बीकानेर, जिले के अकाल प्रभावित लोगों और पशुओं को राहत दिलाये जाने समेत नहरी इलाकों में सिचाईं के लिए किसानों को पर्याप्त पानी दिलाये जाने की मांगो को लेकर आगामी २६ अक्टुबर को जिला कलेक्टर परिसर में विशाल धरना देने की तैंयारियों में जुटे पूर्व मंत्री और कोलायत विधायक देवीसिंह भाटी ने गुरूवार को पत्रकारों को बताया कि शासन और प्रशासन बीकानेर जिले में अकाल प्रभावीत गांवो और के सिचाईं के लिए पानी की समस्यां से जूझ रहे है। नहनी किसानों की सुध लेने के मामले में पूरी तरह नाकाम है। उन्होनें कहा कि सत्ता और प्रशासन वालों की आंखे खोलने के लिए हमनें धरने और प्रदर्शन का आगाज कर रहे है। अगर फिर भी सरकार ने हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आन्दोलन चलाया जायेगा। भाटी ने कहा कि अनूपगढ शाखा में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के बाद भी बीकानेर के नहरी इलाकों के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच रहा है। यह समस्यां लगातार बढ रही है जिसके कारण किसानों को खासा नुकसान उठाना पड रहा है। फिर भी प्रदेश के सिचाईं मंत्री इस समस्या का समाधान करने की तरफ ध्यान नहीं दे रहे है। सिचाईं विभाग के महकमें के अफसर बेपरवाह बने हुये है। भाटी ने कहा कि जिले के अकालग्रस्त गांवो में राहत के तहत पेंतालीस के करीब चारा डपो खोल दिये है। उनमें भी सारी खामियां है जिसकें कारण अकालग्रस्त प्रभावित पशुपालकों को चारा डपो खुलने का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्हानें मांग उठाई कि अकालग्रस्त गांवों में मुक्त चार उपलब्ध कराया जाना चाहिये और पेयजल के लिए पुख्ता इंतजाम कराना चाहिये। पशु शिविर लगवाने चाहिए। इस अवसर पर खाजुवाला विधायक ने कहा कि जिस तरह से सरकार ने अभी तक अकालग्रस्त इलाकों में अभी तक राहत कार्य शुरू नहीं करके किसानों के साथ दुवेवहार कर रहे है। नहरी इलाकों में भी बडे पैमाने पर पानी चोरी हो रहा ह। लेकिन इसके रोकथाम के कोई प्रावधान नहीं है। इससे ऐसा लगता है कि सरकार ने किसानों को राम भरोसे छोड दिया है। भाटी ने कहा कि राज्स सरकार को मुख्या अभियन्ता एवं प्रमुख की सलाह पर पन्द्रहा दिन नहरे चलाकर किसानों की खरीफ फसल की बिजाई करा दी है। जिससे खरीफ की फसल अब खत्म हो गई है। अब सिचाईं विभाग कह रहा है कि सितम्बर के बाद पीने का पानी भी नहरों से नहीं मिलेगा।
जिम्मेदारी प्रशासन की होगी अकाल एवं पानी के लिए संघर्ष कर रहे किसान छबीस अक्टुबर को पूर्व मंत्री एवं कोलायत विधायक देवीसिंह भाटी के नेतृत्व में कलेक्टर परिसर पर धरना दिया जायेगा। उन्होनें कहा कि अब सरकार को चेताया जायेगा। इसके लिए अगर कानूर व्यवस्था बिगडे तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। हम तब तक लडेगें जब तक हमारी मांगों को नहीं माना जायेगा। धरना लगातार जारी रहेगा जब तक सरकार से कोई लिखित फैसला नही आयेगा।