जयपुर, प्रमुख शासन सचिव सहकारिता, आर.के. मीणा ने बताया कि राज्य में सहकारी ऋण वितरण व्यवस्था को सरल बनाते हुए सहकारी बैंकों के ऋणियों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाई गई है। उन्होंने बताया कि अब राज्य के केन्द्रीय सहकारी बैंकों द्वारा निजी कोष से दिए जाने वाले ऋण के चैक सीधे ऋणी सदस्य को दिए जायेंगे। उन्होंने बताया कि अब तक ऋणी सदस्य को डीलर की इनवायस के आधार पर डीलर के नाम चैक काटकर कर ऋण दिया जाता था, जिससे ऋणी सदस्य को डीलर की मांग के अनुसार सामान क्रय करना पडता था।गौरतलब है कि सहकारिता मंत्री परसादी लाल मीणा ने पिछले दिनों उच्च स्तरीय बैठक में सहकारी ऋण वितरण व्यवस्था को आसान बनाने और इस व्यवस्था से डीलर प्रथा को हटाने की आवश्यकता प्रतिपादित की थी। मीणा की पहल पर पिछले दिनों केन्द्रीय सहकारी बैंकों से ट्रेक्टर के लिए काश्तकारों को नकद में ऋण वितरण व्यवस्था शुरू की जा चुकी है। सहकारिता मंत्री के निर्देशों के अनुसार ही काश्तकारों को फसली सहकारी ऋण भी अब श्री मीणा ने बताया कि काश्तकारों को अधिकाधिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से केन्द्रीय सहकारी बैंकों को निर्देश दिये गये हैं कि स्वयं के कोषों से दिये जाने वाले ऋण का भुगतान अब सीधे फर्म अथवा विक्रेता को न करके काश्तकारों को ही किया जाएगा। इससे काश्तकार बारगेनिंग कर ट्यूबवैल और बोरवैल के कार्य न्यूनतम दर से करवा सकेंगे। बाजार से कम से कम मूल्य पर मनपसंद ब्राण्ड के ट्रेक्टर, थ्रेसर एवं अन्य कृषि उपकरणों सहित लघु सिंचाई के लिए सबमर्सिबल पम्प सैट (ई.पी.एस. एवं डी.पी.एस.),स्प्रिंकलर सिस्टम, पाइपलाईन (एल.एफ.सी.) आदि क्रय कर सकेंगे। रजिस्ट्रार मुकेश शर्मा ने बताया कि नाबार्ड की ऋण नीति के अनुसार अब तक खरीद के लिए ऋण राशि का भुगतान सीधे फर्म एवं विक्रेता को ही किया जाता था, किन्तु क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार यह अनुभव किया गया कि नकद राशि से ट्रेक्टर आदि क्रय करने वाले लाभार्थियों को बैंक ऋण से क्रय करने वालों की अपेक्षा विक्रेताओं द्वारा अधिक छूट दी जाती है। शर्मा ने बताया कि इस योजना का लाभ उठाने वाले काश्तकारों को बैंक में बचत खाता खोलना जरूरी है। काश्तकार को अपने ऋण प्रार्थना पत्र के साथ बचत खाते की पास बुक के पहले पृष्ठ की फोटो कॉपी एवं बचत खाता संख्या अंकित करनी होगी तथा संयुक्त ऋण के मामलों में सभी ऋणियों को संयुक्त खाते खुलवाने होंगे।अपेक्स बैंक के प्रबन्ध संचालक आर.सी.एस. जोधा ने बताया कि केन्द्रीय सहकारी बैंकों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। ऋण की स्वीकृति किसी भी स्थिति में कम्पनी द्वारा निर्धारित अधिकतम विक्रय मूल्य अथवा दी गई छूट के बाद कम किए गए विक्रय मूल्य से अधिक नहीं होगी। उन्होंने बताया कि आवेदन पत्र अस्वीकृत होने की सूचना सात दिवस के अन्दर अण्डर यूपीसी डाक द्वारा भिजवाई जायेगी तथा स्वीकृत ऋण राशि रेखांकित चैक अथवा पे-आर्डर द्वारा सीधे ऋणी अथवा संयुक्त ऋणियों के खाते में जमा कराई जाएगी। ---