डूंगरपुर,२६ जुलाई/ जिले के प्रभारी एवं राजस्व विभागीय शासन सचिव प्रीतमसिंह ने समस्त अधिकारियों को निर्देश प्रदान किए है कि वे सरकार की योजनाओं व विभिन्न विकास कार्यों के परिणामों को सिर्फ आंकडों के आधार नहीं परखें, इसके लिए वे क्षेत्र का नियमित दौरा करें और प्रभावी व सतत् पर्यवेक्षण कर वास्तविक स्थिति से रूबरू हो।
सिंह गुरुवार को जिला परिषद सभागार में जिले के विभिन्न विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जनजाति अंचल में विकास कार्यों व सरकारी योजनाओं से आमजनों को लाभान्वित करने के लिए जरूरी है कि विभागीय अधिकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी गंभीरता बरतें। आरंभ में जिला कलक्टर नीरज के. पवन ने प्रभारी सचिव का स्वागत किया और विभिन्न विभागों की प्रगति और विकास कार्यों पर प्रकाश डाला। समीक्षा बैठक में प्रभारी सचिव ने उपस्थित तमाम जिला स्तरीय अधिकारियों से विभागीय गतिविधियों की प्रगति, लाभान्वितों और प्राप्त हो रही समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की और आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
रसद विभागीय समीक्षा दौरान उन्होंने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्यान्न आवंटन एवं वितरण के संबंध में जानकारी ली। जिला रसद अधिकारी गोपाल मोहन माथुर ने अवगत कराया गया कि राज्य सरकार द्वारा इस माह एपीएल परिवारों के लिए १०९३ क्विंटल खाद्यान्न उपलब्ध करवाया गया है जिसे २० किलो प्रति यूनिट दर से वितरित करने के लिए उप आवंटन कर दिया गया है। उन्होंने अन्नपूर्णा योजना के तहत तीन माह के लिए किए गए आवंटन के बारे में भी जानकारी दी। कलक्टर ने प्रभारी सचिव को बताया कि अन्नपूर्णा और अन्य योजनाओं में राशन वितरण के सबंध की पुष्टि ग्राम पंचायत मुख्यालय पर आयोजित चौपालों में की जा रही है और जिले में खाद्यान्न वितरण समय पर ही सुनिश्चित किया जा रहा है।
प्रभारी सचिव ने जिले में अन्नपूर्णा योजनान्तर्गत पात्र परिवारों की सूचियों की जांच करने और योजना के तहत वंचित पात्र लोगों की सर्वें करवा कर जानकारी संकलित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से जिले में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गतिविधियों एवं मौसमी बीमारियों के बारे में जानकारी ली और कहा कि वे चिकित्सकों को पाबन्द करें कि वे जैनरिक दवाईयों को ही लिखें ताकि गरीब रोगियों को राहत प्राप्त हो सके।
बैठक दौरान सागवाडा उपखण्ड अधिकारी बीएल मीणा द्वारा जिले में गत वर्ष लाखों रूपयों की अवधिपार माईक्रेान्यूट्रिऐन्ट दवाओं के व्यर्थ फैंके जाने के बारे में बारे में जानकारी देने पर प्रभारी सचिव ने कहा कि इसके लिए जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित के विरूद्ध कार्रवाई प्रस्तावित की जानी चाहिए।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.बीएल पारगी द्वारा डूंगरसारण के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन के घटिया निर्माण के बारे में जानकारी देने पर कलक्टर ने संबंधित उपखण्ड अधिकारी को जांच कर रिपोर्ट दने के निर्देश दिए।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभागीय समीक्षा दौरान प्रभारी सचिव ने शौचालय निर्माण के कार्यो की जानकारी चाही और निर्देश दिए कि उक्त कार्य निर्धारित समयावधि में पूरी गुणवत्ता के साथ पूर्ण करवाएं।
उन्होंने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रामनिवास से जिलें में चल रही राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के बारे में भी जानकारी प्राप्त की और दिशा निर्देश प्रदान किए। मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने अवगत कराया कि जिले में इस योजना के तहत १२२ करोड रुपए प्राप्त हुए है जिसमें २५ जुलाई तक ९१ प्रतिशत धनराशि व्यय की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि जिले में ५० हजार से अधिक व्यक्तियों ने अपने सौ दिन का कार्य पूर्ण कर लिया है।
