जयपुर, २७ नवम्बर। वन, पर्यावरण एवं खान मंत्री श्री लक्ष्मीनारायण दवे ने खान अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि अगले माह लगने वाले शिविरों के दौरान बकाया प्रकरणों के निपटारे के साथ यह सुनिश्चित करें कि विभागीय गतिविधियों के प्रति लोगों के विश्वास में अभिवृद्धि हो।
श्री दवे मंगलवार को यहां आर.एस.एम.एम.लि. के विश्राम गृह में खान एवं भू-विज्ञान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। प्रदेश में खान विभाग की ओर से ३ से २८ दिसम्बर तक आयोजित शिविरों के संबंध में हुई बैठक में तैयारियों का जायजा लिया गया।
खान मंत्री ने कहा कि अधिकारी इन शिविरों को चुनौती के रूप में लें और अधिक से अधिक लोगों को जोडकर ऐसा आभास करायें कि विभाग आमजन के हित में काम कर रहा है। उन्होंने शिविरों के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों को जोडने की आवश्यकता पर जोर दिया।
खान विभाग से संबंधित बकाया प्रकरणों के निपटारे के लिए लगाये जा रहे इन शिविरों में रिक्त स्थानों की जानकारी देने के साथ ही प्रधान एवं अप्रधान खनिजों की माइनिंग लीज एवं क्वेरी लाइसेंस के बकाया प्रकरणों को निपटाया जायेगा। इसके अलावा वन, राजस्व तथा पर्यावरण विभाग से जुडे प्रकरणों को भी शिविरों में निपटाया जायेगा।
खान सचिव डॉ. अशोक सिंघवी ने शिविर को गंभीरता से लेने के निर्देश देते हुए कहा कि संबंधित क्षेत्र की प्रमुख सूचनाओं का शिविर में प्रदर्शन किया जाना चाहिये। उन्होंने साफ किया कि बकाया प्रकरण निपटाने में जिम्मेदारी को एक दूसरे पर टालने की प्रवृत्ति नहीं होनी चाहिये।
डॉ. सिंघवी ने बैठक में बताया कि अगले साल तक विभाग का कम्प्यूटराइजेशन होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि शिविर के दौरान बकाया प्रकरणों के निपटारे के साथ ही राजस्व आय वृद्धि पर भी विशेष ध्यान दिया जाये। उन्होंने बताया कि व्यवहारिक समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र ही नीतिगत निर्णय लिये जा रहे हैं।
बैठक में डीग एवं कामां क्षेत्र से विस्थापित खनन पट्टाधारकों के अन्यत्र पुनर्वास, बापी पट्टे धारियों की समस्या, प्रधान एवं अप्रधान खनन पट्टों से जुडी विभिन्न समस्याओं सहित विभागीय कार्यप्रणाली में सरलता और पारदर्शिता लाने के मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
अतिरिक्त निदेशक खान एवं भूगर्भ विभाग श्री एम. सी. गोयल ने बताया एक अप्रेल २००७ तक विभाग में ७३ हजार २३७ प्रकरण बकाया थे जबकि ३१ अक्टूबर तक ७ हजार ६८ नये आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से ४२ हजार ४०९ प्रकरणों का निस्तारण कर दिया गया है। शेष लंबित प्रकरणों में ७५० प्रधान खनिज के हैं जबकि अप्रधान खनिजों के बकाया प्रकरणों में १० हजार ८८१ माइनिंग लीज तथा १९ हजार २८३ क्वेरी लाइसेंस के हैं।