बीकानेर, गास स्वर्ग की सीढी है उनकी पुजा करके ही हम पुण्यार्थ कमा सकते है। दुर्भाग्य है कि हमारें घर परिवार में कुता-बिल्लीयों के लिये जगह है किन्तु गायों के लिए हमारें घर में जगह नही है। ये उद्गार पुण्यानन्द जी महाराज ने नापासर में संत श्री सेवाराम गौ शाला की स्वर्ण जयन्ती पर आयोजित तीन दिवसीय समारोह के शुभारम्भ के अवसर पर व्यक्त किये। उन्होनें कहा कि अनाथ गायों की सेवा में जो पुण्य मिलता है उससे अच्छा कोई काम नहीं है। सेवाराम गौ शाला के गौपालको ने अपने यहां सेवण घास लगाकर अनुकरणीय कार्य किया है। महाराज श्री ने कहा कि मन में लोक कल्याणकारी भावना प्राणी मात्र के लिए रखें। उन्होनें कहा कि हम सारा काम सरकार के भरोसें छोड देते है ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। मन में दृढ संकल्प लेकर किया गया कोई भी कार्य अवश्य सफल होता है। गायों में भेदभाव न करने का संदेश देते हुए महाराज श्री ने कहा कि गाय कोई देशी या विदेशी नहीं होती। विदेशी गाय कही जाने वाली गौ मातायें भी भारत की ही देन है। इनमें अन्तर करने की बजाय इसे पुजा जाना चाहिये। विदेशों से भी सीखने योग्य अच्छी बातों को अपने जीवन में अनुसरण करना चाहिए। धनीनाथ पंच मंदिर के पीठाधीश्वर स्वामी विशोकानन्द महाराज ने कहा कि गायों में बतीस करोड देवी-देवताओं का वास है। ऐसे में हम सिर्फ गौ माता की पुजा करके ही समस्त प्रकार के देवी-देवताओं का स्तरण कर सकते है। गायों से प्राप्त गोबर व मलमूत्र भी औषधीय उपयोग के है। हमारें धार्मिंक ग्रंथों में बताया गया है कि गोबर के लेपन से घर में लक्ष्मी विराजमान रहती है। गायों के दुघ से भी अनेक उत्पाद तैयार होते है फिर भी गायों का तिरस्कार किया जाता है। उन्होनें अनेक उदाहरण देकर गौ संरक्षण व गौ सेवा का आहृान किया। मुख्य वक्ता के रूप में गौ सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष भंवरलाल कोठारी ने कहा कि गौ शालाओं की रक्षा एवं रख-रखाव के लिये सरकार को भी संमेकित प्रयास करने की आवश्कता है। इससे पूर्व अतिथियों ने दीप प्रज्जवलीत कर कार्य क्रम आगाज किया। अध्यक्ष रतनलाल मुन्दडा ने बताते हुए गौ शाला के इतिहास पर प्रकाश डाला। आयोजन से जुडे शंकर लाल झंवर ने बताया कि कल सुबह नौ बजे स्वामी विशोकानन्द भारती का प्रवचन होगा तथा शाम छह बजे दिल्ली से राजु प्रिंस म्युजिकल पार्टी का कृष्ण लीलाओं पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करेगें।