संस्कृति की गाथा गाने वाले कर रहे हैं उसका पतन - रावत Culturist are doing itself downward - Rawat Regional Hindi Regional News, Regional Latest News, Regional Hindi News, Regional English News, Business News">
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| 05 December 2008 |
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खबरएक्सप्रेस, २४ मई। क्षेत्रीय सांसद धनसिंह रावत ने कहा कि संस्कृति की गाथा गाने वाले लोग ही संस्कृति का पतन कर रहे हैं और दुर्भाग्यजनक पहलु यह है कि शहरी परिवेश में पलने वाला व्यक्ति इसका अगुवा बना हुआ है। वे गुरूवार को अखिल विश्व गायत्री परिवार शांति कूंज हरिद्वार द्वारा संचालित जिला युवा प्रकोष्ठ के दो दिवसीय युवा जागृति अभियान शिविर को सम्बोधित कर रहे थे। सांसद रावत ने कहा कि संस्कृति का वास्तविक रक्षक ग्रामीण परिवेश में पलने वाला आदिवासी ही है। दुर्भाग्यजनक पहलु यह है कि इसमें युवावस्था कभी दिखाई ही नहीं देती। एक तरफ १२ साल का बच्चा होटलों में नजर आता है तो वही १७ साल की बालाएं अन्य प्रदेशों में मजदूरी करने के लिये विवश दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि सरकारों की दोगली नीति के चलते आदिवासियों का विकास नहीं हो पा रहा है। एक तरफ आवासीय विद्यालय खोले जा रहे हैं लेकिन उनकी हालातों पर नजर डाले तो स्थिति इतनी दयनीय नजर आती है कि यह आवासीय विद्यालय मात्र चपरासियों के भरोसे चलते नजर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि घाटोल में तीस बच्चे और सात शिक्षिकाएं हैं लेकिन परिणाम देखा जाए तो मात्र एक बच्चा उर्त्तीण हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार को यह दोगली नीति बंद करनी होगी। इस अवसर पर सांसद ने रामसेतु बचाने के लिये संसद में हरसंभव आवाज उठाने का आश्वासन भी दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती कृष्णा कटारा ने कहा कि भक्ति और शिक्षा का संगम करके ही ज्ञान को बढाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिवेश में बच्चों को स्कूल भेजना जरूरी है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत बताते हुए कहा कि जयपुर में उन्होंने किस तरह से आज से बारह वर्ष पूर्व अपनी बात विश्वास से रखी थी। विशिष्ठ अतिथि पद से बोलते हुए सामाजिक कार्यकर्ता लालशंकर पारगी ने कहा कि हमारे ऋषियों, मनिषियों ने प्राणी मात्र के साथ युग परिवर्तन का मंथन किया था। उन्होंने कहा कि जब तक माता-पिता संस्कारित नहीं होंगे तब तक वे अपने बच्चों को संस्कारित नहीं कर पाएंगे। विशिष्ठ अतिथि पद से बोलते हुए शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीमती रंजन चरपोटा ने कहा कि जीवन में बचपन, युवावस्था एवं वृद्धावस्था तीन कडयां होती हैं जिसमें युवावस्था सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक माता सौ शिक्षकों के समान ज्ञान दे सकती है। अतः सबसे पहले माताओं को संस्कारित करना होगा। उन्होंने कहा कि युवाओं को व्यसन मुक्त कराना आज की सबसे बडी जरूरत है। कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि पद से घोटिया आंबा के हीरागिरी महाराज ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर टोली नायक दिनेश पटेल ने बताया कि अखिल विश्व गायत्री परिवार युवा जागृति शिविर युवाओं को संस्कृतिवान बनाने के लिये चला रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चें कल्पनाओं में भविष्य तलाशते हैं जबकि वृद्ध भूतकाल में विचरते हैं। इसके ठीक विपरित युवा वर्तमान का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि आज बुद्धिमान विवादों में पडे हैं क्योंकि धनवान अहंकार में बलवान बल का दुरूपयोग करने में जुटा हुआ है। उन्होंने कहा कि जीवन संग्राम है, इसे लडना ही पडेगा। उन्होंने बताया कि लार्ड मैकाले ने किस तरह से देश के व्यवसाय में कृषि तंत्र को और शिक्षा में ऋषि तंत्र को बर्बाद किया। कार्यक्रम में दीवाकर पारिख, छन्नुलाल संगीतज्ञ, रामकुमार, यशवंत, पंकज कुमार, संदेश वाहक ब्रह्मचारी महाराज, प्रो. दूबे (हरिद्वार) ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में जिला संयोजक अशोर परमार ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन अनिल व्यास ने किया। इस अवसर पर शांतिकुंज हरिद्वार से आई टोली ने युवाओं को प्रेरित करने वाले गीत प्रस्तुत किये। जिला संयोजक अशोक परमार ने बताया कि आज शुक्रवार प्रातः ७ बजे शहर के प्रमुख मार्गो से युवा चेतना रैली निकाली जाएगी। यह रैली गायत्री शक्तिपीठ आशापुरी नगरी से प्रारम्भ होगी। शुक्रवार को विभिन्न सत्रों में विभिन्न विद्वान युवाओं को विभिन्न विषयों पर प्रेरक उद्बोधन देंगे।
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