जयपुर, २४ अक्टूबर। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में बांधों, जलाशयों, नाडी, नदी और तालाबों के केचमेंट एरिया में अतिक्रमण, अनियमित निर्माण आदि को चिन्हित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक सौ एक बांध क्षेत्रों के केचमेंट एरिया का सर्वे कराया गया ताकि पानी की बहाव में कोई बाधा नहीं आए एवं ग्रामीणजन पानी का सुविधा पूर्वक उपयोग कर सकें।
राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर में दायर जनहित याचिका १५३६/०३ अब्दुल रहमान बनाम राज्य सरकार के अन्तर्गत न्यायालय द्वारा पारित निर्णय की अनुपानला में राज्य सरकार ने यह सर्वे कराया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत यह सर्वे स्टेट रिमोर्ट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर, जोधपुर द्वारा कराया गया।
सर्वे में यह बात सामने आई कि केचमेंट एरिया में खनन गतिविधियां, जलाशय, बांध एवं तालाबों के बहाव क्षेत्र में ऊँचाई पर एनिकट एवं नई जल संरचनाओं का निर्माण, खेतों में सिंचाई के लिए नालियां निकालना, बीहड भूमि, आवासीय कालोनियां बनाकर मार्ग निकालना, बंजर पहाड, रेतिला क्षेत्र, उजाड वन भूमि, केचमेंट एरिया में अनियमित एवं कम वर्षा के कारण पानी के बहाव में बाधा और कमी हुई है।
सर्वे के तहत सभी बांध क्षेत्रों की विशेषताओं का अध्ययन किया गया और विभिन्न चरणों में उनके नक्शे और रिपोर्ट तैयार कर सिंचाई विभाग को प्रस्तुत की गई। पांच बांध क्षेत्रों का अध्ययन नहीं किया जा सका क्योंकि उनका नहरी क्षेत्र और केचमेंट एरिया गुजरात एवं मध्यप्रदेश राज्य में पडता है।