बीकानेर, लोक कला, साहित्य और संस्कृति को समर्पित ”मरु परम्परा, बीकानेर” और इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल के सह-आयोजन में दिनांक 19 सितम्बर से प्रारम्भ दव दिवसीय “सिणगार” कला शिविर में सहभागी कलाकारों द्वारा बीकानेर की पारम्परिक उस्ता कला, मथेरण कला, और काष्ठ कला में तैयार विभिन्न मन-मोहक और अनुठी कला-कृतियों की प्रर्दशनी रविवार 28 सितम्बर से स्थानीय मारूति व्यायाम मंदिन में प्रारम्भ की जाएगी। इस अद्वितीय प्रदर्शनी का शुभारम्भ प्रात 10:30 बजे सुप्रसिद्ध कलाकार सन्नू हर्ष के सान्निध्य में कलाकार मुरलीमनोहर के. माथुर करेंगे।
मरु परम्परा के निदेशक डॉ श्रीलाल मोहता ने बताया कि ”सिणगार“ कला के इस 10 दिवसिय शिविर मे उस्ता, मथेरण एवं काष्ठ कलाकरों ने कई नायाब कृतियां तैयार की है। इन कलाकृतियों मे जहां उस्ता कला की स्वर्णकारीगरी से तैयार ऊष्ट्र खाल-कूपी पर नक्काशी, शाही आईना, टेबल लेम्प, झरोखे, शाही सिनेरी आदी है वहीं मथेरण कला मे बागवाडी, पंथेवाडी, आकाशदीप, दीपावली पूजन लक्ष्मी पाने, मायाजी, पारम्परिक गवर-भाईया, इशर, बाणिक पाटी, मथेरण पाटी, पारम्परिक चन्दा, फड चित्रकारी आदी की है व काष्ठकला की कृतियों मे कलात्मक ऊंट शामिल है।
एक ही छत के नीचे इन नायाब बीकानेरी कलाओं की मनमोहक कारीगरी ने विशिष्ठ मेहमानों के साथ हर आगन्तुक का मन मोह लिया।
इस अनुठे “सिणगार” शिविर का अवलोकन देश के प्रख्यात चिंतक व साहित्यकार डॉ.नन्द किशोर आचार्य, देश के जाने माने प्रकाशक दीपचन्द साँखला, बिन्नाणी कन्या महाविद्यालय के प्राध्यापक व छात्राओं, विशिष्ठ व्यक्तित्वों, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों सहित विद्यार्थिगणों ने कारीगरी का अवलोकन करते हुए इस कार्य को बेजोड व उल्लेखनीय बताया।