डूंगरपुर २३ नवंबर/ ‘कुदरत ने बनाया तुम्ह सांचे में ढाल के, ऐसे में कोई कैसे रखे दिल संभाल के, लहरों को चोट लग न जाए मैंने इसलिए, फका ही नहीं एक भी पत्थर उछाल के‘ और ‘ बडे नादान हैं ये लडके इन्हें ना तंग करो, तेज बारिश में भी पतंगें उडाने लगते ह।‘ कुछ ऐसे ही मस्ती भरे गीतों के नाम रही वागड-महोत्सव के द्वितीय दिवस की काव्यमयी निशा, जिसने प्रत्येक छंद पर श्रोताओं को मस्ती म झूमने को मजबूर कर दिया।
डूंगरपुर जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग एवं नगरपालिका के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देशभर से आये हुए जाने माने कवि काव्य रस की बौछारों से रातभर हजारों श्रोताओं को रससिक्त करते रहे।
देश के ख्यातनाम गीतकार विष्णु सक्सेना के गीतों के हर शब्द के साथ श्रोताओं की करतल ध्वनि से संगत ने स्वतः ही सफलता का प्रमाण उपस्थित कर दिया था। सक्सेना ने अपने लोकप्रिय गीत ‘ सपनों में अपनों के हाथ दे गया, मेरी रातों की नींद ले गया, डाकिया डाक ले गया‘ एवं ‘ पतझड में भी वो डाल हिलाकर चला गया, वो बर्फ सा था फिर भी जलाकर चला गया, बातों में शहद और छूअन में गुलाब था, आंखों से ना जाने क्या - क्या सुना गया‘ जैसी पंक्तियों से बच्चों से लेकर बूढों को हमउम्र होने का एहसास कराया। उन्होंने नवयुवाओं के मन में निस्सृत होने वाले उन्मुक्त विचारों को शब्दों की माला में पिरोते हुए युवाओं को बेहद तरंगित किया। कवि सम्मेलन का आरंभ हुआ आगरा से आई कवियत्री मंजू दीक्षित द्वारा वाग्देवी मां सरस्वती की वन्दना से । इसके बाद कवियों ने अपनी रचनाओं से खचाखच भरे लक्ष्मण मैदान में एक- एक कर प्रस्तुतियां देकर उपस्थित श्रोताओं का दिल जीत लिया। उत्तरप्रदेश के हाथरस से आये कवि पद्म अलबेला ने दाम्पत्य जीवन से जुडी मसखरियों पर केन्दि्रत छोटी हास्यिकाएं पेश की वहीं अपनी चिर परिचित पैरोडियों से सबका मन मोह लिया। उनकी पैराडी ‘ खुला दरवाजा, चाहे जब आजा, आजा‘ से हंसी की लहर पैदा कर दी। लाफ्टर शो कलाकार व हास्य कवि रास बिहारी गौड (अजमेर) ने अपनी छोटी - छोटी चुटकियों से समाज की विसंगतियों पर करारा व्यंग्य किया वहीं विज्ञापनों की भाषा के माध्यम से समाज के प्रत्येक क्षेत्र पर व्यंग्य की पैनी धार चलाई।
कवि सम्मेलन में खास छाप छोडी वीर रस के कवि विनीत चौहान ने जिन्होंने अपनी दमदार रचनाओं से हरदिल का झकझोरा और प्रतिनिधि कविताओं की प्रस्तुतियों से श्रोताओं की जमकर दाद बटोरी। उन्होंने अफजल की फांसी की सजा को केन्द्र में रखकर अपनी धारदार रचनाएं पढी। उनकी पंक्तियों ‘ उन जवानों ने मर कर भी भारत मां का मान रखा, खुद को नीवों में भरकर उपर हिन्दुस्तान रखा‘ और ‘ इतना खून नहीं छिडको कि मौसम फागी हो जाए, सेना को इतना मत रोको कि सैनिक बागी हो जाए‘ सुनाकर जमकर तालियां बटोरी।
काव्य निशा के मुख्य कवि एवं लाफ्टर शो के कलाकार प्रताप फौजदार (आगरा) ने लगभग एक घण्टे तक श्रोताओं को जमकर गुदगुदाया। उन्होंने विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक मुद्दों और पारिवारिक परिस्थितियों से लेकर उपस्थित कवियों, श्रोताओं और यहां तक कि अतिथियों को भी हास्य क्षणिकाओं का पात्र बनाकर अपनी हाजिर जवाबी से सबको लोट - पोट कर दिया। कवि सम्मेलन के अन्त में फौजदार ने तिरंगा हमार शीर्षक से जोरदार कविता पढी। शहीद की मौत और देशप्रेम को इंगित करती उनकी कारूणिक पंक्तियों ने वातावरण में देशभक्ति का रंग घोल दिया।
कवयित्री मंजू दीक्षित ने अपने गीत ‘ ओ भटके बैरागी तुझे कब आएगा होश‘ सुनाई साथ ही समाज में बुजुर्गों की उपेक्षा पर चोट करती रचना की पंक्ति कि ‘ आप भी कभी मां बाप बनोगे‘ से हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। टीवी एंकर व कवि संजय झाला (दौसा) ने वर्तमान राजनीति पर हल्की - फुल्की पर गूढ अर्थ वाली टिप्पणियों से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। उन्होंने राजकीय कर्मचारियों की युद्ध पर मोर्चाबन्दी जैसे काल्पनिक विषय को लेकर सरकारी तंत्र पर करारा व्यंग्य किया।
