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निःशक्तजन कल्याण का कार्य सामाजिक फर्ज - जैन
29 Sep 2007

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बांसवाडा, 29 सितम्बर/ राज्य आयुक्त (निःशक्तजन) खिल्लीमल जैन ने स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और सरकारी एवं गैर सरकारी क्षेत्रों से संबद्धजनों से निःशक्तजनों का जीवन सँवारने के लिए सामाजिक फर्ज की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया है।
निःशक्तजन आयोग के राज्य आयुक्त खिल्लीमल जैन ने शनिवार शाम बांसवाडा कलक्ट्री सभा कक्ष में निःशक्तजन कल्याण से संबंधित समीक्षा बैठक में यह आह्वान किया।
बैठक के आरंभ में अतिरिक्त जिला कलक्टर त्रिभुवनपति ने निःशक्तजन आयोग के आयुक्त का स्वागत किया। बैठक में जिला परिषद के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी टी.सी. बोहरा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक दिलीप रोकडया, समाजसेवी ओम पालीवाल, प्रवीण गादिया, पार्षद देवीलाल यादव, निशक्तजनहितार्थ सेवा समिति व विकलांग संघ के जिलाध्यक्ष जितेन्द्र उपाध्याय व सदस्य गोकुल नायक, रामप्रसाद नायक, रमेश टेलर, प्रीतेश शर्मा, जयेश त्रिवेदी, मूक बधिर विद्यालय के संस्थापक सनत पटवा, अंकुर विद्यालय के शैलेन्द्र सराफ, पूर्व रोजगार अधिकारी नेमराज सहलोत, उपनिदेशक महिला एवं बाल विकास श्रीमती कृष्णा श्रीवास्तव, डॉ. बी. आर. व्यास, अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दीपक पंकज, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद देवडा, सर्व शिक्षा अभियान के सहायक परियोजना समन्वयक प्रवीणचन्द्र त्रिवेदी, अनुजा निगम के परियोजना प्रबंधक मोहकमसिंह सहित अनेक संभागी उपस्थित थे।
निःशक्तजन आयुक्त खिल्लीमल जैन ने कहा कि निःशक्तजन सेवा व विकास के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं का पंजीयन अनिवार्य हो जाएं। इसके लिए अधिनियम की धारा 19 में स्पष्ट प्रावधान है।
जैन ने सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक से कहा कि वे पंचायत समिति स्तरीय निःशक्तजन कल्याण शिविरों का शीघ्र आयोजन कराएं व इसका एक माह पूर्व से ही व्यापक प्रचार-प्रसार हो ताकि दूरदराज रहने वाले निःशक्तजनों को वास्तविक लाभ मिले।
उन्होंने इसकी सूचना विधायक, प्रधान व पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत स्तर तक के जनप्रतिनिधियों तक को समय रहते सूचनाएं भिजवाएं। जैन ने रोडवेज के पास हर दिसम्बर में समाप्त हो जाने तथा हर साल नवीनीकरण कराने की व्यवस्था से परेशानी के बारे में रोडवेज को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्थायी विकलांगता के मामले में कम से कम तीन वर्षीय अवधि के रोडवेज पास जारी किए जाएं ताकि हर साल निःशक्तजनों के लिए नवीनीकरण की समस्या न रहे। उन्होंने पोलियो करेक्शन शिविर शीघ्र आरंभ करने की तैयारी के निर्देश दिए।
निःशक्त आयुक्त खिल्लीमल जैन ने निःशक्तजनों को आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया व इसके लिए सुझाव मांगे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के विभिन्न संस्थानों में निःशक्तजनों के लिए 3 प्रतिशत नियुक्ति के प्रयास जारी हैं। जहां इसका पालन नहीं  हो रहा, वहां इसका पालन कराएंगे। उन्होंने बताया कि यह प्रयास हो रहा है कि केन्द्र/राज्य सरकारी द्वारा अनुदानित संस्थाओं में भी निःशक्तजनों को 3 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिले तो 31 जनवरी से इनका अनुदान बंद हो जाएगा। इसके लिए ऐसी संस्थाओं की जिलास्तर पर बैठक बुलाकर कडाई के साथ पालना कराने निर्देश दिए।
जैन ने निःशक्तजनों के कल्याण तथा राज-काज से जुडे व्यक्तियों से कहा कि वे प्रदेश में निःशक्तजनों को रोजगार के अवसर देने औद्योगिक संस्थाओं को प्रेरित करें तथा रोजगार के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था कराएं। ये प्रशिक्षण संस्थाओं/ट्रस्ट/उद्योगपतियों के माध्यम से कराए जा सकते हैं। निःशक्तजनों के लिए रोजगार गारंटी का मकसद पूर्ण करने वाली इस योजना को सामाजिक दायित्व मानकर पूरा करने के निर्देश उन्होंने जिला प्रशासन को दिए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि भीलवाडा में इसी प्रकार 1 हजार निःशक्तजों को रोजगार से जोडे जाने की योजना शुरू की जा रही है। इस प्रकार का सामाजिक फर्ज निभाकर निःशक्तजनों की सच्ची सेवा की जा सकती है।
जिला परिषद के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी टी. सी. बोहरा ने विभाग से कहा कि वे सर्वे कर चिह्नीकरण करें, निःशक्तजनों को पंचायत समितियों के माध्यम से 20-22 ट्रेड्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
जैन ने कहा कि निःशक्तजन ज्यादा मेहतन व लगन से काम करते हैं क्योंकि उनमें एकाग्रता ज्यादा होती है। समाज के निःशक्तजन ज्यादा ऊर्जा व क्षमता से काम करते हैं।
जैन ने कहा कि निःशक्तजनों में यदि कोई शारीरिक दोष हैं तो अन्यों के मुकाबले गुण भी ज्यादा है। कई प्रकार के उनके शारीरिक दोष जीवनचर्या व विकास के लिए गुणों का काम करते हैं। समाज के इस बहुत बडे वर्ग को संबल देने की जरूरत है।
जैन ने विकलांग बच्चों की छात्रवृत्ति बढाने पर चर्चा के दौरान कहा कि इसे बढाने, निःशक्तजनों की पेंशन के नियम ठीक करने सरकार को आग्रह किया गया है।  सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक दिलीप रोकडया ने विभागीय योजनाओं की जानकारी दी।




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