लोकसभा में फिर से गूंजी राजस्थानी भाषा की मांग
24 Oct
2008
सांसद भार्गव ने उठाया राजस्थानी भाषा को मान्यता देने का मामला
नई दिल्ली, राजस्थान के सांसद गिरधारी लाल भार्गव ने केन्द्र सरकार से मांग की है कि संविधान की आठवीं सूची में राजस्थानी भाषा को भी शामिल किया जाए। जिससे इसकी मान्यता और उपयोग बढ सके और राजस्थानी भाषी को भी मान्यता मिल सके।
लोकसभा में शून्य काल में बोलते हुए उन्होंने कहा कि मारवाडी हिन्दुस्तान की पश्चिमी बोली में राजस्थानी समूह की सबसे बडी बोली है। प्रायः मारवाडी को राजस्थानी के पर्याय के रू प में जाना जाता है लेकिन ये बोली मुख्यतः राजस्थान के मध्य एवं पश्चिमी भाग के बीकानेर, नागौर, अजमेर, जोधपुर, पाली, जालौर, जैसलमेर और बाडमेर जिलों बोली जाती है। इस क्षेत्रा को मारवाड के नाम से जाना जाता है।
मारवाडी समुदाय एक ऐसा व्यवसायिक समुदाय है जो दुनिया भर में फैला हुआ है और इनका अपनी भाषा के प्रति विशेष लगाव है। अतः ये घर परिवार सामाजिक कार्यो में अपनी भाषा का प्रयोग करते हैं। जिससे कि एक पीढी से दूसरी पीढी तक चली जाती है इसके बोलने वालो की संख्या लगभग एक करोड है। हिन्दी की तरह मारवाडी भी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है और इसका व्याकरण भी हिन्दी जैसा ही है। इसके 50 प्रतिशत से 65 प्रतिशत तक शब्द हिन्दी जैसे ही हैं। मारवाडी का शिक्षा में माध्यम या सरकारी कामकाज में उपयोग नहीं होता है इसका कारोबार में उपयोग होता है। राजस्थानी समूह की अन्य बोलियों में हार्ड होती है। हाडौती मेवाडी, ढूढारी, मेवाती शेखावाटी बागडी आदि शामिल है।
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