जयपुर, २४ अक्टूबर। सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय के अधीन जिलों में संचालित सूचना केन्द्र और जनसम्पर्क कार्यालय एक इकाई के रूप में एकीकृत किए जाकर एक ही छत के नीचे संचालित होंगे। इन सूचना केन्द्रों पर महीने में एक बार जन सुनवाई कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे द्वारा मंगलवार को जयपुर में आयोजित सूचना एवं जनसम्पर्क सेवा के अधिकारियों की बैठक में लिए गये निर्णयों की बुधवार को सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के प्रभारी एवं संसदीय सचिव श्री भवानी सिंह राजावत ने समीक्षा की और बैठक में लिए गये निर्णयों पर तत्काल कार्यवाही करने के निर्देश दिये।
समीक्षा बैठक में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली करीब ६० प्रतिशत जनता को लक्ष्य बनाकर प्रचार-प्रसार कार्य करने पर बल दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में अब प्रचार के परम्परागत तरीकों को अपनाकर लोक कलाकारों के माध्यम से उनकी भाषा, शैली और बोली में सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और प्रदेश के चहुंमुखी विकास की जानकारी उन तक पहुंचाई जायेगी। इसके अलावा ३० नवम्बर और एक दिसम्बर, २००७ को प्रदेश में निवेश को बढावा देने के उद्देश्य से जयपुर में आयोजित किये जा रहे ‘‘रिसर्जेंट राजस्थान’’ और ‘‘वर्तमान सरकार की चौथी वर्षगांठ’’ के अवसर पर ८ दिसम्बर, २००७ से विशेष प्रचार अभियान शुरू करने की रूपरेखा बनाने पर भी चर्चा की गई। जिन जिला जनसम्पर्क कार्यालयों म वाहन नहीं हैं, वहां वाहन उपलब्ध कराये जाने के साथ ही लेपटाप, डिजिटल केमरा, मोबाइल फोन जैसी सुविधाएं भी जनसम्पर्क अधिकारियों को दिये जाने के संबंध में चर्चा हुई।
बैठक में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री रोहित कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेषाधिकारी जनसम्पर्क श्री महेन्द्र भारद्वाज, सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशक श्री एम.एम.जोशी, अतिरिक्त निदेशक श्री राम अवतार बुनकर सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।