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27वां अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला
22 Nov 2007

संस्कृति और प्रगति का दर्पण


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 ’’बहुरंगी राजस्थान‘ के लोग जीवन की हर छोटी बडी घटना को जीवन्तता से उत्सव बनाकर जीने वाले लोग हैं। इसकी झलक नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे २७वें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला के राजस्थान मंडप में दिखाई दे रही है। यह मंडप संस्कृति और प्रगति का दर्पण बना हुआ है। राजस्थान मण्डप एक भव्य कलात्मक हवेली के रुप में प्रदेश की प्राचीन विरासत और धरोहर का प्रतीक बनकर प्रगति मैदान में शान से खडा है। राजस्थानी स्थापत्य कला के झरोखे, जालियां, कंगूरे, भव्य दरवाजे और उन पर राजस्थानी कलम में उत्कीर्ण चित्रकारी मण्डप को और भी आकर्षक और गरिमाशाली बना रही है। राजपूती वास्तुकला शैली में बना पैवेलियन गुम्बदों, झारोखों व जालीनुमा कारीगरी से दर्शकों को लुभाता है।
मण्डप की विषय वस्तु -
राजस्थान मण्डप की इस वर्ष की विषय वस्तु २७वें अन्तर्राष्ट्रीय मेले के लिए निर्धारित थीम-प्रसंस्करित खाद्य पदार्थ और कृषि उद्योगों के अनुरुप ही है। ’प्रोसेस्ड फूड‘ अपनी सुविधा, पसंद, पोषक तत्व और स्वाद के कारण उपभोक्ताओं को अधिक आकर्षित कर रहे है। राजस्थान में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग द्वारा प्रसंस्करित खाद्य पदार्थों को तैयार करने में न्यूनतम रसायनों व प्रिजर्वेटिव्स का प्रयोग हो, यह ध्यान रखा जा रहा है। मंडप में प्रदर्शित कई वस्तुओं में शामिल है- भोजन के रुप में प्रयुक्त होने वाले गेहूं, चावल, चीनी उत्पाद, तेल आदि को अनेक तरह से स्वादयुक्त खाने योग्य स्वरुप देकर बिस्कुट, बेकरी उत्पादन, चिप्स, डेयरी उत्पाद, नाश्ते में प्रयुक्त होने वाले खाद्य पदार्थ और फल व सब्जियों के डिब्बाबन्द प्रसंस्करित खाद्य पदार्थ जो लम्बे समय तक प्रयुक्त होने लायक हैं।
मण्डप का मुख्य भाग -
मण्डप के मुख्य भाग को आकर्षक भित्ति चित्र शैली से सजाया गया है। चित्रकारी का यह नमूना प्रदेश की कला, लोक संस्कृति व इतिहास को दर्शाने वाला है। मण्डप की बाहरी दीवारों पर पिछवाई शैली का जादू स्वतः दिखता है। भित्ति चित्रें में राधाकृष्ण के प्रेम-प्रसंगों, श्रीकृष्ण का ग्वाल रुप जिसमें बांसुरी बजाकर गायों को बुलाते हुए दृश्य, ग्वालों के साथ बैठ कर खाना खाने, राधा के संग रासलीला और बालरुप में माखन चुराते कृष्ण के विविध रुपों को पिछवाई की अद्भुत बारीकी और कारीगरी से चित्रित किया गया है। राज्य में १६वीं शताब्दी के पश्चात कला के अनेक स्कूल विकसित हुए हैं जिनमें मेवाड, बूंदी, कोटा, जयपुर, उदयपुर, बीकानेर, किशनगढ और मारवाड प्रमुख है। इनकी चित्रकारी शैली के आगे ’कलम‘ लिखा जाता है।
आधारतल पर दिखाये गए क्षेत्र -
