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| RSS | 23 November 2009 |
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जयपुर। कारागार राज्यमंत्री रामकिशोर सैनी ने सोमवार को राज्य विधानसभा में घोषणा की कि राज्य में सुरक्षा प्रहरियों की कमी को दूर करने के लिए इस वर्ष 250 प्रहरियों की भर्ती की जाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा कारागार विभाग में प्रहरियों एवं मुख्य प्रहरियों का मैस भत्ता 725 से बढाकर 775 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। सैनी आज सदन में कारागार विभाग की अनुदान मांगों पर हुई बहस का उत्तर दे रहे थे। कारागार राज्यमंत्री के उत्तर के बाद सदन ने 2009-10 के लिए 72 करोड 45 लाख 46 हजार रुपये की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दीं। उन्होंने बताया कि राज्य के कारागारों में बंदियों के कल्याणार्थ प्रशिक्षण एवं विविध प्रकार के कार्यक्रमों तथा गतिविधियों के आयोजन के लिए स्थापित बंदी कल्याण कोष के अनुदान को इस वर्ष 5 लाख से बढाकर 10 लाख रुपये किया गया है। कारागार राज्यमंत्री ने बताया कि कारागार विभाग के कर्मियों के गम्भीर तथा लम्बी बीमारी के इलाज के लिए आर्थिक सहायता अथवा ऋण तथा उनके बच्चों को छात्रवृत्ति जैसे कार्यों के लिए स्थापित कर्मचारी कल्याण निधि के अनुदान को भी इस वर्ष 5 लाख से बढाकर 10 लाख रुपये किया गया है। इसी प्रकार कारागार कर्मियों के उत्साहवर्धन, मनोरंजन एवं विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए साधन सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पुलिस विभाग की तरह उन्हें भी इस वर्ष 5 लाख रुपए स्पोर्ट्स फण्ड के रूप में दिए जाएंगे। सैनी बताया कि पुलिस विभाग की तरह ही कारागार कर्मियों को इस वर्ष संस्थागत उत्सव आदि के लिए उत्सव फण्ड में भी 5 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। सैनी ने बताया कि जेल आधुनिकीकरण के द्वितीय चरण के लिए राज्य सरकार ने गृह मंत्रालय भारत सरकार को 465 करोड 58 लाख रुपये के प्रस्ताव भेजे हैं, जो विचाराधीन हैं। उन्होंने बताया कि मोबाइल के उपयोग पर रोक लगाने के लिए प्रथम चरण में राज्य की सभी 8 केन्द्रीय कारागारों में सेल्यूलर जैमर लगवाए जाएंगे। उन्होंने जानकारी दी कि जोधपुर केन्द्रीय कारागृह में 8 सेल्यूलर जैमर लगाए जा रहे हैं। इसी प्रकार जेलों में अनाधिकृत वस्तुओं की पहुंच पर रोक लगाने एवं बंदियों के आपसी झगडों की रोकथाम के लिए सभी केन्द्रीय कारागारों में सुरक्षा एवं तकनीकी उपकरण जैसे 33 कम्प्यूटर, 33 वैब कैमरा एवं डोर फ्रेम व हैण्ड मैटल डिटेक्टर उपलब्ध कराए गए हैं। कारागार राज्यमंत्री ने बताया कि राज्य में विभिन्न बंदी सुधार एवं कल्याणकारी कार्यक्रमों से कदियों को जोडा जा रहा है। साथ ही बंदियों को जेलों में कम्प्यूटर प्रशिक्षण एवं विभिन्न व्यवसाय जैसे दरी, निवार, कपडा बुनाई, सिलाई कार्य, कारपेन्टरी, होजरी व लौहारी कार्य सिखाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अजमेर जेल में दो वर्षीय फिटर एवं एक वर्षीय डीजल मैकेनिक का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने निरक्षर बंदियों के लिए साक्षरता कार्यक्रम, उच्च शिक्षा के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं एवं आध्यात्मिक उन्नयन व विवेक जागरण के लिए विशेष आयोजनों की भी जानकारी दी। सैनी ने बताया कि राज्य में वर्तमान में कारागार विभाग की 108 जेलें कार्य कर रही हैं, जिनमें 8 केन्द्रीय कारागृह, 3 जिला ए-श्रेणी कारागृह, 22 जिला बी-श्रेणी कारागृह, 59 उपकारागृह, 2 बंदी महिला सुधार गृह, एक किशोर बंदी सुधार गृह एवं 13 बंदी खुला शिविर सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त एक जेल प्रशिक्षण संस्था भी संचालित है।
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