पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. बुलाकीदास कल्ला ने बंगलानगर में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी के घोषणा-पत्र में सभी वर्गो को महत्व दिया गया है। कल्ला ने संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी केवल घोषणा-पत्र बनाती है उस पर अमल नहीं करती परंतु कांग्रेस ने हमेशा घोषणा-पत्र के अनुरूप कार्य किया है। कांग्रेस सरकार आने पर बिजली की क्षमता बढकार 10000 मेगावाट बिजली पैदा की जाएगी जिससे राज्य का कोना-कोना रोशन होगा। एक लाख बेघर लोगों को मकान बनाकर दिये जाएगें। इस घोषणा-पत्र में कांग्रेस सरकार आने पर राज्य के कर्मचारियों को केन्द्र के समान वेतन दिया जाएगा जो कि राजस्थान के कर्मचारियों के लिए कांग्रेस का एक तोहफा है। बीकानेर की बहुप्रतिक्षित समस्या का समाधान रेल बाईपास को भी कांग्रेस सरकार आने पर प्राथमिकता से पूरा किया जाएगा। कल्ला ने कहा कि कच्ची बस्तियों को स्टेट ग्रांट के तहत पट्टे वितरित करने के साथ उनका समुचित विकास कांग्रेस सरकार आने पर किया जाएगा। बेरोजगारी को मिटाने के लिए 10 लाख लोगों को रोजगार भी राज्य में कांग्रेस की सरकार आने पर दिया जाएगा। डॉ. कल्ला ने आम सभा में कहा कि बीजेपी के घोषणा-पत्र में जनता के लिए कुछ भी नहीं है। सिर्फ सब्जबाग दिखाए गए है। हम वादा करते है कांग्रेस की सरकार अपने घोषणा-पत्र के अनुरूप ही कार्य करेंगी। कल्ला ने कहा कि मैं हमेशा गांव-गरीब और किसान के बीच रहा हूं और उनकी समस्याओं को जानते हुए समाधान करने का प्रयास करता हूं। जनसभा में उपस्थित भारी भीड ने डॉ. कल्ला के लिए अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। वहीं बीजेपी के नेता गणेशाराम नाई ने अपने सैकडों कार्यकर्ताओं के साथ कल्ला के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। सभा की अध्यक्षता परमानंदजी तर्ड ने करते हुए बीकानेर के और राज्य की समुचित विकास के लिए कांग्रेस को वोट देने की अपील की। सभा में तेजाराम, हाजी इब्राहीम गौरी, भोमराज आर्य, हनुमान जी चौधरी, धर्मचंद चौधरी, हसन अली, विजय गोदारा, कालूराम, शिवलाल गोदारा, ताजं खां, गंगाचंद कूकणा सहित कांग्रेस के पदाधिकारी मौजुद थे। दशनाम गोस्वामी चौक में नुक्कड सभा में डॉ. कल्ला ने कांग्रेस को जिताने की अपील की। शिवपुरी अपने साथियों के साथ मौजुद थे। मुन्ना भादाणी, अशोक मारू, जयलाल गोदारा, भीम महाराज, रवि नाहटा, गिरिराज जोशी, चांदजी बिस्सा, बच्छराजसिंह, सुनीता गौड ने अलग- अलग क्ष्त्रों में डॉ. कल्ला के लिए जनसम्फ किया।
AGAR AB BHI DESH KI JANTA CONGRESS JAISE PARTIES KO SATTA SONPTI HEIN TO IS DESH KA BHAVISHYA BHI PAKISTAN SE BHI BADTAR HO JAYEGA....... AUR KITNE LOG MARENGE INKE MUSLIM TUSHTIKARAN KE KAARAN......... NARENDRA MODI KO PM BANAO...DESH BACHAO.. NAHI TO SAB BHARATWAASI KATIYON KE GULAAM BAN NE KO TEYAAR HO JAYO.. EK BECHARI SAADHVI KO ITNA TOOOL DE RAHE HEIN JO NIRDOSH HAI AUR YAHA MUMBAI MEIN ITNA BHAYANAK HAMLA HUA HAI NAAK KE NICHE...AUR HATH PE HATH DHAR KE MUSLIM KATTARPANTHIYON KO PUCHKAARO...!!!!!!!!!!, dr.raj (27/11/2008 00:50:40)
sadhvi ko faansi, afjal ko maafi rss pe pratibandh, simi se anubandh amarnath yaatra pe lagaam, haj ko anudaan fir bhi mera mahaan........ GANDHIJI KA SECULAR DESH KA SAPNA AAJ WO HOTE TO TOOT JATA AUR DEKHO GANDHIJI KI AATMA KAH RAHI HAI KI IS SE TO HINDUSTAN HINDU RAASHTRA HOTA..., ADVOCATE MAYANK (27/11/2008 00:55:43)
