बीकानेर,२६सितम्बर। दहेज उत्पीडन के पंजीकृत होने वाले मामलों की समीक्षा सहीतौर हो। दोषी व्यक्ति को सजा मिले परन्तु कानूनसम्मत। बेवहज परेशान करने वालों के विरूद्ध कार्यवाही और इसके लिए समाज को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए कानून की मदद की जाये।
यह विचार बुधवार को रानीबाजार स्थित गौड सदन में दहेज प्रतिषध सलाहाकार बोर्ड एवं श्रीनारी उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित ‘दहेज उत्पीडन के मामले में सच्चाई‘ विषयक गौष्ठी में उभरकर आये। दहेज प्रतिषेध बोडर् की सदस्य सुनीता गौड ने कहा कि जिले में गत् आठ माह में विभिन्न थानों में २३६ प्रकरण दर्ज हुए है,जो समाज के लिए चिन्ता विषय है। पुलिस जांच में १११ मामलों में एफ.आई.आर. लगी। इसे देखते हुए लगता है, कहीं न कही दहेज अधिनियम का दुरूउपयोग हो रहा है। सामाजिक संस्थाओं और प्रबुद्धजनों का दायित्व है कि ऐसी घटनाओं को होने ही न दे। बचपन से ही बच्चों को ऐसे संस्कार दिये जावे ताकि इस सामाजिक बुराई से दूर रह सके।
गोष्ठी में श्रीनारी उत्थान सेवा समिति की सुषमा सक्सैना ने कहा कि कहीं न कही महिलाएं दहेज प्रथा कानून का इस्तमाल व्यक्तिगत् रंजिसों के चलते करती है। कई बार छोटे-मोटे मनमुटाव दहेज की मांग का रूप धारण कर लेती है।उन्होंने कहा ऐसा भी देखा गया है जब दहेज का मामला दर्ज होता है, तो दोषी न होते हुए भी पूरा परिवार इसकी चपेट में आ जाता है। इसे रोकने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दोषी के विरूद्ध ही मामला दर्ज होना चाहिए। पुलिस को भी चाहिए की वह दूध-का दूध और पानी-का पानी करें।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए श्रीमती जया शर्मा ने कहा कि दहेज अधिनियम की जानकारी सभी महिलाओं को दी जानी चाहिए। स्कूलों एवं महाविद्यालयों में इसका व्यापक प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि समाजिक एवं प्रशासनिक स्तर पर दहेज प्रथा की कुरीतियों की ओर ध्यान आकर्षित करने की जरूरत है। उन्होंने झूठे मुकदमें दायर करने वालों के विरूद्ध कार्यवाही की आवश्यकता भी जताई।
इस अवसर पर उमा माथुर, संतोष चौधरी, लक्ष्मी वर्मा, कान्ता जोशी, विमला तंवर, सरिता गहलोत, उमा चौधरी ने भी विचार व्यक्त किये।