राजसमन्द, २७ सितम्बर। राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री ओंकारसिंह लखावत ने कहा है कि दुनिया में ऐतिहासिक धरोहर एवं सम्पदा भारत में तथा सबसे अधिक राजस्थान में उपलब्ध है, इनके पुरातात्विक महत्व को समझते हुए इनका संरक्षण करना हम सभी का परम दायित्व है।
उक्त विचार गुरूवार को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री लखावत ने जिला राजसमन्द के कलक्ट्रेट सभागार में उनके सानिध्य में आयोजित जिला पर्यटन विकास स्थायी समिति की बैठक में व्यक्त किए।
श्री लखावत ने निर्देश दिए कि जिले की धरोहरों की ओर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इन धरोहरों तक आवागमन के प्रबन्ध की व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता प्रतिपादित की।
उन्होंने कहा कि इन स्थलों तक पहचने के लिए आधे दिन, एक व दो दिन भ्रमण नियमित रूप से हो सके इसके लिए सर्किट बनाने के लिए समिति को निर्देश दिए। जिले में स्थानीय पर्यटन सर्किट बनाने के लिए जिला स्तर पर समिति का गठन किया गया है। जिसमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री गुमानसिंह बारठ, महाराणा प्रताप म्यूज्यिम हल्दीघाटी के संस्थापक श्री मोहन श्रीमाली, श्री नारायण लाल उपाध्याय एवं जिला परिवहन अधिकारी सम्मिलित किए गए हैं। यह समिति पुरातत्व विभाग वाले पर्यटन स्थलों का चयन करेगी तथा एक पखवाडे में पर्यटन सर्किट तय कर अपने सुझावों की जिला कलक्टर को रिपोर्ट पेंश करेगी। इसके पश्चात राज्य सरकार द्वारा इसकी समीक्षा की जाकर सर्किट को अंतिम रूप दिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त पुरातत्व एवं पर्यटन स्थलों के नए प्रस्तावों के चयन के लिए तीन सदस्यों की एक समिति का गठन किया गया है जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, उप वन संरक्षक तथा उपखण्ड अधिकारी राजसमन्द शामिल है।
श्री लखावत ने कहा कि जिले की धरोहरों के संरक्षण एवं देखरेख के साथ इनको राष्ट्रीय मानचित्र पर लाया जाना चाहिए। उन्होंने सभी का आह्वान किया कि वे राष्ट्रीय धरोहर को अपना पारिवारिक हिस्सा मानते हुए इनके संरक्षण के लिए आगे आए और धरोहरों के पुरातात्विकता के महत्व को समझे।
उन्होंने कहा कि सार्थक परिणाम आने पर राजसमन्द पर्यटन के क्षेत्र में और उभरकर सामने आएगा। राजसमन्द मुख्यालय पर स्थित राजमहल पर एक संग्रहालय बनाने के साथ ही पुस्तकालय एवं कलादीर्घा कार्य के लिए समिति के अनुरोध पर राजसमन्द विधायक बंशीलाल खटीक ने विधायक मद से १० लाख रूपये देने की घोषणा की।
बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णयानुसार भारत की आजादी के लिए १८५७ के प्रथम आन्दोलन में जिले की नाथद्वारा तहसील के कोठारिया गांव की अह्म भूमिका रहने पर इस गांव में एक स्मारक बनेगा। स्मारक समिति की सहमति से तैयार किया जाएगा तथा इसका व्यय प्राधिकरण की ओर से किया जाएगा।
श्री लखावत ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि क्षेत्रीय स्तर पर पुरातात्विक महत्व की जानकारी आमजन को मिल सके इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर तथा वहंा के विद्यालयों में जिले की धरोहरों के सूचना बोर्ड आवश्यक रूप से लगाए जाए।
उन्होंने कहा कि राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण द्वारा राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर एवं विरासत के संरक्षण, संवर्धन एवं बिसरती निधी को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। पर्यटन की दृष्टि से राजसमन्द जिला महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जिले से ४४ पर्यटन स्थल चिन्हित करने के प्रस्ताव पर्यटन आयुक्त को भिजवाए गए हैं।
बैठक में जिले में राजकीय स्वामित्व वाले महत्वपूर्ण ऐसे स्मारक,दुर्ग एवं बावडयों इत्यादि को संरक्षित करने के लिए उपखण्ड अधिकारियों से प्राप्त सूचियों, तीर्थ स्थलों, प्राकृतिक स्थलों एवं झीलों के संरक्षण एवं विकास पर चर्चा की गईर्।
जिले में घूमने एवं ठहरने वाले देशी-विदेशी पर्यटको की सांख्यिकी विवरणिका पर आयुक्तों एवं उपखण्ड अधिकारियों से विचार विमर्श किया गया साथ ही जिले के पर्यटकीय विकास पर समिति के महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त किए तथा विश्व पर्यटन दिवस पर जिले में महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों पर जनसहभागिता से विभिन्न आयोजन करने पर भी विचार विमर्श किया गया।
बैठक में जिला कलक्टर श्री आनन्द कुमार ने बताया कि कुम्भलगढ फेस्टीवेल एवं हल्दीघाटी में अश्व मेलों का आयोजन तथा महाराणा प्रताप राष्ट्रीय स्मारक को भूमि का आंवटन किया है। उन्होंने बताया कि सभी के सामूहिक प्रयासों से हल्दीघाटी स्मारक एवं अश्व मेला पर्यटन की दृष्टि से उभर कर सामने आया है।
उन्होंने बताया कि राजसमन्द झील में नौकायान के लिए ६ नावों की व्यवस्था की गई है। इस अवसर पर जिला कलक्टर ने श्री लखावत को आश्वस्त किया कि पुरातात्विक विभाग के धरोहरों का पूर्ण संरक्षण हो इस ओर विशेष ध्यान दिया जाएगा तथा नए स्थलों का भी चिन्हिकरण कर उन्हे भी पर्यटन से जोडा जाएगा।
इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक श्री बंशीलाल खटीक, नगरपालिकाध्यक्ष श्री अशोक रांका, पूर्व जिला प्रमुख श्री हरिओमसिंह राठौड, पूर्वपालिकाध्यक्ष श्री महेश पालीवाल, उप जिला प्रमुख श्री नन्दलाल सिंघवी, संस्थापक महाराणा प्रताप म्यूजियम हल्दीघाटी श्री मोहन श्रीमाली, उपखण्ड अधिकारी श्री राजेन्द्रसिंह कविया, उप वन संरक्षक, जिला उद्योग केन्द्र की महाप्रबन्धक, मुख्य आयोजना अधिकारी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के प्रतिनिधि श्री वी.उपल्ल, प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अम्बरीश मेहता, शिक्षा सहित सम्बद्ध विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।