होमवर्क करने की जरूरत नहीं पड़ती : गुरदीप कोहली पुंज
29 Apr
2008 मुंबई के सर जेजे कालेज आफॅ आर्ट्स से कॉमर्शियल आर्ट की स्नातक चर्चित मॉडल गुरदीप कोहली और अब अभिनेता अर्जुन पुंज के साथ विवाह करने के बाद गुरदीप कोहली से गुरदीप पुंज बनी अभिनेत्री के लिए यह समय जश्न मनाने का है।
मुंबई के सर जेजे कालेज आफॅ आर्ट्स से कॉमर्शियल आर्ट की स्नातक चर्चित मॉडल गुरदीप कोहली और अब अभिनेता अर्जुन पुंज के साथ विवाह करने के बाद गुरदीप कोहली से गुरदीप पुंज बनी अभिनेत्री के लिए यह समय जश्न मनाने का है। इसकी वजह है कि लंबे अरसे बाद उन्होंने एकता कपूर के जी टीवी पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक कसम से में प्राची देसाई की बानी वाली भूमिका से वापसी की है। उनके लिए यह तसल्ली की बात है कि प्राची के बाद करीब बीस साल के लीप में आगे बढ़ी कहानी में उनकी एंट्री को दमदार प्रशंसा भी मिली है। १९९९ में अपनी पहली विज्ञापन फिल्म करने वाली गुरदीप तब से अब तक करीब चालीस से अधिक विज्ञापनों में काम कर चुकी हैं और उन्होंने दक्षिण की तीन सुपर हिट फिल्मों के अलावा स्टार के ‘संजीवनी’ के बाद जी के ही धारावाहिक ‘सिंदूर’ से जो लोकप्रियता हासिल की बानी की भूमिका के साथ अब उसका विस्तार भी हो रहा है। वे पहली ऐसी अभिनेत्री हैं जिन्होने स्टार के किसी शो से पहली बार किसी और चैनल पर काम करने का साहस दिखाया था और आज उसी के कारण वे फिर चर्चा में हैं। हालांकि स्टार का भाभी जैसा धारावाहिक ही उनके विवाह से पहले का अंतिम धारावाहिक भी था। प्रस्तुत है एक मुलाकात।
संजीवनी की जूही और सिंदूर की वेदिका के बाद कसम से की बानी के रूप में लौटना कैसा है । एकता कैंप में इतनी आसानी से एंट्री नहीं मिलती ?
यह तो मैं नहीं जानती, लेकिन इतना जरूर है कि किसी लोकप्रिय धारावाहिक में किसी नायिका की जगह लेना चुनौती भरा काम है। पर आप इसे रिप्लेस भूमिका की तरह मत देखिए। अब इसकी कहानी बीस साल आगे बढ़ गई हैं और अब मैं इसमें एक सत्रह साल की लडकी की माँ भी हूँ।
बानी के चरित्र के लिए आपने क्या तैयारी की है ?
कुछ नहीं, मैंने कसम से पहले नहीं देखा था सो तैयारी की जरूरत नहीं थी। एकता ने कहा कि यह पूरी तरह बदली हुई भूमिका है। मैं कोई नई अभिनेत्री तो हूँ नहीं कि मैं घबरा जाऊं।
कहा जा रहा है कि प्राची ने यह धारावाहिक इसलिए छोड़ा कि वे माँ की भूमिका नहीं करना चाहती थीं, फिर आपने क्यों कर ली ?
प्राची दरअसल कोई फिल्म कर रही हैं शायद। मैं उन्हें नहीं जानती और न कभी उनसे मिली हूँ। जहाँ तक माँ की भूमिका की बात है तो यह तो मेरे लिए और भी रोमांचक और चुनौतीपूर्ण है कि इस उम्र में मैं इतनी बड़ी भूमिका कर रही हूँ। यह मैं पहले सिंदूर में भी कर चुकी हूँ। मैं जानती हूँ कि मैं क्या कर रही हूँ ।
फिर आपने नाइन एक्स का गुडमॉर्निग क्यों छोड़ दिया, क्या तब आप नहीं जानती थी कि आप क्या कर रही हैं ?
ऐसी बात नहीं है, तब उसकी टीआरपी सही नहीं थी और मैं अपने धारावाहिक सिंदूर के प्रमोशन के लिए चीन गयी थी। उसे चीनी भाषा में भी डब किया गया है।
संजीवनी और सिंदूर के बाद भाभी और अब कसम से में क्या अलग है ?
सारी भूमिकाएं अपने अपनी-अपनी जगहों पर महत्वपूर्ण हैं। संजीवनी की भूमिका के बाद सिंदूर की भूमिका एक मनोरोगी की भूमिका थी। वह कुछ कुछ सदमा की श्रीदेवी की भूमिका से प्रेरित थी पर साहस बहूँ वाले तंत्रों से अलग थी। जहाँ तक संजीवनी की बात है तो वह पहला ऐसा शो था जो अस्पतालों की जिंदगी पर बनाया गया था।
यह भी एक सच्चाई है कि शिकागो होप, इमरजैंसी रूम, न्यूयार्क पुलिस डिपार्टमेंट और ब्लू जैसे धरावाहिक हमारे संजीवनी और धड़कन से अलग और आगे की कहानी कहते हैं ?
वे हमारे परिवेश और अभिप्रायों से अलग हैं, लेकिन मानवीय संबंधों का आधार तो एक ही होता है। हर कथानक के दो ट्रैक होते हैं और दर्शक भी दो तरह के होते हैं। इसलिए हमारे यहाँ भी दो तरह का जीवन दिखाया गया है।
दक्षिण की फिल्में करते समय भाषा की समस्या नहीं आती?
थोड़ी-बहुत तो आती है, पर डबिंग ने समस्या आसान कर दी है। नादिरा बब्बर के साथ नाटकों की कार्यशाला में भाषा का जो प्रशिक्षण लिया वह यहाँ बहुत काम आया।
टीवी और फिल्मों में क्या फर्क है आपके लिए ?
ज्यादा कुछ नहीं, बस टीवी में रोज आप दर्शकों से जुड़ते हैं और सिनेमा में जुड़ाव सीमित होता है। टीवी पर हम चरित्रों को विकसित कर सकते हैं जबकि सिनेमा में उसकी सीमाओं के बाद आप उसे छू भी नहीं सकते। हाँ, वहाँ पैसा और प्रसिध्दि भी अधिक है ।
आपके पति अर्जुन तो फिल्में कर रहे हैं, आपने देखी हैं उनकी फिल्में ?
क्यों नहीं, हाल ही में मैंने उनकी वन टू थ्री देखी हैं। वह कमाल की कॉमेडी करते हैं।
आप फिल्में क्यों नहीं कर रही हैं?
‘कसम से’ रोजाना धरावाहिक है इसी से फुरसत नहीं मिलती, लेकिन जब भी कोई अच्छी भूमिका होगी तो जरूर कंरूंगी।