हनुमानगढ , २४ अक्टूबर। औद्योगिक प्रोत्साहन शिविर में विशेष रुप से आमंत्रित भारतीय मानक ब्यूरो के जयपुर से आए निदेशक श्री यू.एन. खरे ने स्वर्णाभूषणों के हॉलमार्क, इसके लिए लाईसेंस एवं आवेदन की प्रक्रिया तथा शुद्वता की जांच के लिए कैरोमीटर के उपयोग के सम्बन्ध में उपयोगी जानकारी प्रदान की।
उन्होंने बताया कि ञञ हॉलमार्कञञ सरकार द्वारा अधिकृत एक मानक चिन्ह है जो सोने की शुद्घता को दर्शाता है। भारतीय मानक ब्यूरों द्वारा एक योजना के तहत किसी भी ज्वेलर्स को हॉलमार्क के लिए लाईसेंस एक निर्धारित प्रक्रिया के बाद प्रदान किया जाता है। स्वर्ण आभूषण विक्रेता को हॉलमार्क का जिला, गांव या तहसील स्तर पर लाईसेंस लेने के लिए आवेदन पत्र के साथ सभी प्रमाण पत्र संलग्न कर निर्धारित शुल्क अदा करना होता है। इसके बाद उसे अपनी सारी गोल्ड ज्वैलरी को जांच के लिए प्रस्तुत करना होगा। ब्यूरों द्वारा प्रत्येक आईटम पर लेजर मार्किग द्वारा होलमार्क का चिन्ह लगाने के बाद लाईसेंस तीन साल के लिए प्रदान किया जाता है। उन्होंने बताया कि लाईसेंसी के लिए यह आवश्यक होता है कि वह अपने प्रतिष्ठान पर बोर्ड पर हॉलमार्क से सम्बन्धित पूरी जानकारी का प्रदर्शन करना आवश्यक होगा। ब्यूरों के निदेशक ने जानकारी दी कि कोई ऐसी विद्या या उपकरण नही जिससे छूकर सोने की शुद्घता का पता लगाया जा सके। सोने की शुद्घता का पता केवल उसे पिघलाकर ही पता किया जा सकता है। कैरोमीटर से शुद्घता की जांच पर प्रकाश डालते हुए उन्हने जानकारी दी कि यह
उपकरण एक एक्स-रे एनालाईजर के रूप में कार्य करता है तथा सोने की कुछ परतों व माइक्रोंलेयर तक पहुंच कर रिफलेक्ट करता है। इससे ज्वैलरी को आर-पार पूरा नहीं देखा जा सकता है। कसौटी पर लाईन खीच कर जांच के परम्परागत तरीके से भी ७५ प्रतिशत तक शुद्घ का ही पता लगाया जा सकता है, इसके लिए भी विशेषज्ञ व जानकार आखों का होना आवश्यक है।
भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा जनवरी 2007 से शुद्घता की जांच के लिए हॉलमार्क की अनिवार्यता लागू करने की योजना का खुलासा करते हुए शिविर में बताया गया कि सुनार, व्यवसायी तथा उत्पादन करने वालों को हॉलमार्क से जुडना होगा।