राजस्थान मण्डप में प्रवेश करते बिल्कुल सामने टोंक की भव्य सुनहरी कोठी को खूबसूरत ढंग से दर्शाया गया है। टोंक जयपुर से ९६ कि.मी. दूर सवाई माधोपुर-कोटा मार्ग पर बना हुआ जिला मुख्यालय है, जहां कभी अफगानों की गहरी पकड थी। सुनहरी कोठी का निर्माण १८२४ में नवाब अमीर खान द्वारा हुआ और बाद में नवाब इब्राहिम अलीखान द्वारा उसका पुननिर्माण करवाया गया जिससे कांच, रंगीन शीशों, गिल्ड की कारीगरी, मोसेईक व लेपिस लॉजिलुई की कारीगरी से सौदर्य और द्विगुणित हो गया। सुनहरी कोठी की बेलबूटिया, फूल, पच्चीकारी एवं मीनाकारी आज भी आकर्षण का केन्द्र है।
मण्डप का दाहिना भाग -
मण्डप के दाहिने भाग में भारतीय व्यापार संवर्द्धन प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मुख्य विषय के अनुरुप मसालों की दुकान की प्रतिकृति सजाई गई है। राजस्थान देश का एक प्रमुख मसाला उत्पादक प्रदेश है और यहां के मसालों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मांग है। यहां एक तरफ टिन कन्स में खाद्य पदार्थं को सजाया गया है, वहीं दूसरी ओर सुन्दर पाउचेज में प्रदर्शित किया गया है।
मण्डप का बायां भाग -
मण्डप के बाए भाग में राजस्थान की कृषि संपदा को दर्शाया गया है। बडे आकार की ’फूलगोभी‘ के इर्द-गिर्द भुट्टा, टमाटर, आंवला, मिर्च की भव्य डमीज बनाई गई है। राजस्थान के प्रसंस्करित खाद्य पदार्थो की शुद्धता और ताजगी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जानी जाती हैं। प्रदेश की सब्जियाँ, मसाले और दाले राजस्थान की समृद्ध कृषि विविधता को बताते है।
थीम एरिया -
थीम एरिया में ’ब्राण्ड राजस्थान‘ की बहार है। कृषि की अपार संभावनाओं वाले प्रदेश के बैनर तले प्रसंस्करित और डिब्बाबंद कृषि उत्पादों का खूबसूरत खुदरा आउटलैट सजाया गया है।
प्रोसेस्ड फूड्स और एग्रो इण्डस्ट्रीज -
राजस्थान मंडप में कृषि व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की अनेक नई वस्तुओं को शामिल किया गया है। जिसमें धान, तिलहन, फल, सब्जियां, बागवानी, मसाले औषधीय महत्ता के पौधों,डेयरी उत्पादों और मीट उत्पाद प्रमुख है। यहां बताया गया है कि जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हुए नवीनतम परिवर्तन उच्च तकनीक खेती की तरीकों के साथ लागू होने पर राजस्थान का कृषि आधारित उद्योग देश के कृषि व खाद्य प्रसंस्करण व्यापार की और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। राजस्थान के कृषि उद्योगों और प्रसंस्करित खाद्य उद्योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है। यहां के प्रसंस्करित खाद्य पदार्थों की पैकिंग व गुणवत्ता उच्च श्रेणी की है। विभिन्न स्वादों वाले डिब्बा बन्द खाद्य पदार्थों को खाद्य प्रेमियों के लिए यहां ’ब्राण्ड राजस्थान‘ के अंतर्गत प्रदर्शित किए गए है।
बिजनेस सेंटर -
मण्डप का अगला भाग लघु एवं मध्यम पैमाने के उद्योगों को समर्पित है। यहां राजस्थान ’बिजनेस सेन्टर‘ की स्थापना की गई है जिसमें आर.एफ.सी., उद्योग, आयुक्त ब्यूरों ऑफ इण्डस्ट्रीज प्रमोशन, रीको और आरएसआईसी संयुक्त रुप से निवेश के इच्छुक उद्यमियों को मार्गदर्शन कर रहे हैं।
 ’बिजनेस-सेंटर‘ के आगे हस्तशिल्प का बेजोड खजाना है जिसमें लकडी और मार्बल के कलात्मक आईटम्स और राजस्थान के विभिन्न औद्योगिक उत्पादों को सुन्दर तरीके से पेश किया गया है। इसके अलावा स्वास्थ्य सुरक्षा आईटम्स भी प्रमुखता से दर्शाये गए हैं। 
