कमलेश शर्मा
डूंगरपुर, वागड की आबोहवा प्रवासी परिंदों को बेहद रास आ रही है और यही कारण है कि दूरदराज से कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षी यहां के जलाशयों में न केवल सर्दी अपितु ग्रीष्म ऋतु में भी पहुंचने लगे हैं। पानी से लबालब यहां के जलस्रोत और इनमें पाई जाने वाली वनस्पतियां इन प्रवासी पक्षियों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र हैं। यहीं कारण है कि लम्बी और खूबसुरत टांगों और गुलाबी रंग की आकर्षक चोंच वाले पक्षी फ्लेमिंगों इन दिनों डूंगरपुर जिले के फलोज गांव स्थित तालाब में विचरण कर रहे हैं।
राजहंस, हंसावर और फ्लेमिंगों के नाम से जाना जाने वाला यह खूबसूरत पक्षी प्रवासी पक्षियों में सबसे बाद में आने वाला पक्षी है और इन दिनों दो दर्जन से अधिक की संख्या में यहां पर जलक्रीडाएं कर रहा है। पेन्टेड स्टॉर्क, ऑपनबिल स्टार्क और स्पूनविल स्टॉर्क के समूह के साथ फ्लेमिंगों की इतनी बडी तादाद में उपस्थिति पक्षीप्रेमियों के लिए सुकूनदायी साबित हो रही है। पर्यावरणीय विषयों के जानकार और बर्डवॉचर वीरेन्द्रसिंह बेडसा के अनुसार भारत में फ्लेमिंगों की एकमात्रा चिन्हित प्रजनन स्थली के रूप में ख्यातनाम ग्रेट रन ऑफ कच्छ तक प्रजनन के लिए पहुंचने की यात्रा दौरान देश-प्रदेश से गुजरते हुए ये फ्लेमिंगों पिछले कुछ वर्षों से यदा-कदा वागड के किसी जलस्रोत पर दिखाई दे जाते थे। कुछ वर्षों पूर्व गेपसागर जलाशय में भी इनका बडा झुण्ड यहां आया था परंतु पिछले दो वर्षों के बाद पुनः फ्लेमिंगों का यहां पहुंचना शुभ संकेत हैं।
वे बताते है कि अन्य प्रवासी पक्षी सर्दियों में आते है और सर्दिया खत्म होते ही मार्च में रवाना हो जाते हैं परंतु फ्लेमिंगों और पेलिकन सबसे बाद में अप्रेल माह में आने वाले प्रवासी पक्षी है। सोम कमला आंबा बांध के जलभराव क्षेत्र, साबला के जीणतोर तालाब, बोडीगामा बांध, सागवाडा के मसानिया, फलोज के तालाब तथा गेपसागर व एडवर्डसमंद बांध आदि इन पक्षियों की पसंदिदा आश्रय स्थल हैं। इस बार फ्लेमिंगों अप्रेल माह में यहां पहुंचे हैं परंतु पेलिकन कहीं नजर नहीं आ रहे हैं।