राज्य नेशनल रिसोर्स इन्फॉरमेशन सिस्टम बोर्ड की द्वितीय बैठक आयोजित
22 Dec
2007, 1612 Hrs
प्राकृतिक संसाधनों और आधारभूत संरचना पर जी.आई.एस. बेस्ड डिजिटल डेटा बेस तैयार करने के संबंध में गठित राज्य नेशनल रिसोर्स इन्फॉरमेशन सिस्टम बोर्ड की द्वितीय बैठक शनिवार को यहां शासन सचिवालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री ए.के. पाण्डे की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
जयपुर, २२ दिसम्बर। प्राकृतिक संसाधनों और आधारभूत संरचना पर जी.आई.एस. बेस्ड डिजिटल डेटा बेस तैयार करने के संबंध में गठित राज्य नेशनल रिसोर्स इन्फॉरमेशन सिस्टम बोर्ड की द्वितीय बैठक शनिवार को यहां शासन सचिवालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री ए.के. पाण्डे की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
बैठक में एन.आर.आई.एस.के तहत स्टेट रिमोट सेन्सिंग एप्लीकेशन सेंटर जोधपुर द्वारा प्राकृतिक संसाधनों और आधारभूत संरचना पर जी.आई. बेस्ड डिजिटल डेटा का विभिन्न विभागों द्वारा जिला आयोजना और अन्य विकासात्मक गतिविधियों के लिए प्रभावी उपयोग के संबंध में चर्चा की गई।
बैठक में प्रमुख शासन सचिव ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, श्री रामलुभाया, प्रमुख शासन सचिव राजस्व,श्री ललित कोठारी, प्रमुख शासन सचिव जल संसाधन, श्री एस.एन.थानवी, प्रमुख शासन सचिव सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार, श्री सी.के. मैथ्यू, प्रमुख शासन सचिव जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी श्री भरत मीणा एवं प्रमुख शासन सचिव सार्वजनिक निर्माण विभाग, श्री सी.एस.राजन, सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री पंकज, निदेशक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, श्रीमती अपर्णा अरोडा तथा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, अहमदाबाद के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
इस अवसर पर एस.आर.एस.ए.सी.,जोधपुर के परियोजना निदेशक श्री नन्द कालरा ने एस.आर.एस.ए.सी. द्वारा राज्य की विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों में सहयोग के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर तैयार किये गये डेटा एवं उनके उपयोग के बारे में प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि सम्पूर्ण डेटा बेस को जी.आई.सी. मोड में मार्च, २००८ तक अन्तिम रूप दे दिया जायेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह डेटा बेस सम्पूर्ण राज्य में जिला स्तर पर विभिन्न आयोजना गतिविधियों के लिए एक आधार के रूप में उपयोगी सिद्ध होगा।
उन्होंने बताया कि पहले यूजर डिपार्टमेंट की आवश्यकताओं के अनुसार डेटा बेस को तैयार किया जाता था लेकिन एन.आर.आई.एस.के तहत ग्राम स्तर तक के बारे में सूचना देने के लिए डेटा बेस तैयार किया गया है और हर पांच साल में इसको अपडेट करने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि कुछ विभागों ने इस डेटा बेस की सुविधा का उपयोग करना भी प्रारंभ कर दिया है। साथ ही विभिन्न गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा भी उनके डेटा बेस का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था द्वारा राजस्थान के प्राकृतिक संसाधन के साथ-साथ जलग्रहण, भूजल एवं औषधीय पेडों का एटलस भी तैयार कर लिया गया है।
श्री कालरा ने बताया कि एस.आर.एस.ए.सी., जोधपुर द्वारा वन, सिंचाई, जलग्रहण विकास एवं मृदा संरक्षण, नगरीय आयोजना, वेटलैण्ड मैपिंग, भू-उपयोग आदि से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं पर डेटा बेस तैयार किया जायेगा। उन्होंने बताया कि रिमोट सेन्सिंग एवं जी.आई.एस. पर एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी शीघ्र प्रारम्भ किया जा रहा है। इसके साथ ही सभी स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
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