पर्यटन क्षेत्र -
मंडप के केन्द्रीय भाग को पर्यटन विभाग द्वारा आकर्षक तरीके से सजाया गया है। इस भाग में प्रदेश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन उत्पादों को दिखाते हुए यह दर्शाया गया है कि राजस्थान न केवल राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों का पंसदीदा पर्यटक स्थल है अपितु पर्यटन उद्योग में अपार संभावनाओं वाला अग्रणी प्रदेश भी है।
अन्य प्रतिभागी -
मण्डप में तिलम संघ, कोनफैड, रुडा, कृषि, खान एवं खनन, सहकारिता, पावर ऊर्जा कम्पनीज, सूचना और जन संफ विभाग आदि की प्रदर्शनियां लगाई गई है। इन प्रदर्शनियों में मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के नेतृत्व में राजस्थान में हो रहे विकास कार्यो और उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। मंडप में राजस्थान के हस्तशिल्प कलाकारों को भी अपने हुनर का प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है।
प्रथम तल -
मण्डप का प्रथम तल दर्शकों को राजस्थानी हस्तशिल्प सामान खरीदकर घर ले जाने का आमंत्रण देता है। राजस्थान लघु उद्योग निगम लिमिटेड, जो कि राजस्थान पैवेलियन की नॉडल एजेन्सी है, ने यहां विभिन्न उत्पादों के बिक्री केन्द्र खोले है। सांगानेरी-बगरू, कोटा डोरिया, बंधेज की साडयां, चद्दरों के साथ ही यहां बहुमूल्य, कीमती पत्थरों के गहने, थेवा कला की नई डिजाईनों में सजे आईटम्स, लाख की चूडयां, कडे, मार्बल के आईटम्स, बैग, लेदर आईटम, मोजडी, हैण्डलूम आईटम्स, रेडिमेड गार्मेन्ट्स, खादी हथकरघा व लकडी के हस्तनिर्मित उत्पाद, शेखावटी फर्नीचर, जयपुरी रजाईयां आदि सामान खरीदकर राजस्थान की स्मृतियाँ ताजी रखी जा सकती है।
सहेलियों की बाडी -
मण्डप के पिछवाडे में उदयपुर की प्रसिद्ध सहेलियों की बाडी की प्रतिकृति के पास सजा बाजार खाने पीने के शौकीनों के लिए स्वर्ग है। यहां ब्यावर की मशहूर तिलपट्टी, गजक, पापड, सूखी-सब्जियां, अचार, मंगोडी, विभिन्न प्रकार के चूर्ण, दुग्ध उत्पाद, रॉस्टेड आइटम आदि को खरीद कर उनका लुत्फ उठाया जा सकता है। वहीं राजस्थानी ऑडियो-वीडियो कैसेट, रंगबिरंगी कठपुतलियां,  मनोरंजन के राजस्थानी अंदाज को बयां करती है।
थोडा ठहरिये -
मंडप घूम कर जरुर आपका मन स्वादिष्ट खानपान के लिए ललचा रहा होगा। तो आइए आपको मण्डप के उस आखिरी पडाव का सफर करवाते हैं, जहां मुंह में पानी लाने वाली दाल बाटी चूरमा की रसोई और विभिन्न राजस्थानी पकवान आपका इंतजार कर रहे है। यह राजस्थानी व्यंजन ’’पिज्जा‘‘ आदि को भी मात दे रहे हैं।
राजस्थान दिवस -
राजस्थान लघु उद्योग निगम लि. के अध्यक्ष श्री मेघराज लोहिया द्वारा विधिवत उद्घाटित राजस्थान मंडप चौदह दिवसीय इस व्यापार महाकुंभ में २६ नवम्बर को राजस्थान दिवस मनाएगा। राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा इस दिन प्रगति मैदान के लाल चौक मुक्ताकाशी रंगमंच पर राजस्थान की बहुरंगी छटा दिखाने के लिए सांस्कृतिक संध्या का आयोजन रखा गया है।




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