बीकानेर। शिक्षा विभाग इन दिनों राज्य की स्कूलों व शिक्षकों की गणित बैठाने में लगा रहा। यह सिलसिला शिक्षक समानीकरण के मानदंड कायम करने के लिए तीन महीने व्यतीत हो चुके। पिछले वर्ष दिसम्बर माह से प्रारंभिक शिक्षा निदेशक ने सभी उपनिदेशकों को समानीकरण के अंतर्गत स्कूलों में छात्रों तथा अध्यापकों व सरप्लस शिक्षकों की जानकारी मांगी। इसके चलते जिला शिक्षा अधिकारी ने अथक प्रयास करके उन्हें रिपोर्ट भेजी । लेकिन 15 जुलाई 09 तक निर्धारित मानदंड तय करते हुए आंकडे तैयार करने के पुनः निर्देश जिला शिक्षा अधिकारियों को दिये जिस पर मशक्कत शुरू करते हुए स्कूली छात्रों व अध्यापकों की संख्या की रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जो निदेशालय के अधिकारियों को रास नहीं आई और मानस बदला जबकि जयपुर में हुई बैठक के बाद प्रमुख शासन सचिव ने स्कूल व संस्कृत शिक्षा विभाग के नये मानदंड तय करके प्रस्ताव मांगे। तीन माह में तीन बार समानीकरण के मानदंड बदल गये। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा भेजे आंकडे मुताबिक नहीं आए इसके कारण उन्होंने दूसरे कार्यों को तरजीह देना बंद कर दिया और समानीकरण के आंकडों के जंजाल में ही फंसे रहे। निदेशालय ने तीन बार समानीकरण की सूचना मांगी जिनमें पहले मानदंड में प्राथमिक स्कूल में 40 विद्यार्थियों की संख्या पर दो अध्यापक, 41 से 80 छात्र होने पर तीन, 81 से 120 विद्यार्थी होने पर चार अध्यापक, 121 से 160 छात्र होने पर पांच व 161 से 200 छात्र पर छह अध्यापक निर्धारित किए जबकि उच्च माध्यमिक विद्यालयों में एक प्रधानाध्यापक तथा सैकिंड ग्रेड के साथ 240 छात्रों के साथ पांच व 241 से 280 छात्र पर छह, 281 से 320 पर सात, 321 से 360 छात्रों पर आठ, 361 से 400 छात्रों पर नौ अध्यापक, 401 से 440 छात्रों पर 10 अध्यापक, 441 से 480 छात्रों पर 11 अध्यापक 481 से 520 छात्रों पर 12 अध्यापक तथा 521 से 560 छात्रों पर 13 व 562 से 600 छात्रों पर 14 शिक्षकों का मानदंड तय किया है। दूसरे मानदंड में 50 छात्रों पर दो, 51 से 100 छात्रों पर तीन, 101 से 150 छात्रों पर चार, 151 से अधिक छात्र संख्या होने पर शिक्षकों की संख्या 5 व उप्रावि में सैकिंड ग्रेड अध्यापक के एक प्रधानाध्यापक के साथ 240 छात्रों पर पांच 241 से 300 छात्रों पर छह अध्यापक, 301 से अधिक छात्र होने पर सात अध्यापक मुकर्रर हैं। तीसरे मानदंड के मुताबिक शाला में 50 छात्रों की संख्या होने पर दो शिक्षक व अगले 50 छात्र पूरे होने पर एक अध्यापक और रखने का प्रावधान कर दिया। नये मानदंड के तहत सौ में एक कम छात्र होने दो ही अध्यापक रहेंगे और उप्रावि में दो सौ छात्र होने पर प्रधानाध्यापक सहित छह अध्यापक तथा अगले 50 छात्र की संख्या होने पर एक अध्यापक की और वृद्धि कर दी। कक्षा आठवीं वाले उच्च प्राथमिक विद्यालय में आठ से अधिक अध्यापक नहीं होने चाहिए। तीन मानदंडों के चलते केवल समानीकरण की आड में दूसरे कार्य नहीं हो सके जिससे शिक्षकों को समानीकरण की एवज अपने भुगतान न होने का खामियाजा भुगतना पडा।
दूसरी तरफ राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत ने शिक्षक समानीकण के नये मानदंडों का विरोध करते हुए मंगल बिहारी समिति की रिपोर्ट लागू करने की मांग की। इस संबंध में संघ की बैठक मंगलवार 25 अगस्त को आयोजित की जाएगी जिसमें उक्त मुद्दों पर चर्चा करते हुए इस रिपोर्ट को लागू करने की मांग निदेशक प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा से की जाएगी।