनाढय वर्ग, बडे-बडे अधिकारी और उनके परिवारजन भी सिले सिलाये गर्म वस्त्र, कई प्रकार के परिधान खरीद कर ले जाते हैं। घर परिवार में काम आने वाले आइटमों में ऊनी रजाईयां, परदे, तकिये, बेडशीट, कम्बल आदि की भी इस मेले में खूब बिक्री होती है।
इस वर्ष २१ नवम्बर से विधिवत शुरू हुए चन्द्रभागा मेले में २३ नवम्बर को सायंकाल होने वाली महाआरती तथा २३ व २४ नवम्बर को चन्द्रभागा नदी में होने वाला दीपदान का कार्यक्रम श्रद्धालुओं एवं मेलावासियों के लिए आकर्षण का केन्द्र होगा। पशुओं तथा पशुपालकों की २४ व २५ नवम्बर को आयोजित लम्बी मूंछ, साफा बांधो एवं रस्साकशी आदि प्रतियोगिताओं में भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन होगा। राजस्थान एडवेंचर के जाबाज कलाबाजों द्वारा २४ व २५ को पाटन एवं झालावाड में साहसिक विल गतिविधियां प्रस्तुत की जायेंगी, जिनमें पैरा सेलिंग, पैरा मीटरिंग एवं बैलूनिंग आदि क्रीडा प्रतियोगिता दर्शकों को प्रेरित करेंगी। मेला परिसर में विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं द्वारा विभागीय प्रदर्शनी मण्डप बनाये जायेंगे। बहुरंगी सांस्कृतिक कार्यक्रमः इस वर्ष २३ से २६ नवम्बर तक पर्यटन विभाग के सौजन्य से बहुरंगी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इनमें २३ नवम्बर को राजस्थानी सांस्कृतिक संध्या में राजस्थान के विविध अंचलों से आए लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दगे। चौबीस नवम्बर की शाम अनूठी सांस्कृतिक संध्या के रूप में सजेगी। इसमें देश के विविध प्रांतों यथा राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, उडीसा आदि के ख्यातनाम लोक कलाकार अपनी ‘दी बेस्ट‘ प्रस्तुतियां देंगे। ‘बेस्ट ऑफ इंडिया‘ के नाम से आयोजित यह बहुरंगी सांस्कृतिक संध्या पाटन मेले के लिए यादगार शाम होगी। चन्द्रभागा मेला परिसर में ही २५ नवम्बर को भव्य स्टार नाइट का आयोजन पर्यटन विभाग के सौजन्य से होगा। इस फिल्मी शाम को नृत्य-संगीत की प्रस्तुतियों से खुशनुमा बनाया जायेगा। इसी क्रम में २६ नवम्बर को मेला मंच पर भजन संध्या का आयोजन भी किया जायेगा। मेला परिसर के साथ-साथ पाटन एवं झालावाड नगरों के प्रमुख चौराहों तथा प्राचीन पुरास्मारकों पर भी दिनभर लोक कलाकार लोक नृत्य एवं लोक संगीत से दर्शकों का मनोरंजन करते रहेंगे। दर्शकगण भव्य आतिशबाजी का नजारा २५ नवम्बर को स्टार नाइट के बाद देख सकेंगे। इस प्रकार झालरापाटन का यह वैविधतापूर्ण मेला करीब डेढ माह तक झालावाड जिले में विशेष हलचल एवं आकर्षण का केन्द्र रहेगा।