विशेष बाल श्रमिक विद्यालयों से ५० हजार बालकों को शिक्षा
28 Dec
2007 राजस्थान के २९ जिलों में राष्ट्रीय बाल श्रमिक परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन बाल श्रमिक परियोजनाओं के माध्यम से एक हजार से अधिक विशेष बाल श्रमिक विद्यालय चलाए जा रहे हैं।
जयपुर,२८ दिसम्बर, २००७ राजस्थान के २९ जिलों में राष्ट्रीय बाल श्रमिक परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन बाल श्रमिक परियोजनाओं के माध्यम से एक हजार से अधिक विशेष बाल श्रमिक विद्यालय चलाए जा रहे हैं। इन विद्यालयों में ५० हजार से अधिक काम से छुडाए गये बाल श्रमिकों को पुनर्वासित एवं शिक्षित किया जा रहा है।
बाल श्रमिक परियोजनाओं के माध्यम से संचालित इन विशेष बाल श्रमिक विद्यालयों में ८ से १४ वर्ष आयु के बाल श्रमिकों को पाँचवी कक्षा तक निःशुल्क शिक्षा दी जाती है। इन बाल श्रमिकों को व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इस दौरान पूरक आय के रूप में प्रतिमाह १०० रुपये का स्टाईफण्ड दिया जाता है। बालकों के अध्ययनकाल में ५ रुपये प्रति छात्र प्रतिदिन पूरक पोषाहार दिया जाता है। बाल श्रमिकों को स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा एवं चिकित्सा सुविधा भी मुहैया कराई जाती है। प्रत्येक विद्यार्थी को पांच साल तक की शिक्षा तीन वर्ष के भीतर प्रदान कर तत्पश्चात कक्षा छः में राजकीय विद्यालयों में प्रवेश दिला कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोडा जा रहा है।
इसी तरह योजना के अन्तर्गत प्रत्येक जिले में एक बाल श्रमिक परियोजना संस्था का जिला कलक्टर की अध्यक्षता में पंजीकरण कराया गया है। परियोजना संस्था द्वारा स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से विशेष बाल श्रमिक विद्यालय चलाए जाते हैं। परियोजना का मुख्य उद्देश्य जोखिमपूर्ण व्यवसाय एवं प्रक्रियाओं में कार्यरत बाल श्रमिकों को मुक्त कराकर उन्हें शिक्षा के माध्यम से पुनर्वास कर समाज की मुख्यधारा से जोडना है।
राजस्थान में गलीचा निर्माण, बीडी बनाना, नगीना घिसाई व कटाई, ईंट-भट्टे, ऑटो मोबाइल वर्कशाप, भवन निर्माण एवं निर्माण कार्य, होटल एवं ढाबों पर कार्य, कचरा बीनना एवं कृषि व पशुपालन में बाल श्रमिकों के नियोजन को बाल श्रम अधिनियम १९८६ के तहत प्रतिबन्धित किया गया है। इन कार्यों में बाल श्रमिकों के नियोजित होने की सूचना पर श्रम विभाग त्वरित कार्य कर बाल श्रमिकों को छुडवाता है तथा उनके पुनर्वास एवं शिक्षा के लिए इन्हें विशेष बाल श्रमिक विद्यालयों में दाखिला दिलाकर शिक्षित एवं आत्मनिर्भर बनाने का नायाब काम कर रहा है।