बीकानेर नगर निगम के महापौर चुनाव को लेकर राजनैतिक सरगर्मियाँ अब और तेज हो गई है। एक समय महापौर पद के निर्दलीय प्रत्याशी बैद के अच्छे चुनाव प्रचार से नगर निगम चुनाव त्रिकोणीय होता लग रहा था लेकिन चुनाव से पहले उनके बीमार हो जाने से अब चुनाव में दो दिग्गजों का सीधा मुकाबला ह। मतदान में एक दिन बाकी रहा है और वर्तमान चुनावी माहौल कांग्रेस प्रत्याशी भवानी शंकर शर्मा के पक्ष में नजर आ रहा है। इसको लेकर बीकानेर के सटोरियो ने भी भवानी शंकर की जीत बता रहे है। जिले के दो विधानसभा क्षेत्र पूर्व व पश्चिम में कुल तीन लाख ४८ हजार ४९२ मतदाता नगर निगम के महापौर को चुनेगें लेकिन एक खास बात यह है कि इन दोनों विधान सभा क्षेत्रों के विधायक भाजपा के हैं जिन्होने पिछल विधान सभा चुनावों में पश्चिम में १८८६१ व पूर्व में ३७६५३ मतों से कांग्रेस प्रत्याशियों को मात दी थी। नगर निगम क्षेत्रों में कांग्रेस भाजपा से ५६५७४ मतों से पिछडी थी लेकिन उसके बाद लोकसभा चुनावों में दोनों विधान सभा क्षेत्रों में कांग्रेस के मतों में थोडा सुधार हुआ मगर हार को जीत में नही बदल सके। अब बारी है नगर निगम महापौर चुनाव की। वर्तमान में जो शहर में हवा चल रही है उससे माहौल बदला बदला नजर तो आ रहा है मगर नतीजे क्या होगे अभी कुछ कहना असंभव है। क्योंकि आकंडो के अनुसार भाजपा के पक्ष में जाते है। और माहौल कांग्रेस प्रत्याशी भवानी शंकर शर्मा के पक्ष में नजर आ रहा है। मतदाता अगर स्थानीय चुनाव मानकर मतदान करते है और पार्टियों से ज्यादा प्रत्याशियों की छवि को देखकर वोट देते है तो लोग इसमें भवानी शंकर की छवि को साफ मानते हैं। जिसका फायदा उन्हे जरूर मिलेगा। लेकिन वह नगर निगम क्षेत्र में कांग्रेस व भाजपा का ५६५१४ मतों के फासले को जीत पायेंगे इसके लिए अभी कहना मुश्किल है। इधर भाजपा प्रत्याशी गोपाल गहलोत की भी कुछ मामलों को छोडकर छवि खराब नही है। उनको भी मतदाता युवा नेता मानते हैं मगर उनकी चुनावी कमजोरी का कारण भाजपा की आंतरिक कलह बनी हुई है जिसे अब खत्म करने के पूरे प्रयास उच्च स्तर पर शुरू हो गये हैं। ऐसे में अब भाजपा के प्रदेश नेतृत्व के डंडे के भय से कई नाराज भाजपाई अब गोपाल गहलोत के साथ नजर आने लगे है । कुल मिलाकर नगर निगम महापौर पद के लिए हार जीत का अगर मंथन किया जाये तो माहौल भवानी शंकर शर्मा के पक्ष का लगता है। इसके अलावा उनके प्रतिद्वंदी भाजपा प्रत्याशी के रूप में महापौर का टिकट लेकर आने से गोपाल गहलोत की राजनैतिक चालों के सामने कई दिग्गजो ने घुटने टेक दिये लेकिन कांग्रेसी उनकी हार निश्चित मानकर गलतफहमी कर रही है। क्योकि गोपाल गहलोत भी चुनाव लडने में कमजोर खिलाडी नहीं है उन्होने वर्ष २००३ में कोलायत विधानसभा चुनावों में दिग्गज नेता देवीसिंह भाटी के सामने पहली बार चुनाव लडकर पचास हजार वोट हासिल किये थे। उस वक्त के कोलायत विधानसभा वर्तमान बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के ३० वार्डो में १७ हजार वोटो की बढत ली थी । वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह साफ है कि नगर निगम क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी की हालत अब ठीक नहीं है। पार्टी के प्रति मतदाताओं कि नाराजगी कायम ह। मगर उस पार्टी के प्रत्याशी भवानी शंकर की छवि व सीधेपन से लोग प्रभावित है। उनको जितने भी वोट मिलेगे वह उनकी व्यक्तिगत छवि से मिलेगे ।