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| 23 November 2008 |
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‘‘संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या गतिविधियां कोष ‘‘ के ३० वें प्रतिवेदन- विश्व जनसंख्या स्थिति -२००७ में इस बार शहरी विकास को केन्द्र बिन्दु बताया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष २००८ में विश्व की ५० प्रतिशत आबादी शहरी हो जाएगी। इससे योजनाबद्ध शहरी विकास के क्षेत्र में कडी चुनौतियां सामने खडी होंगी। जयपुर, २७ जून। वर्ष २००८ में विश्व की आधी आबादी के ३.३ अरब लोग शहरी क्षेत्रों में रहने लगेंगे। वर्ष २०३० तक इस संख्या के ५ अरब होने की संभावना है। इन लोगों तक आधारभूत सुविधाएं पहुंचाना कठिन होगा। रिपोर्ट में कुल जनसंख्या की शहरी हिस्सेदारी में वृद्धि को अपरिहार्य बताते हुए आशा प्रकट की गई है कि यह वृद्धि सकारात्मक होगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष २०१५ तक अत्यन्त गरीबी को कम करने के लिए सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्य प्राप्ति की जंग, विश्व की कच्ची बस्तियों यानि ‘‘ स्लम्स‘‘ में लडी जाएगी। शहरी लोगों विशेषकर शहरी महिलाओं की स्थिति ग्रामीण गरीब लोगों की तुलना में बेहतर नहीं होती है। ऐसा खासकर एक लाख से कम आबादी वाले शहरों में ज्यादा देखा गया है। रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में गरीबी तेजी से बढ रही है। यहां एक अरब लोग कच्ची बस्तियों में रहते हैं और ऐसे शहरी क्षेत्र विकासशील देशों का लगभग १० प्रतिशत हिस्सा हैं। शहरी क्षेत्रों में युवाओं, महिलाओं और वृद्धों की स्थिति का आकलन करती यह रिपोर्ट विकास का लाभ इन वर्गों तक पहुंचाने पर जोर देती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरीकरण से होने वाले सकारात्मक परिवर्तन का लाभ सबको समान रूप से नहीं मिलता है जिससे गरीबी, असुरक्षा और निराशा को बढावा मिलता है। शहरीकरण से जुडी संभावनाओं और इसके वास्तविक लाभ की खाई को पाटने के लिए शहरी गरीब और गैर सरकारी संगठनों को मिलकर काम करना होगा। रिपोर्ट में एशिया, अफ्रीका और लेटिन अमेरिका आदि देशों की बढती जनसंख्या के खतरों से विशेष रूप से सचत किया गया है। इसमें बताया गया है कि कई बडे शहर और उनकी समग्र १३ प्रतिशत जनसंख्या समुद्र या नदियों के किनारे बसती है। तेजी से विकसित होते इन शहरों में लोग जलवायु परिवर्तन के खतरों से अपनी रक्षा करने की बजाय केवल आर्थिक विकास की ओर ध्यान दे रहे हैं। रिपोर्ट में भूमि आपूर्ति, भूमि के सामाजिक व सतत इस्तेमाल, अन्तर्राष्ट्रीय पर्यावरणीय परिवर्तन, नीति निर्धारण प्रक्रियाओं, जलवायु परिवर्तन, लिंग असमानता, आवास, भोजन, रोजगार आदि शहरीकरण से जुडे मुद्दों का विस्तार से विश्लेषण किया गया है।
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