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‘श्री गुरू प्रणाम’ काव्य कृति में मार्मिक स्मृतियों का उद्रेक अनुभूत होता हैः पदमश्री शाह
24 Dec 2007

पुस्तक मे जो अभिव्यक्त हुआ है वह सहज-संवेरा है मार्मिक है। ईश्वर अंश जीवन अविनाशी की जरूरत को कवयित्री ने भीतर तक महसूस किया है। कुछ कविताएं कवयित्री की मिट्टी से जुडी मार्मिक स्मृतियों को उद्रेक का अनुभव कराती है।


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Educational Short Stories in Hindi

Educationist Padma Shree Ramesh Chandra Shahपुस्तक मे जो अभिव्यक्त हुआ है वह सहज-संवेरा है मार्मिक है। ईश्वर अंश जीवन अविनाशी की जरूरत को कवयित्री ने भीतर तक महसूस किया है। कुछ कविताएं कवयित्री की मिट्टी से जुडी मार्मिक स्मृतियों को उद्रेक का अनुभव कराती है।‘‘
 उक्त उदृबोधन सुप्रसिद्व साहित्यकार पदमश्री श्रीवीद रमेशचन्द्र शाह परम्परा, बीकानेर एंव बिन्नाणी कन्या महाविद्यालय ंके सह संयोजन में वाक प्रकाशन, चैन्नई की ओर से प्रकाशित मंजुलिका झँवर की प्रथम काव्य-कृति ’श्री गुरू प्रणाम‘ पर अपनी दृष्टि को व्यक्त करते हुए दिए। यह आयोजन स्थानीय बिन्नाणी महाविद्यालय में सम्पन्न हुआ।
 इस अवसर पर श्रवीद रमेश चन्द्र शाह ने कहा कि सिद्वों की वाणी और असिद्व व्याकुलता के बीच मे सीमान्तों पर , जहाँ हमारे जैसे सांसारिकों की स्वाभाविक अवस्थिति है उस अन्तहीन सेस लगते सीमान्त प्रदेश में ये कवतिाएं जिस तरह खुद हमारे हदय, अपने अन्तकरण की आवाज बनकर गूंजने लगती है- वह एक अलग ही मूल्यवत्ता का आश्वासन स्पती जान पडती है। समझ मे आता है- ’स्वास्तस्तभः शान्तये का क्या अभिपा्रय है और वह क्यों हमारे वर्तमान मानस ंके लिए भी एक बडी चुनौती बनकर प्रकट होती है।
 इसी क्रम में श्री शाह ने कृति श्री गुरू प्रणाम ंके संदर्भ मे ही कहा कि यह अकारण नहीं कि गीता इस संग्रह में सर्वत्र अन्तर्ध्वरित है। संग्रह में उसकी टंकार सर्वत्र सुनाई पडती है वह सकारण है और कर्वयित्री का अर्जित सत्य है।
   
 Malchand Tiwari and Gauri Shankar Vyasइसी अवसर पर राजस्थानी के सुप्रसिद्व साहित्यकार श्रीमालचंद तिवाडी ने
’श्री गुरू प्रणाम‘ एवं शीध्र प्रकाश्य श्री गुरू प्रसाद की कतिपय चुनिन्दा कविताओं का वाचन कर श्रोताओं को अपनी आत्मा के भीतर तक देखने की ओर मुखर किया।
 श्री तिवाडी ने ’श्री गुरू प्रणाम‘ की चुनिन्दा कविताओं-नमस्कार, गद्य जब पद्य होता है, गुरू प्रणाम, नंचिकेत-अमृत मृत्यु, अन्त में सबके उतर एक ही होते है, दाधिचि, गद्य जब पद्य हो जाता है,

 समारोह में युवा साहित्यकार श्री अनिरूद्व उमट ने पदम श्री रमेशचन्द्र शाह ंके व्यक्तित्व एंव कृतित्व से आगंतुकोक को अवगत कराया।

इसी अवसर पर प्रख्यात लोक कला मर्मज्ञ एवं परम्परा, बीकानेर ंके संयोजक डाँ. श्री लाल मोहता ने श्री गुरू प्रणाम कृति के प्रकाशन की पृष्ठभूमि पर व्यापक चर्चा करते हए कहा कि कवयित्री अपनी जीवन यात्रा में मिले सर्व सुख-दुःख को एकांतिक रूप् से झेलती रही। व्यथा को वेदना और वेदना को संवदेना में रचती रही।
 साथ ही श्रीमोहता ने ’श्री गुरू प्रणाम‘ कृति पर भारत के प्रमुख साहित्यकारों श्री कन्हैयालाल सेठिया, श्री  हरीश भादाणी, श्री बालकवि बैरागी, श्री  शिवरतन थानवी, श्री दीनदयाल ओझा, श्री मति कुसुम खेमानी आदि के लिखित वक्तयों का वाचन किया।
 समारोह में संस्था एंव महाविद्यालय की ओर से आगतुकों का स्वागत करते हुए प्रहलाद राय जोशी ने श्री आगुंतक का स्वागत किया।
 कार्यक्रम ंके प्रारम्भ में माँ सरस्वती एंव श्री सिद्वान्त की प्रतिभा ंके समक्ष दीप प्रज्व्वजन एंव माल्यार्पण से किया गया। इसी क्रम में युवा गायक श्री  पुखराज शर्मा एवं श्री लाल रंगा द्वारा गणेश वंदना व सरस्वती वदंना को मधुर प्रस्तुती दी गई। इसी अवसर पर आगंतुक अतिथि महानुभावों-पदमश्री रमेश चन्द्र शाह एवं मालचंद तिवाडी, पुखराज शर्मा व श्री लाल रंगा की माल्यावर्पण कर स्वागत किया गया।
 समारोह के अंत में परम्परा चैन्नई की अध्यक्षा श्रीमति मंजुलिका झंवर द्वारा लिखित पत्र के माध्यम से आगंतुको के प्रति आभार स्वीकार किया गया।
 इसी क्रम में श्री गौरीशंकर व्यास, मानद सचिव, बिन्नाणी महानुभावों ंके प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया।




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प्रणाम’
काव्य
कृति
मार्मिक
स्मृतियों
उद्रेक
अनुभूत
होता
पदमश्री
शाह


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