बांसवाडा। बांसवाडा जिले की नवगठित गढी विधानसभा क्षेत्र की पहली महिला आदिवासी विधायक कांता गरासिया ने दक्षिणी राजस्थान के जनजाति उपयोजना क्षेत्र (टाडा) में राजकीय सेवाओं में भर्ती के लिए साढे बारह प्रतिशत की वर्तमान व्यवस्था में से साढे पांच पतिशत उप आरक्षण की विशेष व्यवस्था करते हुए इसका लाभ टाडा क्षेत्र के आदिवासी अभ्यार्थियों को देने की मांग की है। उन्होंने अपने एक बयान में कहा है कि आरक्षण की इस व्यवस्था में संशोधन होने पर टाडा क्षेत्र के लोगों के लिए भी प्रशासनिक एवं अन्य सेवाओं में जाने का मार्ग खुलेगा। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद टाडा क्षेत्र से एकमात्र आई.ए.एस. हुआ हैं और वह भी आर.ए.एस. से पदोन्नित से बना है। उन्होंने बताया कि जनजाति उपयोजना क्षेत्र टाडा, माडा, सहरिया आदि क्षेत्रों में बिखरा हुआ और विभाजित है। राज्य के सम्पूर्ण जनजाति क्षेत्र की लगभग आधी जनसंख्या टाडा क्षेत्र में है। जनजाति क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम का मूल उद्देश्य आदिवासियों का सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिणक उन्नयन और संर्वागीण विकास करना है। यह विकास शिक्षा के विस्तार और कृषि पर आधारित उनकी आजीविका के लिए सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के बिना नहीं हो सकता । उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र गढी में महाविद्यालय खोलने की मांग के साथ ही माही बजाज सागर बांध का पानी पूरे टाडा क्षेत्र में सिंचाई के लिए उपलब्ध करवाने के लिए नहरों का नेटवर्क विकसित करने की मांग भी की, ताकि इस क्षेत्र में कृषि और उससे सम्बंधित व्यवसाय पनप सके। इसी प्रकार माही के पानी से पैदा होने वाली बिजली का लाभ सम्पूर्ण आदिवासी क्षेत्र की जनता को मिले, यह सुनिश्चत करने पर जोर दिया । गरासिया ने जनजाति उपयोजना क्षेत्र के विकास के लिए महाराष्ट्र पैटर्न पर राज्य बजट में 100 करोड रु. का प्रावधान रखे जाने के लिए गहलोत के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही मांग की कि राज्य के सम्पूर्ण बजट को जनजाति उपयोजना क्षेत्र की जनसंख्या के अनुपात में आंबटित किया जाना चाहिए। गरासिया ने बताया कि राज्य विधानसभा म बजट पश्चात् हुई बहस में भाग लेते हुए उन्होंने इन सभी बातों को उठाया है। साथ ही जनजाति क्षेत्र में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने के लिए उपयोजना क्षेत्र में पूर्ण शराबबंदी करने का सुझाव भी दिया है।