प्रमुख शासन सचिव सिंह ने जिले में संचालित मिड-डे-मील योजना की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे किसी भी स्थिति में पुराने एवं सडे गले खाद्यान्न का वितरण एवं उपयोग नहीं करे। उन्होंने जिले के शिक्षा अधिकारियों से विद्यालयों में निर्मित किचन शेड के उपयोग के बारे में जानकारी चाही और ब्लाक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों में टीन शेड आदि उड जाने की स्थिति को तत्काल उसे संबंधित नोडल ऐजेसी से ठीक करवाएं ।
उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी (प्रा.शि.) शांतिलाल खराडी एवं सर्व शिक्षा अभियान के अधिकारियों को विद्यालयों में ड्रापआऊट होने वाले छात्रों की सूचि संधारित करने एवं चाईल्ड ट्रेकिंग सिस्टम को प्रभावी एवं कारगर बराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सूचियों को अद्यतन बनाते हुए इस पर नियमित नजर रखें।
उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी(मा.शि.) मनोज शर्मा से जिले के विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षा के संचालन के संबंध में जानकारी चाही और निर्देश दिए प्रतिस्पर्धा के युग में हम ज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र स्वयं अद्यतन रहें। उन्होंने सरकार द्वारा निःशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण कार्यक्रम के तहत पुस्तकों के शीघ्र वितरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने ‘‘ आपकी बेटी योजना ‘‘ के तहत स्वीकृत राशि समयानुसार वितरण करने के निर्देश दिए और कहा कि पन्नाधाय जीवन अमृत योजना के प्रस्ताव समय पर भेजे जावें।
प्रभारी सचिव ने निर्देश दिए कि वे जिले में मछलीपालन की संभावनाओं को तलाशे और ग्रामीणों को इस व्यवसाय से जुडने के लिए प्रेरित करें।
इस अवसर पर जिला कलक्टर नीरज के. पवन, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रामनिवास, जनजाति परियोजना अधिकारी टीआर जोशी, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.एल.राव, उपखण्ड अधिकारी गजेन्द्रसिंह राठौड, बीएल मीणा व अत्तरसिंह मेवला सहित तमाम जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।
बडा दायित्व है समाज कल्याण विभाग का
बैठक दौरान समाज कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं की अब तक की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए प्रभारी सचिव ने कहा कि पिछडे और अक्षम लोगों से जुडे समाज कल्याण विभाग का समाज के प्रति बडा दायित्व है ऐसे में वे प्रभावी रूप से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें। प्रभारी सचिव द्वारा विभाग के सहायक निदेशक केके शुक्ला से जिले के चिखली गांव में पेंशनर्स की संख्या के बारे में जानकारी चाहे जाने पर शुक्ला ने सूचना की अनुपलब्धता के बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि उनके पास इस प्रकार की अप-टू-डेट सूचना होनी चाहिए। उन्होंने शुक्ला को निर्देश दिए कि पेंशन योजना के तहत स्वीकृत पेंशन के वितरण को सत्यापित करने के साथ-साथ पेंशन रसीदों का भी सत्यापन सुनिश्चित करे । उन्होंने शुक्ला को क्षेत्र भ्रमण करने के निर्देश दिए और कहा कि इस माध्यम से वे विकलांग और अन्य योजनाओं के तहत लाभान्वितों की समस्याओं को चिन्हित करें व इन समस्याओं को कलक्टर को अवगत करावें ताकि इनका त्वरित निस्तारण हो सके।
एक लाख ८४ हजार बोतलें
विभागीय समीक्षा बैठक दौरान प्रभारी सचिव प्रीतमसिंह ने जिले में रोगियों को चढाई जाने वाली ग्लूकोस बोतलों के बारे में जानकारी चाही। सीएमएचओ डॉ.बीएल पारगी ने बताया कि जिले के अस्पतालों में गत वर्ष भर में एक लाख ८४ हजार बोतलें रोगियों को चढाई गई। इस पर प्रभारी सचिव ने आश्चर्य व्यक्त किया और इस सबंध में पीएमओ डॉ. जेहरा अब्बास से जानकारी चाही। उन्होंने बताया कि रोगियों की मानसिकता के कारण डॉक्टरों को बोतले चढानी पडती है। प्रभारी सचिव ने निर्देश प्रदान किए कि डाक्टर्स आम जनों को यह अवगत करावें कि रोगी को यदि मुंह से आहार देना संभव न हो और अत्यधिक कमजोरी आ जावें तभी बोतल का उपयोग किया जाना चाहिए अन्यथा इसका खर्च व्यर्थ होता है ।