बहुमंजिले भवनों में संभावित भूकम्प व अग्नि दुर्घटना से बचने के लिए दिशा निर्देश जारी
23 Oct
2007
जयपुर, २३ अक्टूबर। राज्य सरकार ने एक परिपत्र जारी कर राज्य में बहुमंजिले भवनों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थाओं, सिनेमा व मल्टीप्लेक्स, व्यावसायिक परिसर, कार्यालय भवन आदि में संभावित भूकम्प व अग्नि दुर्घटना से बचने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी किये हैं।
परिपत्र के अनुसार भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा भवनों के भूकम्परोधी निर्माण एवं अग्निशमन के लिए विभिन्न आई.एस. कोड तैयार किये हैं, जिनकी पालना के लिए भवन विनियमों में प्रावधान किया जाना आवश्यक है। राज्य सरकार ने जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम, १९८२ की धारा ९५, राजस्थान हाउसिंग बोर्ड अधिनियम, १९७० की धारा ५२ एवं नगर सुधार अधिनियम, १९५९ की धारा ७४ के तहत आदेश जारी कर भवनों को भूकम्परोधी बनाने एवं अग्निशमन के लिए मानकों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं।
इन प्रावधानों के अनुसार भवन का संरचनात्मक अभिकल्पन एवं सुरक्षा नेशनल बिल्डिंग कोड ऑफ इंडिया के उपबन्धों के अनुसार होना चाहिये। बहुमंजिले भवनों के भवन मानचित्र पंजीकृत वास्तुविद् द्वारा तैयार किये जाने पर ही अनुमोदनार्थ स्वीकार किये जायेंगे। भूकम्परोधी प्रावधानों को पंजीकृत तकनीकीविज्ञ द्वारा प्रमाणित कराना होगा और प्रावधानों की अनुपालना की जिम्मेदारी तकनीकीविज्ञ की होगी। जिन भवनों में पूर्व में भूकम्परोधी प्रावधान (रेट्रोफिटिंग कार्य) नहीं किये हैं उनमें भी यह प्रावधान किये जाने आवश्यक होंगे। यह कार्य सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा निर्धारित मापदण्डों के अनुसार किया जायेगा। भूकम्परोधी भवनों के निर्माण एवं अग्निशमन प्रावधानों के लिए आई.एस.कोड की अनुपालना करनी होगी।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान राज्य के अधिकांश क्षेत्र भूकम्प की तीव्रता की दृष्टि से न्यून तीव्रता वाले क्षेत्र में आते हैं, जिसमें भूकम्प की स्थिति में सामान्य नुकसान की संभावना रहती है। राज्य के बाडमेर, जैसलमेर, जालोर, अलवर, जयपुर, दौसा व भरतपुर जिले संवेदनशील सिसमिक जोन में आते हैं। जहां भूकम्प की स्थिति में सामान्य से भारी नुकसान की संभावना रहती है। इसके लिए सुरक्षात्मक दृष्टि से राज्य सरकार ने आवश्यक उपाय करने के दिशा निर्देश जारी किये हैं।
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