राजस्थान सांस्कृतिक समारोह ने मोहा ग्रामीणों का मन 28 Dec
2007
कला जत्था के कलाकारों ने लोक कलाकार शिवनाथ रावल के नेतृत्व में गीत-नृत्यों, नाटिका और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देते हुए शासन की योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी और विकास का पैगाम ग्रामीणों को दिया।
बांसवाडा, २८ दिसम्बर/ वर्तमान राज्य सरकार के ४ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सूचना एवं जन सम्फ विभाग तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार रात बांसवाडा पंचायत समिति के अबापुरा गांव में उदीयमान राजस्थान सांस्कृतिक समारेाह ने ग्रामीणों का मन मोह लिया।
कला जत्था के कलाकारों ने लोक कलाकार शिवनाथ रावल के नेतृत्व में गीत-नृत्यों, नाटिका और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देते हुए शासन की योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी और विकास का पैगाम ग्रामीणों को दिया।
समारोह की अध्यक्षता अबापुरा ग्राम पंचायत के सरपंच मानशंकर मईडा ने की जबकि बांसवाडा पंचायत समिति के प्रगति प्रचार अधिकारी अरुण कुमार व्यास मुख्य अतिथि और सहायक कृषि अधिकारी रंगजी निनामा एवं क्षेत्रीय कृषि पर्यवेक्षक भरत कुमार स्वर्णकार विशिष्ट अतिथि थे।
कला जत्थे ने लोक कलाकार शिवनाथ रावल के नेतृत्व में अपने सांस्कृतिक आयोजनों की धूम मचा दी। दल प्रभारी शिवनाथ रावल ने परिवार कल्याण पर कविता ’’माँ ने पेट में सोरो बोल्यो, हूण भगवान तू मारी वात, आठ भाई त पेले मौजूद, मने केम मोकले मारो नाथ...‘‘ सुनाकर बडे परिवार के संकट और समस्याओं का खाका खींचते हुए छोटे परिवार का संदेश दिया।
लोक कलाकार शिवनाथ, नारायण, बंसीलाल व प्रेमनाथ ने मिलकर स्थानीय वागडी बोली में लघु नाटिका ’’वगर हमज नी वात‘ का मंचन कर शिक्षा की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस दौरान् कलाकारों ने समवेत स्वरों म ’’अनपढ भईया इस दुनिया को जाने ना‘‘ गीत सुनाते हुए निरक्षर की जीवन व्यथा को बिम्ब दिए।
इन्हीं कलाकारों ने नाटक ’’वगर भण्यो रामू‘‘ पेश कर शिक्षा, परिवार कल्याण, स्वास्थ्य, पल्स पोलियो आदि पर प्रचारात्मक संदेश दिया। कलाकार बंसीलाल निनामा ने ’’सोरी रे इस्कूल भणवा जाजे...इस्कूल में तारू मान बडेगा रे..‘‘ के बोल पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया।
शिवनाथ रावल ने लोक जीवन की बुराइयों और कुरीतियों पर कटाक्ष करता अपना गीत ’’वागड न मनकं, हाथे तकी हैरान हैं...‘‘ प्रस्तुत कर आम आदमी के जीवन की विषमताओं के लिए व्यक्ति की नकारात्मक मानसिकता और दुर्व्यसनों को जिम्मेदार ठहराया।
रावल का गीत ’’ गामे गामे फरे-फरे, ढाणी-ढाणी घेरे घेरे, शिक्षा पूगाडवी है, अमने जनता जगाडवी है..‘‘ ग्रामीणों को खूब भाया। उन्हीं के चेतना गीत ’’गाम वारे पांस वाते हुणो तमे..‘‘ ने ग्रामीणों को विकास के मूल मंत्र से परिचित कराया।
शिवनाथ रावल द्वारा प्रस्तुत गणेश वन्दना ’’ओ आवो आवो रे गजानन देवा रे, आणी शोभा में रंग बरसावो रे...‘‘ तथा भारत माता वन्दना से शुरू हुए सांस्कृतिक समारोह में कलाकारों ने स्थानीय वागडी बोली में ’’अमारी आ वाते, मली ने विशारो/मली ने विशारो, ने जमानो हदारो...‘‘ सुनाकर ग्रामीणों को मिल-जुल कर विकास करने और घर-परिवार को संवारने का पैगाम दिया। ग्रामीण कलाकार श्रीमती इलाची ने भी अपने कार्यक्रम प्रस्तुत किए। हारमोनियम पर बंसीलाल, ढोलक पर प्रेमनाथ तथा मजीरे पर नारायणशंकर डामोर ने संगत करते हुए वाद्यों की सुमधुर संगीत माहौल में घोल दिया। लोक कलाकार हरीश रोत ने महिला पात्र का वेश धारण कर मनोहारी नृत्य से समा बांध दिया।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रगति प्रचार अधिकारी अरुण कुमार व्यास ने लोक कलाकारों के कार्यक्रम की सराहना की और ग्रामीणो ंसे कहा कि वे सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी पाने के लिए खुद पहल करें और इनका लाभ लें।
उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार ने आम आदमी के विकास तथा कल्याण की ढेरों योजनाओं को लागू किया है मगर इनका लाभ लेने के लिए ग्रामीणों को जागरुक रहना होगा।
अध्यक्षीय उद्बोधन में अबापुरा ग्राम पंचायत के सरपंच मानशंकर मईडा ने ग्रामीण विकास के लिए सभी विभागों की भागीदारी व समन्वय पर जोर दिया और कहा कि गांवों में ज्यादा से ज्यादा कार्यक्रमों का आयोजन जरूरी है।
इस अवसर पर पोस्टमैन बापूलाल मईडा, एएनएम चन्दा सिंह एवं सुषमा पुरोहित, सचिव प्रभुलाल निनामा एवं हंसराज, समाजसेवी लालुभाई सहित बडी संख्या में ग्रामीण नर-नारी एवं बच्चे उपस्थित थे। संचालन शिवनाथ रावल ने किया जबकि आभार प्रदर्शन की रस्म लेम्प्स अध्यक्ष रकमचन्द ने अदा की।