नई दिल्ली, पूर्व केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री और राजस्थान के सांसद सुभाष महरिया ने केन्द्र सरकार से मांग की कि वे गांव और गरीब पर ध्यान केन्दि्रत कर ग्रामीण सुदृढीकरण के लिए अधिक धनराशि का आवंटन करे अन्यथा गांव व शहर के बीच की खाई दिन प्रतिदिन चौडी ही होती जाएगी।
बुधवार को सांय लोकसभा में ग्रामीण विकास की अनुदान संबंधी मांगों पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए उन्होने सुझाव दिया कि ग्राम पंचायतों द्वारा भेजी जाने वाली योजनाओं और उस क्षेत्रा की जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति, क्षेत्राफल को आधार मान कर पंचायतों को ग्रास रूट (जमीनी सतह) पर काम करने की छूट और मंजूरी दी जानी चाहिए।
महरिया ने कहा कि ग्रामीण सुदृढीकरण का काम सच्चे अर्थो में पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक योजना की शुरूआत करने के साथ हुआ था। जिसके कारण आज देश के अधिकांश गांव सडकों से जुड गए हैं।
उन्होंने बताया कि राजस्थान में सडकों का काम जिस तरह किया गया है वह अपने आपमें एक उदाहरण है। आज सडको के काम में राजस्थान देश में सबसे अव्वल स्थान पर है और सडकों की प्रति किलोमीटर लागत और गुणवत्ता आदि दृष्टि से भी पूरे देश का मॉडल राज्य माना जाता है।
उन्होंने ग्रामीण ढांचे को मजबूत करने के लिए केन्द्र सरकार की भारत निर्माण योजना के तहत सिंचाई, सडक, पेयजल, आवास, विद्युतीकरण, दूरसंचार, आदि योजनाओं के क्रियान्वयन में अपेक्षित सफलता पाने में कमजोरी का जिक्र करते हुए कहा कि दुर्भाग्य से गांव में रहने वाली ७० प्रतिशत आबादी में से आज भी २२ प्रतिशत लोग १२ रूपये प्रतिदिन के हिसाब से अपना जीवन निर्वाह कर रहे हैं जबकि विकास दर ९.६ प्रतिशत प्रतिव्यक्ति और प्रतिव्यक्ति आय को ३० हजार रूपये आंका जा रहा है।
महरिया ने कहा कि २१वीं सदी के इस युग में यह विचार करने वाली बात है कि हमारे देश में आज भी ४२ फीसदी लोगो को बिजली उपलब्ध नहीं है, वहीं ७४ प्रतिशत लोग रसोई गैस कनेक्शन के लिए मोहताज है और ६ लाख छोटे-बडे गांव को अशुद्ध पानी पीने को मजबूर होना पड रहा है।
उन्होनें बी.पी.एल. परिवारों की पहचान में पारदर्शिता लाने का सुझाव दिया ताकि सही पात्रता वाले लोगों की पहचान हो सके। साथ ही यह मांग भी की कि जनता द्वारा चुने जाने वाले लोगों की भागीदारी विकास कार्यो के हर स्तर पर सुनिश्चित की जानी चाहिए। ताकि इन योजनाओं को बिचौलियों के चंगुल से निकालकर सही अर्थो में ग्रामीण विकास का कार्य किया जा सके।
राजस्थान के संासद निहाल चंद ने भी चर्चा में भाग लिया।