प्रख्यात हास्य कवि एकेश पार्थ (जयपुर) ने अपने अनोखे अंदाज में टीवी सीरियल को आधार बनाकर चुटकियां ली तो अपनी पैरोडियों से राजनेताओं को आधार बनाकर हास्य की फुलझडयां बिखेरी। प्रवीण शुक्ला ने भ्रष्टाचार पर व्यंग्य किया वहीं बच्चों को माध्यम बनाकर निर्धनता और सामाजिक विद्रूपताओं पर करारी चोट की।
कवि सम्मेलन का संचालन प्रवीण शुक्ला और विनीत चौहान ने किया। कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि जिला प्रमुख ताराचंद भगोरा थे जबकि अध्यक्षता नगर पालिका अध्यक्ष शंकर सिंह सोलंकी ने की। आरंभ में कविय का मुख्य अतिथि भगोरा, अध्यक्ष सोलंकी, अतिरिक्त जिला कलक्टर टी आर जोशी, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्यप्रकाश, महेश पुरोहित, रफीक अहमद कंधारी, हीरालाल भील, प्रभु पण्ड्या, जिला पर्यटन अधिकारी अनिल तलवाडया आदि ने माल्यार्पण कर व शॉल ओढाकर स्वागत किया गया। इस अवसर पर जिला पुलिस अधीक्षक विजेन्द्र झाला, उपखण्ड अधिकारी रामचंद्र खराडी, पुलिस उपाधीक्षक कैलाशदान जुगतावत सहित कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि व बडी तादाद में श्रोता उपस्थित थे। वागड महोत्सव के तहत आयोजित हुई पेन्टिंग प्रतियोगिता वाग्वर-सौन्दर्य पर चली कूंचियां, रंगों से छलका वागड परिवेश वागड के सौन्दर्य संबंधी थीम पर आयोजित पेन्टिंग प्रतियोगिता में जब जिले के जाने माने चित्रकारों ने अपने दृष्टिकोण और कल्पनाओं को रंगों के माध्यम से केनवास पर उकेरा तो वाग्वर के सौन्दर्य को एक नया आयाम प्राप्त हुआ।
पांच दिवसीय रंगारंग वागड महोत्सव के तीसरे दिन स्थानीय जिला सूचना एवं जनसंफ कार्यालय में आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता में जिले के चित्रकारों ने वागड के लोक जीवन व संस्कृति पर अपनी कुशल तूलिकाएं चला कर इन्द्रधनुषी सौन्दर्य को उद्घाटित किया। जिला सूचना एवं जनसंफ अधिकारी कमलेश शर्मा के निर्देशन में आयोजित प्रतियोगिता का शुभारंभ अतिरिक्त जिला कलक्टर टी आर जोशी ने प्रतियोगिता के विषय ‘वागड का लोकजीवन व संस्कृति‘ जारी कर किया। इस मौके पर उन्हने प्रतियोगिता में चित्रकारों की प्रविष्टियों का अवलोकन किया और आवश्यक दिशा निर्देश प्रदान किए। प्रतिभागी चित्रकारों ने दो घण्टों के निर्धारित समय में अपनी कल्पनाओं से लोक जीवन व संस्कृति पर अलग-अलग चित्र बनाए। चित्रकारों का रंग संयोजन और वर्ण्य विषय दर्शनीय था। किसी ने मानवीय सौन्दर्य को उकेरने का प्रयास किया तो कोई जुटा हुआ था नृत्यों की मुद्राएं रचने में। प्रतियोगिता में कुल १२ प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसमें लोकेश गांधी, रूपेश भावसार, अभिलाषा भावसार, भीमसिंह अहाडा, ममता शर्मा, अवनि चौबीसा, वर्तिका शर्मा, आलोक पण्ड्या, राजेश शर्मा, डोली श्रीमाल, सुप्रिया शर्मा, जयेश पंचाल आदि चित्रकार सम्मिलित थे। नन्हें अभिरूप ने भी की पेन्टिंग वागड सौन्दर्य पर तूलिकाएं चलाने के लिए जब युवा हाथ आगे आए तो नौनिहाल भी भला कहा पीछे रहने वाले थे। वागड महोत्सव के तहत १८ वर्ष से उपर आयुवर्ग के चित्रकारों के लिए आयोजित पेन्टिंग प्रतियोगिता में भी अपने माता-पिता अभिलाषा व रूपेश भावसार को चित्र बनाते देखकर बाल चित्रकार अभिरूप भावसार ने भी मचलते हुए पेन्टिंग करने की जिद की तो आयोजकों द्वारा अभिरूप को कार्डशीट मुहैया करवाई गई। युवा चित्रकारों की फटाफट चलती तूलिकाओं के साथ ही सधे हाथों से कल्पनाओं के रंग उकेरता तल्लीन अभिरूप भी दो घण्टों तक अन्य प्रतिभागिय के आकर्षण का केन्द्र बना रहा।