मानव तन ईश्वर की महान कृपा का प्रसाद है - तेजोमयानंद Gods great gift is Human Boady - Tejomyaanand Regional Hindi Regional News, Regional Latest News, Regional Hindi News, Regional English News, Business News"> <font color="#000000" size="2">मानव तन ईश्वर की महान कृपा का प्रसाद है - तेजोमयानंद Regional Hindi News : khabarexpress.com : The news portal of North India

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मानव तन ईश्वर की महान कृपा का प्रसाद है - तेजोमयानंद
24 May 2007

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खबरएक्सप्रेस, २४ मई। मानव तन प्राप्त हो जाना कोई साधारण बात नहीं है वरन् यह ईश्वर की महान कृपा का प्रसाद है। अतः मानव तन प्राप्त करने के बाद व्यक्ति को अपने एकमात्र उद्देश्य ईश्वर को प्राप्त करने की ओर बढना चाहिए। उक्त उद्गार दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी तेजोमयानंद ने ठीकरिया के विद्यालय में आयोजित आध्यात्मिक भजन संकीर्तन कार्यक्रम में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि मानव तन ही केवल एकमात्र ऐसा उपकरण है जिसमें ईश्वर को जानकर, देखकर एकाकार होकर उसकी वास्तविक भक्ति करके भवसागर से पार उतरा जा सकता है। उन्होंने कहा कि मानव तन को पा लेना मात्र जीवन नहीं है अपितु इस तन में ही अपने प्रितम परमात्मा का साक्षात्कार कर उसके सानिध्य में जीवन व्यतीत करना जिंदगी है। उन्होंने बताया कि जब मनुष्य किसी ब्रह्मनिष्ठ पूर्ण सतगुरू की कृपा से अपने भीतर ही परमात्मा के दर्शन कर और उससे प्रेरित होकर आचरण करता है तो उसमें मनुष्यता के गुण आते हैं। जिस मनुष्य में यह गुण नहीं आते वह मानव जन्म पाकर भी पशुतुल्य रहता है। उन्होंने कहा कि भक्ति ईश्वर से साक्षात्कार में महत्वपूर्ण कडी है। इसीलिए श्रीरामचरितमानस में कहा गया है कि ’जिन हरि भक्ति हृदय नहीं आनी, जीवित सब समान तेई प्राणी।‘ उन्होंने कहा कि भक्ति ही मनुष्य को कल्याण की तरफ बढाती है और मोक्ष तक पहुंचाती है। मनुष्य तन की महिमा गौस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में भी बताते हुए कहा है कि मानव तन देवताओं को भी दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि जो मनुष्य मानव तन का सदुपयोग करता है वही मोक्ष को प्राप्त होता है। इस अवसर पर भजन कार्यक्रम में तबले पर संगत रमेशानंद ने दी जबकि कपिल शर्मा एवं साध्वी सुमन भारती व साध्वी रूद्राणी भारती ने आकर्षक भजन प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम में बडी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।




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