देश में छह से 14 साल के हर बच्चे के लिए शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने संबंधी कानून के एक अप्रैल से लागू होने की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने सोमवार को कहा कि सरकार शैक्षिक ढांचे में बुनियादी परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रपति ने संसद के बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून अधिसूचित कर दिया गया है। इस कानून को संसद ने पिछले साल अगस्त में पारित किया था। इसमें निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को दिए जाने का प्रावधान है। प्रतिभा पाटिल ने कहा कि शैक्षिक ढांचे में बुनियादी परिवर्तन 'शैक्षिक ढांचा विस्तार, समावेशण और उत्कृष्टता के तीन स्तंभों पर आधारित होगा। उन्होंने यह भी बताया कि भारत को उच्चतर शिक्षा और अनुसंधान की नियामक संस्था के रूप में 'राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा एवं अनुसंधान परिषद' की जल्द स्थापना की जाएगी और इसका कार्यक्षेत्र बहुत व्यापक होगा। उन्होंने कहा कि शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए जिलों में 373 आदर्श महाविद्यालय स्थापित करने के लिए राज्य सरकारों की सहायता हेतु एक योजना को मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने बताया कि सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा मिशन की स्थापना की गई है, जिससे देश के लगभग 18 हजार महाविद्यालयों और 400 विश्वविद्यालयों को ब्राडबैंड इंटरनेट से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके अलावा 'साक्षर भारत' नाम से एक नया अभियान चलाया गया है, जिसमें महिला साक्षरता पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।