सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार के उस फैसले को सही करार दिया है, जिसमें उसने एक मुस्लिम कर्मचारी लियाकत अली को दूसरी शादी करने की वजह से नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि पहली पत्नी के रहते कोई भी सरकारी कर्मचारी दूसरा विवाह नहीं कर सकता। अगर कोई लोकसेवक ऐसा करता है तो उसे सरकारी नौकरी से बर्खास्त करना उचित है। राज्य सरकार की ओर से शुक्रवार को जयपुर में दी गई जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला राज्य सरकार के विरुद्ध पुलिस कांस्टेबल लियाकत अली की विशेष अनुमति याचिका पर दिया है। न्यायाधिपति वी.एस.सिरपुरकर और न्यायाधिपति आफताब आलम की बैंच ने राज्य सरकार की इस दलील को मंजूर कर लिया कि राजस्थान सिविल सर्विसेज (कंडक्ट) रूल 1971 के नियम 25 (1) के अनुसार सरकारी कर्मचारी पहली पत्नी के जीवित होते दूसरा विवाह नहीं कर सकता। कांस्टेबल लियाकत अली के मामले में यह दलील दी गई थी कि उन्होंने अपनी पहली पत्नी फरीदा खातून से मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार तलाक लेने के बाद मकसूदा खातून से दूसरा विवाह किया। मामले में जांच अधिकारी ने पाया कि अली ने पहली पत्नी से तलाक लिए बिना मकसूदा खातून से दूसरा विवाह कर लिया और ऐसा करने से पहले उन्होंने सरकार से भी कोई अनुमति नहीं