कच्ची बस्ती नियमन के तहत १ अप्रैल २००४ तक सर्वे में आ चुकी बस्तियों का नियमन सम्बन्धित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश 23 Aug
2007
हनुमानगढ, २३ अगस्त। राज्य सरकार ने नगरीय क्षेत्रों में कच्ची बस्तियों के नियमन के लिए कच्ची बस्ती नियमन नीति लागू की है। जिला कलक्टर श्रीमती मुग्धा सिन्हा ने बताया कि इसके तहत कच्ची बस्ती उन बस्तियों को माना जाएगा, जो राज्य के नगरीय क्षेत्रों में १ अप्रैल २००४ तक नगर निगम, नगरपरिषद या नगरपालिका आदि के क्षेत्र में राजकीय संस्थाओं की भूमि पर अनियोजित अनियमित या अनाधिकृत रुप से बसी हुई है। साथ ही उस बस्ती में कच्चे, पक्के या आंशिक रुप से कच्चे व पक्के मकान निर्मित है और जिनमें मूलभूत सुविधाओं का अभाव हो तथा जिनका अभी तक नियमन नही हुआ है। उन्होंने बताया कि इसके तहत ऐसी कच्ची बस्तियां जो १ अप्रैल २००४ तक सर्वे में आ चुकी है, उनकों नियमित किया जा सकेगा, परन्तु स्थानीय निकायों की किसी योजना या मास्टर प्लान में किसी विशेष कार्य के लिए आरक्षित भूमि, व्यावसायिक, संस्थागत उपयोग, आरक्षित भूमि, अस्पताल, स्कूल, उद्यान, सडक मार्ग सामरिक महत्व की भूमि, कब्रिस्तान, शमशान, देवस्थान वक्फ व अन्य धार्मिक उपयोग की भूमियों का नियमन नही हो सकेगा।
नियमन की पात्रताः- परिवार में स्वयं के नाम या उसके आश्रित, वयस्क, अवयस्क पुत्र ,पुत्री पत्नि, पति, माता, पिता, के नाम आवासीय भूखण्ड या मकान नही होने पर ही केवल एक अतिक्रमण का नियमन किया जाएगा। इसके अलावा आवेदक राजस्थान का मूल निवासी तथा १ अप्रैल २००४ से पूर्व उस बस्ती में आवास निर्माण कर निवास कर रहा हो, १ अप्रैल २००४ तक के आवासीय प्रमाण में निर्वाचन सूची में नाम, पहचान पत्र, बिजली, पानी का बिल, लाईसेंस आदि संतोषप्रद साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे।
आवासीय क्षेत्र के लिए अधिकतम ११० वर्गगज तथा रोजगार के लिए प्रयुक्त व्यवसायिक कार्य के लिए अधिकतम १५ वर्ग गज नियमन हो सकेगा। कच्ची बस्तियों के नियमन के उपरान्त सम्बन्धित निकाय द्वारा पट्टा जारी किया जाएगा, पट्टा जारी करते समय पति व पत्नि के नाम का इन्द्राज किया जाएगा व दोनों का फोटो भी चस्पा कर जाएगी। कच्ची बस्ती में नियमन ११० वर्ग गज के निर्माण के लिए किया जाएगा। बीपीएल परिवारों के लिए नगरपालिका क्षेत्र में १ से ५० वर्गगज के लिए १० रुपए तथा ५१ से ११० वर्गगज के लिए २० रुपए प्रति वर्ग गज निर्धारित होगी। बीपीएल के अतिरिक्त परिवार या व्यक्तियों के लिए यह दरें दुगुनी होगी।
नियमन की शर्तो के अनुसार कच्ची बस्ती में स्थित सडकों की चौडाई नियमन के समय १५ फीट रखी जाएगी। अन्य शर्तो के अनुसार जिस व्यतियों के पक्ष में नियमन किया गया हैं , उसको भूमि एवं निर्माण हस्तान्तरण करने का अधिकार नही होगा, इस आशय की शर्त का अंकन जारी किए जाने वाले पट्टे में आवश्यक रुप से किया जाएगा। वन भूमियों पर किए गए अतिक्रमणों को नियमानुसार केन्द्र सरकार की अनुमति के बाद ही विकसित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कच्ची बस्ती में जारी किए जाने वाले पट्टे ९९ वर्षीय लीज के आधार पर जारी होंगे। इन पट्टों पर नियमन राशि की एक प्रतिशत लीज राशि एक मुश्त वसूली की जाकर पट्टे जारी होंगे।
जिला कलक्टर ने बताया कि नगरीय निकायों का यह दायित्व होगा की निर्धारित (कट ऑफ डेट) के बाद नई कच्ची बस्तियों का बसाव न हो। सम्बन्धित निकाय के प्रशासनिक अधिकारी द्वारा राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, १९५९ की धारा २०३ के तहत सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि कच्ची बस्तियों के विकास के तहत तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाकर विकास कार्य होंगे , जिसमें यथा स्थान बस्ती का विकास, बस्तियों का स्थानान्तरण तथा कच्ची बस्तियों में विकास कार्य होंगे। उक्त बस्तियों का आवासीय प्लान तैयार किया जाएगा। नागरिकों की सुविधाओं का ध्यान रखते हुए जहां तक संभव हो सके, आवासों का यथा स्थान पर ही उन्नयन किए जाने की कार्यवाही की जाएगी। इसके अतिरिक्त विकास कार्यो के लिए राजकीय योजनाओं से डबटेल के बावजूद पर्याप्त वित्तीय संसाधन जुटाना संभव नही होने पर निजी भागीदारी के तहत अतिरिक्त भुमि के बदले निजी भागीदारी की मदद से विकास कार्य सुनिश्चित करवाए जा सकेंगे।
उन्होंने बताया कि कच्ची बस्ती के नियमन व विकास के लिए छः सदसीय कमेटी का गठन किया गया है। उक्त कमेटी के तहत नगरपालिका के अध्यक्ष, जिला कलक्टर के प्रतिनिधि, सम्बन्धित क्षेत्र के विधायक व उपखण्ड अधिकारी, राज्य सरकार द्वारा मनोनीत सम्बन्धित नगरीय निकाय के दो सामाजिक कार्यकर्ता,वरिष्ठ नगर नियोजक तथा सम्बन्धित क्षेत्र के अधिशाषी अधिकारी को उक्त कमेटी में शामिल किया गया है। जिला कलक्टर ने इस सम्बन्ध में समस्त उपखण्ड अधिकारियों व नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है।
इस सम्बन्ध में अतिरिक्त जानकारी के लिए जिले की समस्त नगरपालिकाओं में सम्फ कर जानकारी प्राप्त की जा सकती हैं।