वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मदन केवलिया ने कहा है कि एक शिक्षित महिला अपने परिवार को ही नहीं अपितु पूरे समाज को सुशिक्षित और सुसंस्कृत करती है। डा.केवलिया बुधवार को महिला अधिकारिता विभाग बीकानेर संभाग की ओर से नारी निकेतन में महिला शिक्षा एवं महिला स्वरोजगार विषयक एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्यवक्ता के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि महिला शिक्षा के लिए भक्तवत्सलम समिति,डा.राधाकृष्णन समिति,नई शिक्षा नीति के अन्तर्गत अनेक प्रयास हुए,जिनसे महिला शिक्षा का विकास हुआ। इस सदी में सर्वशिक्षा अभियान,त्वरित महिला साक्षरता कार्यक्रम,बालिका शिक्षा प्रोत्साहन आदि योजनाओं से बालिका शिक्षा को बढावा मिला है। डॉ.केवलिया ने कहा कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्राों में राज्य सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में कई कदम उठाये है। इसके तहत प्रचेताओं के माध्यम से महिलाओं के सर्वांगीण विकास की ओर विशेष प्रयास किये गये है। महिला अधिकारिता विभाग की कार्यक्रम निदेशक उषा राव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को शक्ति के रूप में अंगीकार किया गया है। विभाग की प्रचेताएं महिलाओं में फैली भ्रांतियों और कुरीतियों को मिटाने के लिए उनमें छिपी प्रतिभा को उजागर करें। ग्रामीण परिवेश की कलाओं को उभारने में उनकी सहायक बनें। उन्होंने कहा कि वे स्वयं सहायता समूह के गठन में न केवल प्रयास करें बल्कि उन्हें स्वरोजगार परक उद्यम से जोडंे। महिलाओं का आर्थिक उत्थान होने से उनमें विश्वास बढेगा और वह समाज की मुख्यधारा से जुड पायेगी। कार्यशाला में कार्यक्रम अधिकारी एवं ब्लाक शिक्षा अधिकारी मोहम्मद सलीम ने राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में साक्षरता एवं सतत् शिक्षा के अन्तर्गत ३ हजार ४०५ शिविर आयोजित कर,८४ हजार ९५९ महिलाओं को साक्षर किया गया। महिलाओं के लिए ३१३ व्यावसायिक कौशल उन्नयन प्रशिक्षण आयोजित हुए ,जिनमें १५हजार ३८६ महिलाओं को लाभान्वित किया गया।