औषधीय पौधों पर केन्दिरत दो दिवसीय प्रदर्शनी ने मन मोहा - मास्टर सूरजमल
28 Dec
2007 दो दिवसीय प्रदर्शनी का समापन गुरुवार रात आयोजित समारोह में वयोवृद्ध स्वतन्त्रता सेनानी मास्टर सूरजमल ने पोस्टर हटा कर किया।
बांसवाडा, २८ दिसम्बर/राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय, उदयपुर के भूगोल व्याख्याता डॉ. लक्ष्मीलाल सालवी की ओर से सूचना एवं जन सम्फ कार्यालय के सहयोग से बांसवाडा सूचना केन्द्र में औषधीय पौधों के बारे में सचित्र जानकारी देने वाली दो दिवसीय प्रदर्शनी यादगार रही। प्रदर्शनी को देखने दोना ही दिन पर्यावरण, आयुर्वेद, जडी-बूटियों, जैव भूगोल और चिकित्सा जगत में रुचि रखने वाले जिज्ञासुओं, विद्यार्थियों और शोधार्थियों का जमघट लगा रहा। इस दो दिवसीय प्रदर्शनी का समापन गुरुवार रात आयोजित समारोह में वयोवृद्ध स्वतन्त्रता सेनानी मास्टर सूरजमल ने पोस्टर हटा कर किया। इससे पूर्व उन्होंने प्रदर्शनी का सम्पूर्ण अवलोकन किया तथा इसे सराहनीय प्रयास बताया।
इस अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि वयोवृद्ध स्वतन्त्रता सेनानी मास्टर सूरजमल ने महाभारत, वेदों तथा उपनिषदों के उद्धरण देते हुए कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में प्रकृति ने हमें अनमोल प्राणदायक औषधीय पौधों को प्रदान किया है। सदियों से मानव समुदाय इस नैसर्गिक विरासत का प्रयोग करता आ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय मूल की आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का आधार औषधीय पादप ही हैं लेकिन हम हमारी प्राणदायिनी इस विरासत से दूर होकर अंग्रेजी दवाइयों का अन्धानुकरण कर रहे हैं।
उन्होंने भौतिकवाद के बढ रहे प्रचलन पर चिन्ता व्यक्त की और कहा कि मशीनीकरण व आधुनिकीकरण के प्रभाव से अपनी नैसर्गिकता को नष्ट किया जा रहा है जो आने वाले समय के लिए घातक सिद्व होगा।
प्रदर्शनी के आयोजक राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय, उदयपुर के भूगोल व्याख्याता डॉ. लक्ष्मीलाल सालवी ने अतिथियों का माल्यार्पण से स्वागत किया और प्रदर्शनी के उद्देश्यों, विषय वस्तु के बारे में विस्तृत से जानकारी देते हुए भारतीय मूल तथा परम्परागत चिकित्सा पद्धति संरक्षित करने व औषधीय पादपों की कृषि करने, प्राकृतिक रूप से इन्हें पुनःस्थापित करने पर बल दिया ।
समापन समारोह का संचालन राजकीय महाविद्यालय बांसवाडा के भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. के.एम. सिंघाडा ने किया व आभार प्रदर्शन की रस्म राजकीय महाविद्यालय के प्रो. प्रमोद कुमार वैष्णव ने अदा की। इस अवसर पर विनोद पानेरी, जलज जानी आदि लेखकों ने भी विचार रखे। दो दिवसीय इस प्रदर्शनी का अवलोकन करने वाले बुद्धिजीवियों, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों, खिलाडयों, विद्यार्थियों आदि ने इस आयोजन की सराहना की।