राजस्थान पैवेलियन - कला प्रेमियों का तीर्थ स्थल
23 Nov
2007 नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे २७वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में राजस्थान मण्डप को कला प्रेमियों का तीर्थस्थल कहा जा सकता है।
जयपुर, २३ नवम्बर। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे २७वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में राजस्थान मण्डप को कला प्रेमियों का तीर्थस्थल कहा जा सकता है। जी हां यदि आप मेले में घूमने का मन बना रहे हैं तो राजस्थान मण्डप की कलात्मकता आपको जरुर प्रभावित करेगी।
प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और बहुआयामी विकास की कहानी कहता राजस्थान मण्डप जन आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। यद्यपि मण्डप को भारत व्यापार संवर्द्धन प्राधिकरण द्वारा निर्धारित इस वर्ष की केन्द्र विषय वस्तु थीम के अनुरुप सजाया गया है किन्तु प्रदेश की बहुरंगी संस्कृति के विविध कलात्मक आयाम भी आसानी से देखे जा सकते है।
मण्डप का बाहरी स्वरुप शानदार गौरवशाली किले की तरह सजाया गया है। मण्डप के मुख्य द्वार और बाहरी दीवारों पर पिछवाई शैली में की गई पेंटिग्स जहां एक तरफ राज्य की निपुण भित्ति चित्र कला का नमूना है, वहीं उकेरे गए भित्ति चित्रें की विषय वस्तु के रुप में चुने गए पौराणिक महान चरित्र भगवान कृष्ण की विविध लीलाएं आध्यात्मिकता की अनुभूति करवा कर इतिहास को जीवन्त कर रही हैं।
मुख्य द्वार के दोनों ओर खडे विशालकाय हाथी उत्कृष्ट कला का नमूना हैं और मण्डप की भव्यता में चार चांद भी लगा रहे है।ं उन पर चटकीले रंगों से की गई सजावट प्रदेश की सुघड परिपक्व कला की साक्षी है।
मण्डप में प्रवेश करते ही टोंक की ’सुनहरी हवेली‘ की प्रतिकृति बारीक पच्चीकारी का श्रेष्ठ नमूना है। लाल, हर, नीले व बहुरंगों की चित्रकारी को सुनहरी ब्रश से संवारा गया है।
मण्डप में संगमरमर और लकडी के विविध आईटम्स पर किए गये कलात्मक कार्य को देखने पर लगता है मानों कलाकार ने अपनी कला के फन की जादूगरी को साकार रुप दे दिया है। मार्बल पर सुनहरी कलम,इनले वर्क और सोने के कलर से कलात्मक कलश,बाक्स आदि पर किए गये कार्य को दर्शक अपलक देखते रह जाते हैं । इसी प्रकार लकडी पर बारीक और कलात्मक कार्य से बनाये गये हाथी,घोडे,ऊंट और अन्य सजावटी सामान पर उत्कीर्ण कला बेजोड हैं।
मण्डप में प्रतापगढ की थेवा कला के आभूषण,नाथद्वारा की कुन्दन ज्वैलरी, चांदी के आभूषणों पर मीनाकारी का कार्य, थ्रेड ज्वैलरी,आर्टिफिशियल ज्वैलरी,ताम्बे और पीतल के बारीक तार से बनाई गई कलाकृतियां, हस्तशिल्प के अन्य आईटम्स देखने योग्य हैं।
मण्डप के प्रथम तल पर शेखावाटी और लकडी के अन्य फर्नीचर पर की गई नक्काशी,पीतल के पात से सजाए गए फर्नीचर की बानगी और मार्बल को तराशकर सुन्दर पेंटिंग की कलाकृतियां प्रदेश के कलाकारों की निपुण जादूगरी दिखाती है। मण्डप में प्रदर्शित गहनों की विशिष्टता,थेवा कला मीनाकारी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख रखती है ।
खानपान के व्यंजन,लोक कलाकारों के लोकगीत कालबेलिया, भोपा-भोपी के नृत्य कला का दूसरा पक्ष उजागर करते हैं।
राजस्थान पैवेलियन की सैन कलात्मकता बहुमुखी पक्षों से दर्शकों को रुबरु कराती है तभी तो कलाप्रेमी राजस्थान मण्डप की ओर चुम्बकीय आकर्षण की भांति चले आते हैं ।