मानसिक रूप से विकलांग असहाय व विक्षिप्त स्थिति में घूमने वाले व्यक्ति
28 Dec
2007 जिले में मानसिक रूप से विकलांग असहाय व विक्षिप्त स्थिति में विभिन्न स्थानों पर घूमने वाले व्यक्तियों के ईलाज एवं पुनर्वास के लिए जिला मजिस्ट्रेट व जिला कलक्टर श्रीमती मुग्धा सिन्हा ने एक आदेश जारी कर सभी उपखण्डों में एक कमेटी का गठन किया है।
हनुमानगढ २८ दिसम्बर। जिले में मानसिक रूप से विकलांग असहाय व विक्षिप्त स्थिति में विभिन्न स्थानों पर घूमने वाले व्यक्तियों के ईलाज एवं पुनर्वास के लिए जिला मजिस्ट्रेट व जिला कलक्टर श्रीमती मुग्धा सिन्हा ने एक आदेश जारी कर सभी उपखण्डों में एक कमेटी का गठन किया है।
जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि इण्डियन मैंटल एक्ट १९८७ के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए जिले में पाये जाने वाले मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों के लिए सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये गए है। उन्होंने बताया कि जिले में प्रत्येक उपखण्ड स्तर पर मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति की पहचान एवं उसकी उचित व्यवस्था के लिए गठित कमेटी में सम्बंधित उपखण्ड मजिस्ट्रेट, सम्बंधित पंचायत समिति के विकास अधिकारी या सम्बंधित नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी, सम्बंधित क्षेत्र के पुलिस अधिकारी तथा उस क्षेत्र की गैर सरकारी संस्था को शामिल होंगे।
जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति की सूचना प्राप्त होने पर यह कमेटी तत्काल कार्यवाही करेगी।उक्त कमेटी की नियमित रूप से समीक्षा बैठक प्रत्येक माह आयोजित की जाएगी तथा किसी भी क्षेत्र में मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति पाया जाता है तो कमेटी द्वारा इण्डियन मैंटल एक्ट १९८७ के तहत कार्यवाही सम्पादित की जायेगी। साथ ही जिन व्यक्तियों को मानसिक विकलांगता के आधार पर पेन्शन देय होगी, उनका प्रकरण तैयार कर सक्षम अधिकारी को त्वरित गति से प्रस्तुत करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट ने कमेटी को पाबंद किया है।
जिला स्तर पर भी व्यवस्था
इस सम्बंध में जिला स्तर पर भी व्यवस्थाए की गई है। इसकी जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों की स्थिति तथा इस सम्बंध में की जा रही कार्यवाही की नियमित समीक्षा पैरोल सलाहकार समिति की बैठक में की जायेगी।
इण्डियन मैंटल हैल्थ एक्ट १९८७ की विभिन्न धाराओं में प्रावधान
जिला मजिस्ट्रेट श्रीमती मुग्धा सिन्हा ने बताया कि मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों के लिए इण्डियन मैंटल हैल्थ एक्ट १९८७ की विभिन्न धाराओं में प्रावधान हैं। उन्होंने बताया कि इस एक्ट के तहत मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों को अस्पताल अथवा नर्सिंग होम में भिजवाने जाने की व्यवस्था होनी चाहिए। एक्ट की प्रमुख धाराओं के बारें में जानकारी देते हुए जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि इस अधिनियम की धारा १६ व १९ के तहत कोई भी मरीज स्वयं, उसके माता पिता या रिश्तेदार मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को चिकित्सालय अथवा नर्सिंग होम में भर्ती कराने के लिए रिसैप्शन ऑर्डर के लिए सीजेएम अथवा उपखण्ड मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
धारा २३ के तहत पुलिस अधिकारी अपने क्षेत्र में मानसिक रूप से बीमार पाये जाने वाले व्यक्तियों को उपखण्डाधिकारी अथवा सीजेएम के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। धारा २५ के तहत पुलिस अथवा किसी भी व्यक्ति को इस आशय की पुष्टि हो जाने पर कि मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों की उचित रूप से देखभाल नहीं की जा रही है तो उसकी रिपोर्ट सम्बन्धित उपखण्ड मजिस्ट्रेट या सीजेएम के यहां प्रस्तुत कर सकते हैं। इस प्रकार से प्रस्तुत व्यक्तियों के सम्बन्ध में उपखण्ड मजिस्ट्रेट विधिवत आदेश पारित कर मरीज को अस्पताल में भिजवाने तथा उसके परिजनों को खर्च वहन करने का आदेश दे सकता है। यदि मजिस्ट्रेट यह महसूस करता है कि बीमार व्यक्ति का खर्च वहन करने के लिए कोई जिम्मेदार व्यक्ति नहीं है तो राजकीय लागत पर भी ईलाज के आदेश दे सकता है। इसके लिए भी इण्डियन मैंटल हैल्थ एक्ट १९८७ में प्रावधान किए गए है।