बीकानेर। इन दिनों चलाये जा रहे शुद्ध के लिए युद्ध के तहत शहर में खाद्य पदार्थों में मिलावटों का सिलसिला जारी है। एक ओर जहां बाहर से आये अधिकतर यात्रियों को भोजन आदि की व्यवस्था के लिए होटलों व ढाबों का सहारा लेना पडता है जहां उन्हें भोजन होटल व ढाबों में निम्न स्तर के खाद्य पदार्थ दिये जाते हैं जो कि उनके स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उचित नहीं होते तथा उनका असर उनकी सेहत पर पडे बिना नहीं रहता होटलों व ढाबों में परोसे जाने वाला भोजन जानलेवा भी साबित हो सकता है। अगर समय रहते संबंधित विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। अधिकतर अस्पतालों में पेट दर्द व उल्टी दस्त के मरीजों की संख्या दिनों दिन बढती जा रही है उसके लिए चिकित्सकों का मानना है कि खाद्य पदार्थों की क्वालिटी में अंतर के कारण यह समस्या दिनों दिन बढ रही है चिकित्सकों का कहना है कि हमेशा शुद्ध भोजन ही ग्रहण करें जबकि कई होटलों व ढाबों में एक दिन पूर्व का भोजन भी परोसा जा रहा है जिससे वहां भोजन करने वालों का स्वास्थ्य भी अक्सर खराब रहता है कई यात्रियों का कहना तो यह है ढाबों व होटलों में मिलने वाले बिस्कुट, ब्रेड आदि के पैकिट कई दिन पुराने होते हैं तथा उचित क्वालिटी के न होने के कारण उन्हें चिकित्सा विभाग की शरण लेने को मजबूर होना पडता है। अतः रसद विभाग व चिकित्सा विभाग को चाहिए कि वे होटलों व ढाबों पर समुचित निगरानी रखे और क्वालिटी की वस्तु न रखने वालों के खिलाफ उचित कार्यवाही करे, तभी शुद्ध के लिए युद्ध अभियान की सार्थकता होगी। साथ ही ढाबों व होटलों पर खुले में पडे सामान जिन पर मक्खियां इत्यादि का जमावडा रहता है तथा गंदे कपडे इत्यादि से ढक कर आटे की रोटियां सेकी जाती है जो कि स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित नहीं होती है साथ ही यह खतरनाक बीमारी को भी जन्म दे सकती हैं। संबंधित विभाग ने जल्द ही इन ढाबों व होटलों पर रखी जाने वाली वस्तुओं की जांच सतर्कता से करनी होगी।