आखिर बिडम्बना देखिये कि देश में जेहाद के नाम पर इस्लाम और अल्लाह के नाम पर इस्लामी आतंकवादी मन्दिरों, संसद और बाजारों में आक्रमण करते हैं और निर्दोष हिन्दुओं का खून बहाते हैं और फिर सरकार इस्लामी आतंकवाद से लड्ने के स्थान पर हिन्दुओं को अपमानित, लाँक्षित और प्रताडित करती है।
इस विषम स्थिति का क्या करें कि दोनों ओर से हिन्दुओं को ही मरना है आतंकवादी आक्रमण मुसलमान करें, जेहाद वे करें, चिल्ला चिल्ला कर कहें कि हम इस्लाम और अल्लाह के नाम पर हिन्दुओं को मार रहे हैं तो मुस्लिम समाज को खुश करने के लिये और इस्लाम की छवि सुधारने के लिये हिन्दुओं को प्रताडित किया जाये।
ऐसा न्याय और आतंकवाद के विरुद्ध ऐसी लडाई विश्व के किसी कोने में न तो लडी गयी और न भविष्य में लडी जायेगी। , ganguteli (27/11/2008 02:29:38)
मालेगाव बम धमाको की जांच स्काटलैंड यार्ड और सीआईए से भी ज्यादा तेज़ काम करने वाले एटीएस की वो तेज़ी अब मुम्बई ब्लास्ट के लँदन मे पकडे गए आरोपी राहिल शेख से पूछ्ताछ मे दिखाई देती है या नही. देखेंगे कितनी बार नार्को टेस्ट कराया जाता है राहिल का और कितनी गिरफ्तारिया होंगी उसके बयान पर. और किस-किस राजनैतिक शख्स को गिरफ्तार करने या उससे पूछताछ करने की इज़ाज़त मांगती है अब एटीएस. , godfather (27/11/2008 16:26:58)
मुंबई में हुई आतंकी घटना हमारे मुंह पर एक तमाचा है। तमाचा उन पॉलिटिशियन्स के मुंह पर भी, जिन्होंने मालेगांव बम विस्फोट के आगे-पीछे के सारे दूसरे विस्फोटों को दरकिनार कर दिया था। तमाचा उन संगठनों पर जो साध्वी प्रकरण को लेकर ऐसी हाय-तौबा मचा रहे थे कि जैसे वे भूल गये हैं कि पिछले दो सालों में बड़े शहरों में हुए बम विस्फोटों में कितने लोग मारे गये। हिन्दू आतंकवाद के नाम का ढिंढोरा पीटकर जिस प्रकार संकुचित मानसिकता का परिचय दिया जा रहा था, उससे आम जनमानस हतप्रभ था और है। मुंबई, देश का इकोनॉमिक कैपिटल है। वहां आतंकी होटलों में तांडव मचाते हैं। खून की होली खेलते हैं और पुलिस की जीप को कब्जे में कर भागने की कोशिश करते हैं। हालात ऐसे बन गये हैं कि मुंबई में सेना को बुलाने की बात हो रही है। शमॆ, शमॆ, शमॆ... सिफॆ यही बात मुझे अपने इस तंत्र के लिए कहने को रह गयी है। देर रात डेढ़ बजे तक ६० लोगों की मौत की खबर थी। इन हालातों के बाद अब देश की केंद्र सरकार के पास जवाब देने के लिए कौन सी बात रह गयी है। मैं बेचैन हूं। मुंबई में एसीपी अशोक काम्टे और हेमंत करकरे की मौत की खबर थी। बताया जा रहा था कि कई एटीएस के अधिकारी भी इस आतंकी मुठभेड़ में घायल हुए हैं। ये सरकार और हमारे सुरक्षा तंत्र की विफलता है। ये सरकार जब मुंबई में सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकती है, तो पूरे देश की रक्षा की बात करना बेमानी है। आतंकवाद का कोई धमॆ नहीं होता। इसे इस सरकार को जान लेना चाहिए। सिफॆ हिन्दू आतंकवाद के नाम पर आतंकवाद की अन्य घटनाओं को नजरअंदाज कर देना ही सुरक्षा तंत्र को विफलता के घेरे में पहुंचाने के लिए काफी है। ये आतंकवाद सीमा पार से आया है या देश के अंदर से, इसे पहचान कर उसे खत्म करने की जरूरत है। इस बार होटलों और आम लोगों को खुलेआम निशाना बनाया गया है। आपका और हमारा मुंबई असुरक्षित हो गया है। इस मुंबई को सबसे बड़ा खतरा राजनीतिक उदासीनता से लग रहा है। राजनीतिक उदासीनता ऐसी है कि यहां के पॉलिटिशियन्स को सिफॆ और सिफॆ अपने स्वाथॆ नजर आता है। २६ नवंबर की रात आतंकियों ने पुलिस को अपाहिज कर दिया। मुंबई पुलिस कुछ नहीं कर सकी। अपने होनहार अफसरों को खो दिया। होटलों में लगातार धमाकों के बाद आतंकियों ने देश की आत्मा को झकझोरा है। , godfather (27/11/2008 16:28:56)