जयपुर, २७ जुलाई। स्वतंत्रता सैनानी श्री मोहनलाल तेजावत का शुक्रवार को एम.बी.हॉस्पीटल उदयपुर में इलाज के दौरान निधन हो गया। नब्बे वर्षीय तेजावत का शुक्रवार दोपहर बाद राजकीय सम्मान से अशोकनगर स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। वे अपने पीछे तीन पुत्र एवं चार पुत्रियों का भरा- पूरा परिवार छोड गये हैं।
स्व. तेजावत क अंतिम दर्शनों के लिए बडी संख्या में लोग उनके निवास पर पहुंचे और शवयात्र में शामिल हुए। जिला प्रशासन एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में बंदूकों की सलामी के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि स्व. मोहनलाल तेजावत को ८ दिन पूर्व एम.बी.हॉस्पीटल में भर्ती कराया गया था। उन्हें सिर में खून का थक्का जम जाने से तकलीफ थी। कल रात तबीयत ज्यादा बिगडने पर उन्हें आईसीयू वार्ड में रखा गया। जहां शुक्रवार प्रातः ०७ बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। निधन के बाद में तेजावत के पार्थिव शरीर को उनके निवास मालदास स्ट्रीट स्थित मेहताजी की खिडकी ले जाया गया। यहां प्रशासन की ओर से जिला कलक्टर श्री शिखर अग्रवाल एवं जिला पुलिस अधीक्षक श्री गोविंद गुप्ता ने पुष्प चक्र चढाए तथा पुलिस बल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। दोपहर को शवयात्र रवाना हुई जिसमें कई गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
अशोकनगर स्थित शमशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें उनके ज्येष्ठ पुत्र श्री महेंद्र कुमार ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में नगरपरिषद सभापति श्री रविन्द्र श्रीमाली, पूर्व विधायक श्री त्रिलोक पूर्बिया, समाजसेवी श्री रामचंद्र मेनारिया, डा.मधुसूदन शर्मा, श्री देवेन्द्रसिंह शक्तावत, पार्षद श्री अनिल मेहता सहित कई लोग शामिल हुए तथा श्री तेजावत के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किये। जीवन परिचय- श्री मोहनलाल तेजावत का जन्म १३ जुलाई १९१८ ई.को झाडोल में हुआ। पिता श्री मोतीलाल तेजावत भीलों के एकछत्र क्रांतिकारी नेता थे। श्री मोहनलाल तेजावत को संघर्ष भावना विरासत में मिली। सन् १९४२ में श्री माणिक्यलाल वर्मा से मिलन हुआ। उन्हें गिरफतार कर लिया गया। नौ अगस्त १९४२ को करो या मरो का आह्वान हुआ। अंग्रेजों भारत छोडो आन्दोलन शुरु हो गया। मेवाड दरबार को प्रजामण्डल नेताओं ने २१ अगस्त १९४२ को अंग्रेजों से सम्बन्ध विच्छेद का ज्ञापन दिया गया। बाईस अगस्त १९४२ को उदयपुर में हडताल हो गई और श्री मोहनलाल तेजावत मंडी की नाल में तीन साथियों सहित गिरफतार कर लिए गए। उन्हें सेन्ट्रल जेल में रखा गया। पिता श्री मोतीलाल तेजावत भी गिरफतार कर लिये गये व ६ माह की सजा हो गई। उदयपुर से ईसवाल जेल में वें ३० आदमियों के साथ कैद में रहे। १४ फरवरी १९४३ को जेल से छोडा गया। जेल से मुक्त होने पर देश की आजादी के आन्दोलन में पुनः लग गये। बाद में वे खादी आंदोलन को समर्पित रहे।