हनुमानगढ २९ जून। राज्य सरकार ने परिपत्र जारी कर सभी राज्य कर्मियों को पाबंद किया है कि वे लोकशान्ति से संबंधित असंज्ञेय अपराध या लोकशान्ति भंग करने से संबंधित संज्ञेय अपराध किये जाने अथवा किए जाने के आशय की जानकारी होते ही अपने निकटतम मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी को इत्तला करें। राज्यकर्मी द्वारा इस कर्तव्य का निर्वहन नहीं करने पर इसे लापरवाही माना जायेगा। गृह विभाग द्वारा जारी इस परिपत्र में कहा गया है कि ‘‘सुशासन संवाद गोष्ठी २००६’’ में लिए गए निर्णय के अनुसार कानून एवं व्यवस्था प्रबन्धन हेतु अपेक्षित सूचना व्यवस्था सुदृढ बनाने के लिए यह आवश्यक समझा गया है कि लोक सेवकों को इस वैधानिक दायित्व के तत्परता से निर्वहन के लिए पाबंद किया जाए। यह न केवल कानून एवं व्यवस्था की दृष्टि से अपेक्षित है अपितु वैधानिक दृष्टि से भी अनिवार्य है। उल्लेखनीय है कि दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा ३९ के अधीन प्रावधान है कि ‘‘प्रत्येक व्यक्ति जो दण्ड प्रक्रिया संहिता की इस धारा में वर्णित अपराधों से दण्डनीय किसी अपराध के किए जाने से या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा करने के आशय से अवगत है, ऐसा किए जाने या आशय की इत्तला, निकटतम मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी को देगा।’’