विजेता सिंह दूसरे व राधिका मल्ल तीसरे स्थान पर रही
बीकानेर, (का.स.) बीकानेर के नयाशहर स्थित बेसिक पी जी महाविद्यालय में आज पिछले दो माह से चल रही वाद विवाद प्रतियोगिता का अंतिम दौर आयोजित हुआ। यह प्रतियोगिता आर्थिक उदारीकरणः भारतीय संदर्भ में विषय पर आयोजित करवाई गई। प्रतियोगिता के आयोजन सचिव व महाविद्यालय के व्याख्याता श्याम नारायण रंगा ने बताया कि इस प्रतियोगिता में महाविद्यालय के वाणिज्य संकाय के उन विद्यार्थीयों ने हिस्सा लिया जिन्होंने अपनी कक्षा में प्रथम व द्वितीय स्थान हासिल किया था। रंगा ने बताया कि प्रतियोगिता में कुल तेरह प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया जिसमें से विषय के समर्थन में छः प्रतिभागियों ने व विरोध में सात प्रतिभागियों ने अपने विचार व्यक्त किए। विषय के समर्थन में अपने विचार व्यक्त करते हुए छात्र छात्राओं ने कहा कि उदारीकरण भारत जैसे विकासशील देश के लिए वरदान साबित हुआ है और उदारीकरण के कारण ही भारत आज विकास की दौड में आगे बढ रहा है। समर्थकों का मत था कि उदारीकरण ने जहाँ विश्व के अन्य देशों को भारत की ओर आकर्षित किया है वहीं दूसरी ओर भारतीय प्रतिभा को भी विश्व पटल पर जाने का मौका मिला है और बिना उदारीकरण के कम्प्यूटर, मोबाइल व कारों की कल्पना नहीं की जा सकती इसलिए उदारीकण आज के युग की पहचान व आवश्यकता है। वहीं दूसरी तरफ विषय के विरोध में मत व्यक्त करने वाले छात्र छात्राओं ने कहा कि उदारीकरण ने भारत के लघु, कुटीर व ग्रामीण उद्याोगों का खात्मा कर दिया है और विश्व की प्रतिस्पर्धा के सामने वे अपना दम तोंड रहे हैं। आज सरकार को चाहिए कि वह इन उद्याोगों को बचाए। विरोध में मत वयक्त करने वालों ने ईस्ट इंडिया कम्पनी का उदाहरण देकर बताया कि अगर स्थितियों को नहीं संभाला गया तो हालात बिगडते जाएंगे। इस प्रकार इस वाद विवाद प्रतियोगिता में महाविद्यालय के छात्र छात्राओं ने काफी उत्साह से भाग लिया। प्रतियोगिता में बी कॉम अंतिम वर्ष के छात्र अनिल चाण्डक ने सबसे ज्यादा अंक हासिल कर प्रथम स्थान प्राप्त किया वहीं महाविद्यालय की बी कॉम प्रथम वर्ष की छात्रा विजेता सिंह ने दूसरा व प्रथम वर्ष की राधिका मल्ल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिता में कृष्ण मोहन छंगाणी को सत्वना पुरस्कार दिया गया। आयोजन सचिव श्याम नारायण रंगा ने बताया कि इन विजेता प्रतिभागियों को छब्बीस जनवरी को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।
कार्यक्रम में निर्णायक की भूमिका महाविद्यालय के प्राचार्य प्रशांत बिस्सा व व्याख्याता महेश सारण व सुरेश पुरोहित ने निभाई। अपने उद्बोधन में प्रशांत बिस्सा ने कहा कि इस तरह के आयोजन से जहाँ व्यक्तित्व का विकास होता है वहीं विषय पर अपनी पकड भी मतबूत होती है। प्रशांत बिस्सा ने कहा कि महाविद्यालय में इस तरह के आयोजन आगे भी होते रहेंगे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्याख्याता महेश सारण ने कहा कि सभी प्रतिभागियों ने बडी शालीनता से अपने विचार प्रकट किए और सुनकर ऐसा लगा जैसे विषय विशेषज्ञों से बात की जा रही है। इसके लिए सारण ने सभी प्रतिभागियों को बधाई दी। महाविद्यालय के व्याख्याता श्रीकांत व्यास ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्र छात्राओं का यह उत्साह काबिले तारीफ है और सभी का स्तर एक समान था और छात्रों को देखकर लग नहीं रहा थां कि विषय को नहीं जानते। श्रीकांत व्यास ने कहा कि एक तरफ जहाँ उदारीकरण वरदान साबित हो रहा है वहीं दूसरी तरफ इसके दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव राजजी व्यास ने कहा कि उदारीकरण देश के लिए वरदान है व दूधारी तलवार है जिसको संभालकर चलाना चाहिए। रामजी व्यास ने कहा कि जहाँ विदेशी वस्तुओं और व्यापार का सम्मान करना चाहिए वहीं अपने देश की संस्कृति को भी संजो कर रखना चाहिए। कार्यक्रम में रामजी व्यास ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के व्याख्याता गोपाल पुरोहित, गरिमा मैडम, सुरेश पुरोहित सहित सभी विद्यार्थी उपस्थित थे।