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सरसों एवं आलू फसल में पाले से सुरक्षा

25 Jan 2008
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हनुमानगढ (सू.का.), क्षेत्र में लगातार शीत लहर के चलते एवं न्यूनतम तापमान के जमाव बिन्दु से नीचे 0.5 डिग्री सैल्सियस तक पहच जाने के साथ ही अधिकतम तापमान में कमी के चलते सरसों की फसल सर्वाधिक प्रभावित हो रही है । उपनिदेशक कृषि(तिलहन) डॉ. सुआलाल जाट ने बताया कि बर्फीली हवाओं के चलने एवं तापमान के न्यूनतम जमाव बिन्दु से नीचे गिरने के कारण सरसों की पत्तियों की कोशिकाओं का जीवद्रव्य जम जाने के कारण पत्तियों में झुर्रियां बन रही हैं । तत्पश्चात् कोशिकाओं के मरने के कारण पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया न्यूनतम स्तर पर पहचने के कारण फलियों में दाने या तो बन ही नहीं पा रहे हैं या फिर सिकुड गये हैं तथा  छोटे रह गये हैं । उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्राों में फसल की फलियों की कोशिकाओं पर शीत का प्रभाव पडा हैं , वहाँ फलियों के अंदर दाने काले पड कर सडने लगे हैं । देरी से बुवाई की गई सरसों की फसल में पुष्प गुच्छ भी झुलस रहे हैं । पाले से प्रभावित सरसों का फसल के पौधों के तनों के उपर इन परिस्थितयों में सफेद झुलसा रोग (स्क्लीरोटिनिया तनागलन) का अत्यधिक प्रभाव होने की सम्भावना है एवं कई क्षेत्रों में इसके धब्बे तनों पर दृष्टिगोचर हो रहे हैं । इस रोग के कारण पौधा प्रभावित स्थान से टूट कर गिरने लगता है एवं पैदावार पर बुरा प्रभाव पडता है । इसी कारण इससे बचाव की महत्ती आवश्यकता है ताकि फसल को इस कहर से बचाकर पैदावार प्राप्त की जा सके।
आलू की फसल में भी इसी प्रकार पत्तियों एवं तनों की कोशिकाऍं भी मरने लग जाती है तथा जो ट्यूबर बनते हैं वह भी बहुत छोटे एवं कम वजन के बनते हैं तथा पैदावार पर बुरा प्रभाव पडता है।

बचाव हेतु सुझाव
कृषि विभाग द्वारा इस सम्बंध में काश्तकारों को बचाव के उपाय सुझाए गए है । जिसके अनुसार फसल को शीत के प्रभाव से बचाने हेतु व्यापारिक गंधक का 0.1 प्रतिशत घोल या घुलनशील गंधक का 0.3 प्रतिशत घोल बनाकर 7-7 दिन के अंतराल पर छिडकाव कर सकते है। साथ ही रात्रि 10 बजे के बाद हवा के रुख के अनुरुप फसल की मेडों पर अलाव एवं घास फूस जलाकर धुंआ करते रहना भी आवश्यक है । फसल में नमी बनाये रखने हेतु हल्की सिंचाई भी आवश्यक है।
सरसों की फसल में तनों पर सफेद झुलसा रोग (स्कलीरोटोनिया रॉट) के लक्षण दिखने पर रिडोमिल एमजड-72 या कार्बनडेजिम तथा मैकोजैब के मिश्रण का 0.2 प्रतिशत छिडकाव 10-10 दिन के अंतराल पर करना आवश्यक है। इस सम्बंध में अधिक जानकारी के लिए कृषि विभाग के कार्यालय या नजदीकी कृषि अधिकारी से किसान सेवा केन्द्र पर सम्पर्क किया जा सकता है।



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