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| 07 September 2008 |
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हनुमानगढ , २८ जून। राज्य सरकार के राजस्व विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजन के लिए भू आवंटन) नियम १९७० के विभिन्न नियमों में संशोधन किया है। जिला कलेक्टर श्रीमती मुग्धा सिन्हा ने बताया कि नियम १८ में संशोधित प्रावधान के अनुसार ऐसी भूम जो आवंटन के समय एक्ट की धारा ९० बी के अनुसार शहरी क्षेत्र की परिधि में सम्मिलित नही थी तथा उसे बाद में इस परिधि में शामिल किया जाता है तो ऐसी भूमि के लिए खातेदारी अधिकार जारी करने से पूर्व राज्य सरकार से अनुमति प्राप्त करना आवश्यक होगा। साथ ही शहर क्षेत्र की सीमा में बाद में सम्मिलित की गई भूमि के खातेदारी अधिकार के लिए उस भूमि के बाजार भाव की २० प्रतिशत राशि भी जमा की जाएगी। इस बाजार दर का निर्धारण क्षेत्र के अनुसार जिला स्तरीय कमेटी द्वारा किया जाएगा। नियम दो में संशोधन के बाद बनाए गए नए नियमों के अनुसार जिला स्तरीय समिति का आशय उस समिति से होगा जिसका गठन राज्य सरकार द्वारा राजस्थान स्टम्प नियम २००४ के प्रावधानों के अनुसार समय-समय पर किया जाता हैं। इसी प्रकार नगर निकाय बोर्ड की सीमाओं में बाद में सम्मिलित की गई ऐसी भूमियों के खातेदारी अधिकार जारी करने से पूर्व सम्भागीय आयुक्त की स्वीकृति तथा जिला स्तरीय कमेटी द्वारा निर्धारित बाजार दर की दस प्रतिशत की राशि जमा कराना आवश्यक होगा। जिला कलेक्टर ने बताया कि राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार राजस्थान भू राजस्व नियम, १९५६ के नियम २० में भी उप नियम (३) को समाहित किया गया है। इसके अनुसार ऐसी भूमियां जिनका आवंटन सहकारी समितियों को किया गया था और इस संस्थाओं ने उस भूमि को अपने सदस्यों को काश्त के लिए दे दिया है तथा यह भूमि राजस्थान (सहकारी समितियों के लिए भू आवंटन) नियम १९५९ में पुनः शामिल होती है तो सहालकार समिति की सलाह पर उसका उस भूमि या उसके भाग का आवंटन नियम व शर्तो के आधार पर किया जा सकता है। इसके लिए सहकारी समिति के सदस्य या उसके उत्तराधिकारी का भूमिहीन होना, उसका सोसाईटी द्वारा दी गई जमीन पर कब्जा होना और उस पर स्वयं द्वारा काश्त कर रहा होना जरूरी है। इसके लिए जिला स्तरीय कमेटी द्वारा निर्धारित बाजार दर की ५ प्रतिशत राशि जमा करना आवश्यक है । लेकिन इस संदर्भ में अनुसूचित जाति, जनजाति अन्य पिछडा वर्ग तथा बीपीएल परिवार के व्यक्तियों से कोई शुल्क नही लिया जाएगा। यदि ऐसी भूमि भी आवंटन के समय एक्ट की धारा ९० बी के अनुसार शहरी क्षेत्र की परिधि में सम्मिलित नही है और बाद में नगर निकायों की सीमा( जयपुर विकास प्राधिकरण, नगर विकास न्यास या नगरपालिका ) की सीमा में सम्मिलित की जाती है तो खातेदारी आधिकार जारी करने के लिए राज्य सरकार की पूर्व अनुमति और जिला स्तरीय कमेटी द्वारा निर्धारित बाजार दर की २० प्रतिशत राशि को जमा करना जरूरी होगा। यदि यह भूमि नगर निकाय बोर्ड की परिधि में बाद में शामिल की जाती है तो खातेदारी अधिकार के लिए सम्भागीय आयुक्त की स्वीकृति तथा जिला स्तरीय कमेटी द्वारा निर्धारित बाजार दर की दस प्रतिशत की राशि जमा कराना आवश्यक होगा।
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