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राजस्थान गौवंश की तस्करी और गौहत्या रोकने में विफल
23 Apr 2008

गौवंश तस्करी और हत्याओं को रोके जाने गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश की सरकारें साझा प्रबन्ध करें


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      बांसवाडा, जाने-माने प्राच्यविद्यामर्मज्ञ, गायत्री मण्डल के संरक्षक वेदमूर्ति ब्रह्मर्षि पं. महादेव शुक्ल ने राजस्थान से गौवंश की तस्करी पर चिन्ता व्यक्त की है और कहा है कि प्रदेश सरकार राजस्थान से गौवंश की तस्करी और गौहत्या रोकने में विफल रही है।

      उन्होंने कहा कि जब तक गौवंश का संरक्षण-संवर्द्धन नहीं होगा तब तक देवी-देवताओं की कृपा से सरकार चलाने की बात करना बेमानी है और ऐसे में धर्म और अध्यात्म के नाम पर हो रही घोषणाओं और कार्यों का कोई मूल्य नहीं है क्योंकि देवी-देवताओं की पूजा-उपासना से पहले गौसेवा और गौवंश संरक्षण होना जरूरी है तभी दैव प्रसन्न हो सकते हैं।

      ब्रह्मर्षि पं. महादेव शुक्ल ने राजस्थान से गौवंश की गुजरात में तस्करी तथा गुजरात के कत्लखानों में बडे पैमाने पर गौवंश हत्या पर रोक लगाने की मांग की है और कहा है कि गुजरात की नरेन्द्र मोदी सरकार हिन्दुओं और धर्म की बातें करती हैं लेकिन गौहत्या रोक पाने में विफल रही है। गुजरात में यदि तमाम कत्लखानों को बन्द कर दिया जाए तो राजस्थान से गौवंश की तस्करी अपने आप रुक जाएगी। इसके साथ ही गुजरात एवं मध्यप्रदेश के रास्तों से होकर राजस्थान का गौवंश कत्लखानों की ओर ले जाया जाता है। इन दोनों राज्य में तथाकथित धार्मिक विचारों वाली सरकारें हैं।

      ब्रह्मर्षि पं. महादेव शुक्ल ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा विश्व हिन्दू परिषद के अन्तर्राष्ट्रीय महामंत्री सहित केन्द्र सरकार और इन तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर मांग की है कि तीनों राज्य सरकारों की ओर से गौवंश तस्करी एवं गौवंश हत्या को रोकने के लिए साझा अभियान चलाया जाए और स्थायी प्रबन्ध किए जाएं।

      गायत्री मण्डल के संरक्षक ने वागड अंचल से गौवंश की तस्करी के लिए स्थानीय पुलिस, प्रशासन और राजनेताओं की मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अपने स्वार्थों में लिप्त ये लोग गौवंश का संरक्षण-संवर्द्धन करने में विफल रहे हैं।

      उन्होंने कहा कि सीमावर्ती चौकियों और सरहदी थानों में लम्बे समय से तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाया जाना चाहिए तथा सरहदी इलाकों में रहने वाले ऐसे लोगों को सूचीबद्ध किया जाए जो गौवंश तस्करी म मददगार बनकर कमीशन लेते रहे हैं।

      उन्होंने कहा है कि बांसवाडा और डूंगरपुर जिलों की पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों तथा राज्यकर्मियों को गौवंश संरक्षण अधिनियम के बारे में जानकारी देने के लिए ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाने चाहिएं ताकि गौवंश तस्करी और गौहत्या करने वाले अपराधियों के खिलाफ इस अधिनियम में मामले दर्ज हो सकें। जानकारी के अभाव में पुलिस और प्रशासन पशु क्रूरता कानन का इस्तेमाल करने को विवश है और इस वजह से तस्कर और गौहत्यारे साफ बच निकलते रहे हैं।

      ब्रह्मर्षि पं. महादेव शुक्ल ने ज्योतिषीय आधार पर कहा कि गुजरात में जब तक गौहत्या बन्द नहीं होगी, वहां भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं का दौर कुछ-कुछ वर्ष में चलता रहेगा।




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Comments to this News

पंडित श्री महादेव शुक्ल की गोवंश के बारे में की गई टिपणी में एक खास तरह की सोच का प्रतिनिधित्व एकदम शीशे की तरह दीखता है. उनकी कही गई बात को लाख तरह से मोडा गया लेकिन उनका इशारा साफ समझ में आता है की वो गोवंश की हत्याओ के मामले में किशे दोषी करार देना चाहते हैं. हमारे दिमाग में एक खाश तरह की मन्यते घर कर गई है और हमेशा चीजो की पड़ताल एक ही चश्मे से करने लगते है. मैं पंडित जी से ये पूछना चाहता हु की गोहत्या के सवाल को हमेशा हिंदू मान्यता से ही क्यों जोड़कर देखा जाता है? यह प्रशन धार्मिक से कंही ज्यादा सामाजिक और राजनितिक भी है. गोवंश के मामले में मुसलमानों को हमेशा से ही कटघरे में खड़ा करने के प्रयास हुए हैं जबकि इसकी असली सचाई तो इतिहास के पानो में छुपी है जिसे देखने और पढने की फुर्सत न तो हमारे धार्मिक गुरुओ के पास है और न ही राजनेताओ के पास.
गोहत्या का असली सवाल १८ वी सदी से सुरु होता है जब अंग्रेजो ने हमारी धरती पर कदम रखा. इस से पहले तो हमारे देश में नाम मात्र की गायो को ही कटा जाता था. हम सभी जानते हैं की englend के लोग गाय का मांस सबसे ज्यादा खाने के सोकिन हैं और उन्ही ने हिंदुस्तान में इसका चलन बढाया. यदि आप में से कोई और इस से सम्भंदित जानकारी और जानने में रुचि दिखाते हैं तो में दे सकता हु.

गोपाल सिंह, gopal singh chouhan (6/28/2003)



 
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