www.khabarexpress.com |
| ||||||||||||||||||
| 05 December 2008 |
Forum
| Wallpapers | Photo
Gallery | Business | Entertainment
| Education | Sports
| Article | City | Election | |
बीकानेर, २४ अगस्त। ’’उठ ब्राह्मण अब हुंकार लगा कर सिंह नाद हम आते है यह सूत्र जगत का शाश्वत है जो खोते है वो पाते है की काव्य प्रस्तुति पुष्करणा दिवस समारोह में आयोजित काव्य गोष्ठी में युवा कवि संजय आचार्य ’’वरूण‘‘ ने दी। स्थानीय ब्रह्म बगेचा में हुए इस कार्यक्रम में पुष्करणा समाज के वरिष्ठ व युवा कवियों ने काव्य पाठ के माध्यम से युवा पीढी को संदेश दिया। काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि भवानीशंकर व्यास ’’विनोद‘‘ थे जबकि अध्यक्षता लक्ष्मीनारायण रंगा ने की। कवि व्यास ने गौखा खोल चेतना रा राजस्थानी कविता को सुनाकर चेतना व नई सोच पैदा करने का संदेश दिया। वरिष्ठ साहित्यकार रंगा ने कहा कि जैसे पक्षी एक पंख से उड सकता वैसे ही समाज महिला वर्ग के बिना आगे नहीं बढ सकता। उन्होने कहा कि जो समाज बिखरा हुआ है वो चाहे कितना ही विशाल हो अगर एक नहीं है, अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं है वह विकास को छू नहीं सकता। रंगा ने ’’कभी हम भी सदाबहार थे अब हम पे समय की मार है कविता की प्रस्तुति दी। गोष्ठी में कमल रंगा ने ’’मॉ री टैम तुलसी माता रो थान बिचालै प्रस्तुत कर आज के परिवार का चित्रण दशार्या। युवा कवि जुगल किशोर पुरोहित ’’नूवे जमाने री नूंवी उपज‘‘ ब्रजेश्वर लाल व्यास ने ’’बीकाणा ने मूल सरावे, दूर-दूर सूं देखण आवै, शांति प्रसाद बिस्सा ने हाथों में दे विश्वासों के तिनके अधरां पर, किशन पुरोहित ने ’’फुटपाथ पर कोई कह रहा है‘‘ सुनील गज्जाणी ने ’’धुरी-धुरी सी है खामोशी‘‘ का काव्य पाठ कर जन चेतना का संचार किया। वहीं सत्यनारायण बजाज व रमेश भोजक ने भी काव्य पाठ किया। इससे पूर्व समारोह का प्रारम्भ समारोह के अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण रंगा व मुख्य अतिथि भवानी शंकर व्यास ’’विनोद‘‘ ने मॉ उष्ठवाहिनी के चित्र पर माल्यापर्ण किया।
|
Top Story of The Day Latest Articles
|
Education Special |
All right reserved by Khabarexpress.com
Contact Us | Archives
| Sitemap | Can't
see Hindi ?
Special Edition: Lakshchandi Mahayagya, Camel
Festival 2007, Vartmaan Sahitya,
Bikaner Udyog Craft Mela
Our Network rajb2b.com
| khabarexpress.com
| uniqueidea.net
| hindinotes.com